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मुख्तार अंसारी के बेटे ने अखिलेश को बताया विश्वासघाती, कहा – विलय के लिए मुलायम ने किया था संपर्क

अब्बास ने बताया कि उनके साथ संप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए एक बहुत बड़ा तबका मुस्लिम समाज का और हिंदू भी उनके साथ जुड़ा हुआ है।

बेटे अब्बास मुख्तार अंसारी के साथ मुख्तार अंसारी (source- Twitter)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 7 में से 4 चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। 5वें चरण में 11 जिलों की 51 सीटों पर 27 फरवरी को मतदान होना है। इसी के साथ आज शाम को 11 जिलों के 51 सीटों के चुनाव के लिए प्रचार थम गया। इस बीच मुख्तार अंसारी के बेटे और घोसी से बसपा के उम्मीदवार अब्बास बिन मुख्तार अंसारी ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने हमारे साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा, जब नेता जी और अखिलेश के बीच तनाव की स्थति थी उस वक्त हमसे हलफनामा लेकर चुनाव आयोग में दाखिल क्यों की? अखिलेश ने आयोग में क्यों कहा कि मुख्तार अंसारी और सिग्बतुल्ला अंसारी उनके साथ हैं?

अब्बास ने कहा, ‘मेरे पिता के पार्टी कौमी एकता दल की समाजवादी पार्टी में जब विलय की बात चल रही थी उस वक्त पार्टी में हड़कंप मच गया था। तब तत्कालीन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव थे और उन्होंने विलय को हरी झंडी दिखा दी थी, लेकिन अखिलेश ने हमारे साथ धोखा किया और उन्होंने विलय की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।’ अब्बास ने कहा कि अंसारी पूर्वी हिस्से के जाने माने नेता हैं और वो बुनकरों के चहेते हैं।

उन्होंने कहा, मेरे पिता के बारे में गलत माहौल बनाया गया है। हमें हर बार निशाना बनाया जाता है। जबकि, ऐसे लोग राजा भैया, गायत्री प्रजापति और पंडित सिंह हैं, जोकि सपा में हैं। बता दें कि मुख्तार अंसारी समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद अपने भाई और बेटे को बसपा में शामिल करा चुके हैं। विधायक मुख्तार अंसारी पूर्वी उत्तर प्रदेश में मऊ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं बेटे अब्बास घोसी से चुनाव मैदान में हैं और मुख्तार के भाई सिग्बतुल्ला अंसारी मोहम्मदाबाद से बसपा के उम्मीदवार हैं।

अब्बास ने बताया कि उनके साथ संप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए एक बहुत बड़ा तबका मुस्लिम समाज का और हिंदू भी उनके साथ जुड़ा हुआ है। जबकि सपा सरकार में मुस्लिम समाज के साथ अन्याय किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सपा के गठबंधन से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। इस बार जीत हमारी ही होनी है।

गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी ने बसपा के टिकट पर 1996 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, बाद में कई आरोप लगने के बाद उन्होंने 2002 और 2007 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़ा, जिसमें उन्होंने जीत भी हासिल की। अंसारी 2007 में एक बार फिर बसपा में शामिल हो गए और 2009 में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा। हालांकि, इसमें वो हार गए। फिर 2010 में अपराधिक गतिविधियों में उनका नाम आने से पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। इसके बाद वो फिर से एक ही साल में अपनी पार्टी कौमी एकता दल का गठन करके 2012 के विधानसभा चुनाव में खड़े हो गए।

देखिए वीडियो - मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हुआ; मुलायम सिंह यादव ने दी हरी झंडी

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