100 से ज्यादा दलितों के साथ जमीन में बैठे सीएम योगी आदित्यनाथ, पत्तल में खाया खाना, कुल्हड़ में पिया पानी - Uttar Pradesh CM Yogi adityanath to have food with 100 dalits in gorakhpur today - Jansatta
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100 से ज्यादा दलितों के साथ जमीन में बैठे सीएम योगी आदित्यनाथ, पत्तल में खाया खाना, कुल्हड़ में पिया पानी

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्य नाथ आज राज्य में 100 दलितों के साथ खाना खाया।

102 दलितों के साथ योगी आदित्यनाथ ने किया भोज। (ANI Photo)

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने बुधवार को कैंपीयरगंज के हरनामपुर में बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद सूबे के मुखिया ने 102 दलितों के साथ खाना भी खाया। समारोह में पहुंचे योगी ने पीएम मोदी द्वारा की गई नोटबंदी को साहसिक कदम बताते हुए कहा कि इसके प्रेरणास्त्रोत भीमराव अंबेडकर थे। बाबा साहब का कहना था कि देश को आर्थिक भ्रष्टाचार से बचाना है तो हर 10 साल में मुद्रा को बदल दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वह शख्स है, जिन्होंने आजादी के बाद अंबेडकर के विचारों को पूरा करने की हिम्मत दिखाई। योगी आदित्यनाथ बुधवार को गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर भी पहुंचे और पूजा-अर्चना की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस भोज का आयोजन कराने के लिए एक अलग रसोई तैयार की गई थी। खाने में बेहद साधारण पकवान बनाए गए थे। वहीं भोज का आयोजन भी पारम्परिक तरीकों से कराया गया। एएनाआई की ओर से जारी की गई तस्वीरों में योगी आदित्य नाथ को दलितों के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाते हुए दिखाया गया है। योगी समेत सभी को खाना पत्तल में दिया गया और पानी की व्यवस्था कुल्हड़ में की गई।

इंडिया टुडे से बातचीत में कार्यक्रम के संयोजक संजय यादव ने कई बाते बताई थी। उन्होंने कहा था- “ज्यादातर लोग जो योगी जी के साथ खाना खाएंगे वे दलित समुदाय से होंगे। गांव में सभी लोग काफी उत्साहित हैं।” राम स्नेही जो रसोई हेल्पर हैं उन्होंने योगी आदित्य नाथ के मैन्यू की जानकारी दी। खाने में सादे चावल, दाल, आलू परवल की सब्जी और लौकी की सब्जी रखी गई। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि जिस पंडाल में योगी खाना खाएंगे वहां न ही पंखे होंगे न ही कोई एसी होगा।

गौरतलब है योगी आदित्य नाथ के इस कार्यक्रम को सहारनपुर के डैमेज कंट्रोल से जोड़कर भी देखा जा रहा है। बीते महीने सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में महाराणा प्रताप शोभायात्रा के दौरान हुए विवाद के चलते इलाके में हिंसा फैल गई थी। इलाके में लगभग 1 महीने तक तनाव की स्थिति बनी रही और दलित औरराजपूत समुदाय के बीच हुए हिंसक संघर्ष के चलते कई लोगों की जान भी चली गई। हिंसा को लेकर राज्य की बीजेपी सरकार की काफी आलोचना हुई थी। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर दलित विरोधी होने के आरोप लगाए थे।

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