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आडवाणी के करीब तनवीर हैदर उस्मानी दुनिया से हुए अलविदा…

उस्मानी के बेटे अनज ने बताया कि वह काफी दिनों से बीमार थे। जिनका इलाज चल रहा था और एक सप्ताह पहले उनकी तबियत अधिक खराब हुई तो अस्पताल में भर्ती कराया गया।

Author April 29, 2019 11:33 PM
तनवीर हैदर उस्मानी

उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन और लालकृष्ण आडवाणी के करीबी तनवीर हैदर उस्मानी अब दुनिया में नहीं रहे। उनका निधन सोमवार को कानपुर के एक निजी अस्पताल में हो गया। वह काफी दिनों से बीमार थे और एक सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थे। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद पिछले वर्ष छह फरवरी को कानपुर के रहने वाले तनवीर हैदर उस्मानी को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाया गया था। जिनका निधन सोमवार को कानपुर के एक निजी अस्पताल में हो गया।

उस्मानी अपने पीछे दो बेटे अनज उस्मानी, असद उस्मानी और एक बेटी साइमा उस्मानी को छोड़ गये। बेटे अनज उस्मानी ने बताया कि वह काफी दिनों से बीमार थे। जिनका इलाज चल रहा था और एक सप्ताह पहले उनकी तबियत अधिक खराब हुई तो अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया कि उन्हे निमोनिया की बीमारी थी और निमोनिया अधिक होने से किडनी में भी दिक्कत आ गयी थी। किडनी में समस्या के कारण भर्ती उस्मानी को अचानक दो बार कार्डियक अरेस्ट भी हुआ। जिससे आज उनका निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी पर उनके चाहने वालों का अस्पताल में पहुंचना शुरु हो गया है।

बेटे ने बताया कि करीबियों के आने के बाद उनको सुपुर्दे खाक किया.बेटे के मुताबिक राजनीति में आने से पहले उन्होंने अपना कैरियर कानपुर के एक प्रतिष्ठित हिन्दी अखबार से शुरु किया था और लालकृष्ण अडवाणी से प्रभावित होकर राजनीति में उतर गये थे। 63 वर्षीय उस्मानी इस अखबार में 1974 से 1994 तक संवाददाता रहे। लालकृष्ण अडवाणी से नजदीकी होने के चलते भाजपा से वर्ष 1994 में विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए।

वर्ष 2000 तक भाजपा के एमएलसी रहने के बाद वह 2002 में भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। इस पद पर वह 2008 तक रहे। इस दरम्यान लालकृष्ण आडवाणी, वेंकेया नायडू और राजनाथ सिंह जैसे तीन वरिष्ठ नेताओं के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के दौरान भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। वर्ष 2008 के बाद वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में सदस्य भी रहे। इसके बाद राज्यपाल द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद में नामित सदस्य भी बने और अंतिम समय तक बने रहे।

एक वर्ग सदैव रहता था नाराज-

उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन तनवीर हैदर उस्मानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एग्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) के मेंबर भी थे। बेटे अनज उस्मानी ने बताया कि चेयरमैन बनने के बाद जब वह पहली बार एएमयू पहुंचे तो कुलपति प्रो. तारिक मंसूर, शिक्षक व छात्रों ने उनका जोरदार स्वागत किया था। लेकिन उनके विचार अक्सर एएमयू के खिलाफ रहते थे। जिसके चलते वहां के छात्रों का एक वर्ग सदैव उनसे नाराज भी रहता था। इसी के चलते उन्होंने अगस्त 2018 में हुई ईसी की बैठक का बहिष्कार भी कर दिया था। उन्होंने उस दौरान आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय प्रशासन संपत्तियों और उस पर हुए कब्जों का ब्योरा नहीं दे रहा है। जबकि बीते छह माह में कई बार इसकी जानकारी मांगी गयी थी। हालांकि आज उनके निधन पर एएमयू बिरादरी ने शोक जताया है।

प्रेस क्लब ने जताया शोक-

पत्रकारिता के दौरान उनकी लेखनी से पत्रकार ही नहीं पूरा शहर कायल हुआ करता था। जिसके चलते उन्हे कानपुर प्रेस क्लब का उपाध्यक्ष भी बनाया गया था। उस्मानी के निधन की जानकारी पर प्रेस क्लब में शोक जताया गया। प्रेस क्लब के अध्यक्ष अवनीश दीक्षित ने कहा कि आज हमने कलम के अच्छे सिपाही को खो दिया है। महामंत्री कुशाग्र पाण्डेय ने कहा कि उस्मानी जी राजनीति में रहते हुए भी पत्रकारिता से उनका नाता सदैव बना रहा और समय-समय पर प्रेस क्लब आकर पत्रकारों को पत्रकारिता की बारीकियां बताते थे। इस दौरान उपस्थित पत्रकारों ने नम आंखों से उन्हे श्रद्धांजलि दी।

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