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अफवाह या सच: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में रोजे की वजह से हिन्दू छात्रों को नहीं मिल रहा खाना

फेसबुक पर खुद को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की छात्रा बताने वाली रश्मि सिंह ने इन खबरों को कोरा बकवास बताया और कहा कि यहां खाने-पीने की कोई रोक नहीं है.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना 1877 में हुई थी। (फाइल फोटो)

रोजे की वजह से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक आदेश के बाद कैंटीन का टाइमिंग बदल दिया गया है। यूनिवर्सिटी की ओर से इस बावत एक लिखित आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के मुताबिक यूनिवर्सिटी की टाइमिंग सुबह 8 बजे से दोपहर 2.30 बजे तक कर दी गई है। जबकि शुक्रवार को 12 बजे तक ही खुली रहेगी। इसके साथ आदेश में ये भी लिखा गया है कि यूनिवर्सिटी के किसी भी मीटिंग या समारोह में किसी भी तरह का नाश्ता-पानी परोसा नहीं जाएगा ताकि रमजान की पवित्रता बनी रहे। यूनिवर्सिटी के इस आदेश पर सोशल मीडिया में कई तरह की टिप्पणियां देखने को मिल रही है। कुछ लोग ये पोस्ट कर रहे हैं कि एएमयू में हिन्दू छात्रों को वक्त पर खाना नहीं दिया जा रहा है, और उन्हें मुस्लिम छात्रों के साथ जबरन रोजा रखने को मजबूर किया जा रहा है।

आसिमा सिंह ने ट्वीटर पर लिखा है कि, ‘रमजान की वजह से हिन्दू छात्रों को ब्रेकफास्ट, लंच नहीं दिया जा रहा है।  क्या आपने कहीं देखा है कि अल्पसंख्यक बहुसंख्यकों पर अपना मत थोपते आ रहे हो।’ वहीं अंशुल सक्सेना नाम के यूजर ने लिखा है कि ‘एनसीईआरटी में नक्सली नेता और नक्सली विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं एएमयू में गैर मुस्लिम छात्रों को लंच और ब्रेकफास्ट नहीं मिल रहा है, आखिर एचआरडी मंत्रालय कर क्या रहा है।’

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