ताज़ा खबर
 

BHU हिंसा: नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए चीफ प्रॉक्‍टर का इस्‍तीफा, वीसी ने किया मंजूर

वाराणसी के कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने मुख्य सचिव राजीव कुमार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

BHU, BHU protest, BHU harassment, lanketing, BHU girl student, Banaras Hindu University, Lanka market, pm narendra modi, Mahila Mahavidyalaya, Banaras news, varanasi news, hindi news, latest hindi news, uttar pradesh news, jansattaवाराणसी: BHU में छात्राओं पर लाठी चार्ज के बाद यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी (फोटो-पीटीआई 25-0917)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्राओं पर शनिवार की रात हुए लाठीचार्ज के मामले में नैतिक जिम्‍मेदारी लेते हुए चीफ प्रॉक्‍टर ओएन सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है। मंगलवार (26 सितंबर) की रात वीसी जीसी त्रिपाठी ने इस्‍तीफे को मंजूर कर लिया है। मंगलवार को ही कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने कुलपति को तत्काल हटाने की मांग की है। वाराणसी के कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने मुख्य सचिव राजीव कुमार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रशासन को दोषी ठहराया है। इस बीच बीएयचू प्रशासन ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है। शासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, गोकर्ण ने अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेज दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएचयू प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत पर संवेदनशील तरीके से गौर नहीं किया और वक्त रहते इसका समाधान नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर वक्त रहते इस मामले को सुलझा लिया गया होता, तो इतना बड़ा विवाद खड़ा नहीं होता।

इस बीच, कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने अपने बचाव में कहा कि कार्रवाई उन लोगों पर की गई, जो विश्वविद्यालय की संपत्ति को आग लगा रहे थे। उन्होंने एक समाचार चैनल से बातचीत में छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज और परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की बात को झुठलाते कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे को प्रभावित करने के लिए ‘बाहरी तत्वों’ ने कैम्पस का माहौल बिगाड़ा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कैम्पस में पेट्रोल बम फेंक रहे थे, पत्थरबाजी कर रहे थे। किसी भी छात्रा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई का एक भी प्रमाण नहीं है।

कुलपति ने कहा, “23 सितंबर की रात लगभग 8.30 बजे जब मैं छात्राओं से मिलने त्रिवेणी छात्रावास जा रहा था, उस समय अराजक तत्वों ने मुझे रोककर आगजनी और पत्थरबाजी शुरू कर दी।” कुलपति ने कहा कि पीड़ित छात्रा और उसकी सहेलियों के साथ उन्होंने दो बार मुलाकात की। छात्राओं ने उन्हें बताया था कि धरने का संचालन खतरनाक किस्म के अपरिचित लोग कर रहे हैं। उन लोगों ने पीड़ित छात्रा को धरना स्थल पर बंधक बनाकर जबरन बिठाए रखा था। पुलिस ने ऐसे तत्वों को कैम्पस से बाहर करने के लिए ही बल प्रयोग किया।

इस बीच, बीएचयू प्रशासन ने इस पूरी घटना की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश वी.के. दीक्षित की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई है। बीएचयू प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय में 65 और संवेदनशील स्थलों को चिन्हित किया गया है, जहां सीसीटीवी कैमरे स्थापित होंगे। प्रथम चरण में विश्वविद्यालय के द्वार और महिला छात्रावास पर इन्हें लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सुरक्षा तंत्र में महिला सुरक्षाकर्मियों को भी शामिल किया जा रहा है।

Next Stories
1 मुख्यमंत्री को भेजी गई जांच रिपोर्ट में वाराणसी के आयुक्त ने कहा- BHU प्रशासन लापरवाही का दोषी
2 हर लड़की की बात सुनने लगे तो इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी नहीं चल पाएगी: बीएचयू वीसी जीसी त्रिपाठी
3 बीएचयू: यहां लड़कियों को छेड़ना कहलाता है- ‘लंकेटिंग’
ये पढ़ा क्या?
X