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जाएगी महेंद्र नाथ पांडे की कुर्सी? यूपी में बीजेपी किसी ओबीसी को बना सकती है अध्यक्ष

ओबीसी यूपी की आबादी में 52 से 53 फीसदी है। इनमें से यादवों की आबादी 8 फीसदी है। बीजेपी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में गैर यादव ओबीसी वोटों की सफलतापूर्वक गोलबंदी अपने पक्ष में की है। लेकिन एसपी-बीएसपी के एक प्लेटफॉर्म पर आने की वजह से बीजेपी को इस वोट बैंक में सेंध की शंका है।

यूपी बीजेपी अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडेय (बीच में) साथ में हैं सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (पीटीआई फाइल फोटो)

2019 के लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरण को भरपूर तवज्जो दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक अत्यंत पिछड़ा जातियों के वोटरों को साधने के लिए बीजेपी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष को बदल सकती है। इस वक्त चंदौली से सांसद महेंद्र नाथ पांडेय यूपी बीजेपी के अध्यक्ष हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक नाम ना बताने की शर्त पर पार्टी के एक सीनियर ने नेता ने कहा, “बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की पिछले सप्ताह यूपी यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी। जातीय रूप से अहम उत्तर प्रदेश की सियासत में इस वक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ठाकुर समुदाय से आते हैं। योगी आदित्यनाथ का सपोर्ट बेस मुख्य रूप से पूर्वांचल और गोरखपुर में है।

वर्तमान अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पांडेय ब्रह्माण समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और वह भी पूर्वांचल से ही हैं। उनका संसदीय क्षेत्र चंदौली वाराणसी के करीब है। पीएम मोदी भी वाराणसी से सांसद हैं। सूत्रों के मुताबिक अगर महेन्द्र नाथ पांडेय से अध्यक्ष पद की कुर्सी ली जाती है तो उन्हें किसी राज्य में राजभवन भेजा जा सकता है, ताकि ब्रह्माण लॉबी को भी खुश रखा जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक एक नेता ने दावा किया कि अगर उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक बदलाव होता है तो राज्य के परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। स्वतंत्रदेव सिंह कुर्मी समुदाय के नेता है और बुंदेलखंड क्षेत्र से आते हैं। इसके अलावा वह अमित शाह के भी विश्वस्त रह चुके हैं। स्वतंत्रदेव सिंह यूपी बीजेपी में पार्टी महासचिव भी रह चुके हैं। संगठन के कामों में अच्छा खासा अनुभव रखने वाले स्वतंत्रदेव सिंह 2016 में भी यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनने की रेस में थे। लेकिन तब बीजेपी ने फूलपुर सांसद केशव प्रसाद मौर्य को अध्यक्ष बनाया था।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के नेता का कहना है कि पार्टी के ओबीसी नेताओं में एक धारणा बनती जा रही है कि हालांकि उन्होंने पिछले दो चुनावों- 2014 और 2017- में बीजेपी को सपोर्ट किया था लेकिन उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी इस धारणा को तोड़ने की कोशिश कर रही है। बता दें कि ओबीसी यूपी की आबादी में 52 से 53 फीसदी है। इनमें से यादवों की आबादी 8 फीसदी है। बीजेपी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में गैर यादव ओबीसी वोटों की सफलतापूर्वक गोलबंदी अपने पक्ष में की है। लेकिन एसपी-बीएसपी के एक प्लेटफॉर्म पर आने की वजह से बीजेपी को इस वोट बैंक में सेंध की शंका है। लिहाजा बीजेपी ओबीसी नेतृत्व को बढ़ावा देने की सोच रही है। बीजेपी के एक दूसरे नेता का कहना है कि 2019 में यूपी पर कब्जा बरकरार रखने के लिए पार्टी को बैकवर्ड वोटों की जरूरत होगी। इसलिए उन्हें साथ रखना जरूरी है।

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