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3 पेज की एफआईआर से खुलासा, बीएचयू में छेड़छाड़ का कितना खौफनाक रूप

पीड़‍िता ने एफआईआर में अपना दर्द और गार्डों की बदतमीजी भी बयान की है।
विश्‍वविद्यालय में शनिवार (23 सितंबर) रात प्रदर्शन करती छात्राओं और पुलिस के बीच भिड़ंत हुई थी। (Photo: PTI)

बनारस हिन्‍दू यूनिवर्सिटी में छेड़छाड़ की शिकार हुई छात्रा ने जो तीन पन्‍नों की एफआईआर दर्ज कराई है, उसमें कई चौंकाने वाली बातें दर्ज हैं। कॉलेज परिसर में तैनात गार्ड किस तरह लड़कियों को ही दोषी ठहराते हैं, इसका जिक्र शिकायत में किया गया है। पीड़‍िता ने आरोप लगाया है कि उसकी मदद करने की बजाय गार्ड ने उससे और उसके दोस्‍तों से यह पूछा कि शाम 6 बजे के बाद वह हॉस्‍टल के कमरों से बाहर क्‍यों थी। टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एफआईआर में दर्ज है कि घटना 21 सितंबर को शाम 6.20 बजे हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचने वाले थे। एफआईआर में पीड़‍िता ने कहा है, ”मैं 6.20 बजे भारत कला भवन के करीब थी। मैंने सलवार सूट पहन रखा था। अचानक दो मोटरसाइकिल सवार युवक आए और मेरे सूट में हाथ डाल दिया। फिर वे गाड़ी भगाकर फरार हो गए, अंधेरा होने की वजह से मैं रजिस्‍ट्रेशन नंबर नहीं देख सकी।”

पीड़‍िता ने एफआईआर में अपना दर्द और गार्डों की बदतमीजी भी बयान की है। पीड़‍िता ने कहा, ”मैं एकदम बेसुध होकर रो रही थी, मेरे दोस्‍तों ने गार्ड्स से संपर्क किया लेकिन उनका रिएक्‍शन अजीब था। उन्‍होंने इस बारे में तंज कसा कि हम शाम 6 बजे के बाद हॉस्‍टल से बाहर क्‍यों थे।” पीड़‍िता ने दोषियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है कि ताकि ‘ऐसी घटना किसी और के साथ न हो।’

घटना को पांच से ज्‍यादा दिन हो गए हैं और वाराणसी पुलिस ने अभी तक पीड़‍िता का बयान तक दर्ज नहीं किया है। लंका पुलिस थाना प्रभारी संजीव मिश्रा का दावा है कि 21 सितंबर को घटना हुई और अगले दिन एफआईआर दर्ज हो गई। उन्‍होंने कहा, ”जब तक हम शिकायतकर्ता तक पहुंच पाते, वह 23 सितंबर को अपने घर, दिल्‍ली चली गई।”

बीएचयू में छेड़छाड़ के खिलाफ प्रदर्शन कर रही छात्राओं पर लाठीचार्ज के मामले में नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए विश्‍वविद्यालय के चीफ प्रॉक्‍टर ओएन सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है। उनका इस्‍तीफा वीसी जीसी त्रिपाठी ने मंजूर भी कर लिया है। जबकि वाराणसी मंडलायुक्‍त नितिन गोकर्ण ने अपनी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के प्रशासन को दोषी ठहराया है।

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