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तब प्रधानमंत्री के पोते को ट्रेन से फेंक दिया था, जुनैद तो आखिर आम आदमी का बेटा था- लचर सुरक्षा की वजह से मौत का सबब बन जाती है ट्रेन यात्रा

वाजपेयी जी की बहन कमला मिश्रा के पोते मनीष मिश्रा अपने दो दोस्तों के साथ मथुरा से कोसी कलां लौट रहे थे, तभी ये घटना हुई

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। (Express archive photo)

बल्लभगढ़ में ईएमयू ट्रेन में जुनैद की हत्या पर देश में जोरदार बहस चल रही है। कभी इसे गौरक्षा से तो कभी बीफ से जोड़ कर देखा जा रहा है। लेकिन ये कोई पहला वाकया नहीं है, जब मामूली बहस को लेकर ट्रेन में किसी की हत्या कर दी गई हो। ट्रेन में खराब सुरक्षा व्यवस्था के चलते पहले भी ऐसी ही वारदातें हुई हैं। और इसमें कई बार वीवीआईपी भी इस हिंसा का शिकार बने हैं। हम आपको बता रहे हैं सन 2004 की कहानी। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पोते को ट्रेन से फेंक दिया गया था। इस घटना में वाजपेयी के पोते मनीष मिश्रा की मौत हो गई थी। बता दें कि वाजपेयी जी की बहन कमला मिश्रा के पोते मनीष मिश्रा अपने दो दोस्तों के साथ मथुरा से कोसी कलां लौट रहे थे। ये तीन लोग छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में सवार थे। ट्रेन में इन्होंने देखा कि शराब के नशे में कुछ लड़के लड़कियों से छेड़खानी कर रहे हैं। जब मनीष मिश्रा ने इसका विरोध किया तो उनकी बदमाशों से झड़प हो गई।

पुलिस के मुताबिक जब ट्रेन वृंदावन गेट स्टेशन पर रुकी तो लड़कियां वहां पर उतर गईं, लेकिन जब ट्रेन फिर से शुरू हुई तो बदमाशों ने मनीष और उसके दोस्तों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इन बदमाशों ने मनीष और उसके दोस्तों को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। वाजपेयी जी के पोते मनीष की इस घटना में मौत हो गई थी, जबकि बाकी दो गंभीर रुप से घायल हो गये थे। ये घटना 2004 में 26 जनवरी के आसपास हुई थी। इस घटना से तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी बेहद दुखी दिखे थे। उन्होंने उस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्वारा दिये जाने वाले कार्यक्रम एट होम में भी हिस्सा नहीं लिया था।

ये घटना दिखाती है कि हमारी ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी लचर थी। ऐसी ही एक घटना का शिकार हरियाणा का बल्लभगढ़ निवासी जुनैद हुआ। जिसे कुछ लोगों ने बीफ ले जाने के शक में ट्रेन में इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। जुनैद के परिवार वालों कहना है कि अगर ट्रेन में तैनात आरपीएफ वक्त पर वहां पहुंच जाती तो ये घटना रोकी जा सकती थी। यहीं नहीं जुनैद की मां का कहना है कि ट्रेन में सवार दूसरे यात्रियों ने भी इस घटना में दखल देने की नहीं सोची, अगर यात्रियों ने भी जुनैद और उसके भाइयों की मदद की होती तो उसकी जान बच सकती थी।

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