आदित्यनाथ से मिलने पहुंचे पुजारी, बोले- राम मंदिर को गंभीरता से लें वर्ना देखेंगे 2019 में क्या करना है - Mahant Suresh Das said Build Ram mandir or face defeat in 2019 - Jansatta
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आदित्यनाथ से मिलने पहुंचे पुजारी, बोले- राम मंदिर को गंभीरता से लें वर्ना देखेंगे 2019 में क्या करना है

बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि अगर साधू-संत मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करना चाहते हैं तो दूसरे पक्ष को भी मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू कर देना चाहिए।

महंत सुरेश दास ने कहा कि अगर मोदी सरकार इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो अयोध्या के साधू-संत जल्द ही एक आंदोलन करेंगे। (ANI photo)

लखनऊ में दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास सहित पुजारियों का एक समूह आज (7 जून, 2018) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से मुलाकात कर रहा है। मुलाकात में राम मंदिर के मुद्दे को मुख्य रूप से उठाया जाएगा। एएनआई की खबर के मुताबिक पुजारियों का सख्त संदेश है कि सरकार को मंदिर निर्माण कार्य को गंभीरता से लेना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो देखेंगे (पुजारी) 2019 में क्या करना है। वहीं महंत सुरेश दास ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इस साल राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो केंद्र की भाजपा सरकार को साल 2019 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है। राष्ट्रपति भाजपा से संबंधित हैं। यूपी में भाजपा के पास भारी बहुमत है। अगर अब भी राम मंदिर नहीं बनाया गया तो इसे कब बनाया जाएगा? अगर भाजपा अब इस मुद्दे से दूर हो रही तो पार्टी को अगले लोकसभा चुनाव में जीत की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।’

महंत सुरेश दास ने कहा कि अगर मोदी सरकार इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो अयोध्या के साधू-संत जल्द ही एक आंदोलन करेंगे। वहीं राम मंदिर के मुख्य अस्थाई पुजारी महंत सतेंद्र दास ने कहा कि देश के सभी साधू-संतो को अब एक साथ बैठना चाहिए और सोचना चाहिए और भाजपा जो राम मंदिर बनाने की उत्सुक नहीं लगते, उसके विकल्प पर विचार करना चाहिए।

मामले में बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि अगर साधू-संत मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करना चाहते हैं तो दूसरे पक्ष को भी मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की सहमति के बाद फैसला लिया गया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे। अगर कोर्ट के फैसले से पहले ही हिंदू नेता मंदिर निर्माण कार्य करना चाहते हैं तो मुस्लिम भी मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू कर देंगे। बाद में इसके परिणाम की जिम्मेदार सरकार होगी।

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