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अखाड़ों को 760 करोड़ दे रही योगी सरकार, अर्द्धकुंभ में खर्च करेगी 4200 करोड़

छह साल पहले साल 2013 में इलाहाबाद महाकुंभ मके लिए समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार ने कुल 1300 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था लेकिन योगी सरकार ने उससे तीन गुना ज्यादा धन अर्द्धकुंभ के लिए आवंटित किया है।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ। (एक्सप्रेस फोटोः विशाल यादव)

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले हिन्दुत्व को नई धार देने की कोशिश की है। योगी सरकार ने आगामी अर्द्धकुंभ को देखते हुए इलाहाबाद के हिन्दू अखाड़ों को 260 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है। इन पैसों से अखाड़ा परिषद वहां बुनियादी सुविधाओं का विकास कर सकेगा। इससे पहले भी योगी सरकार इलाहाबाद के 3 बड़े अखाड़ों को 500 करोड़ दे चुकी है। बाकी बचे दस अखाड़ों को ये पैसे आवंटित किए जाएंगे। बता दें कि साल 2019 में 14 जनवरी से लेकर 04 मार्च तक तीर्थराज प्रयाग यानी इलाहाबाद में अर्द्धकुंभ मेला का आयोजन होने जा रहा है। इस दौरान करीब 12 करोड़ श्रद्दालुओं के वहां पहुंचने और संगम में स्नान करने का अनुमान है।

यूपी की योगी सरकार ने 2019 के अर्द्धकुंभ को व्यापक और भव्य बनाने के लिए 4200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका आधा भार केंद्र सरकार वहन करेगी। छह साल पहले साल 2013 में इलाहाबाद महाकुंभ मके लिए समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार ने कुल 1300 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था लेकिन योगी सरकार ने उससे तीन गुना ज्यादा धन अर्द्धकुंभ के लिए आवंटित किया है। योगी सरकार के इस फैसले को सियासी चश्मे और हिन्दुत्व के सहारे चुनावी फायदा लेने की नजर से देखा जा रहा है।

49 दिनों तक चलने वाले अर्द्धकुंभ में तीन शाही स्नान होंगे। इनके अलावा 21 फरवरी को पौष पूर्णिमा, चार फरवरी को मौनी अमावस्या, 10 फरवरी को बसंत पंचमी, 19 फरवरी को माघी पूर्णिमा और चार मार्च का महाशिवरात्रि पर मुख्य स्नान पर्व होंगे। बता दें कि देश में कुंभ मेले का इतिहास करीब 850 साल पुराना है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान विष्णु अमृत से भरा कुंभ (बर्तन) लेकर जा रहे थें कि असुरों से छीना-झपटी में अमृत की चार बूंदें गिर गई थीं। यह बूंदें प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन रुपी तीर्थस्थानों में गिरीं। तीर्थ वह स्थान होता है जहां कोई भक्त इस नश्वर संसार से मोक्ष को प्राप्त होता है। ऐसे में जहां-जहां अमृत की बूंदें गिरी वहां तीन-तीन साल के अंतराल पर बारी-बारी से कुंभ मेले का आयोजन होता है। इन तीर्थों में भी संगम को तीर्थराज के नाम से जाना जाता है। संगम में हर बारह साल पर कुंभ का आयोजन होता है।

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