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Gyanvapi Case: मुस्लिम पक्ष ने कहा- धार्मिक जगह की स्थिति नहीं बदली जा सकती, जज बोले- मालिकाना हक नहीं, पूजा का अधिकार मांगा गया

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने वाराणसी कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट से आज ही आदेश पारित करने का अनुरोध भी किया।

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ज्ञानवापी मस्जिद (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस केस को वाराणसी जिला अदालत को ट्रांसफर करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिला अदालत में वरिष्ठ जज पूरे मामले की सुनवाई करेंगे। जस्टिस डीवआई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि इस दीवानी वाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सिविल जज वाराणसी को यह मामला ट्रांसफर होगा, जिसपर अनुभवी न्यायिक अधिकारी सुनवाई करेंगे।

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सुनवाई के बाद आदेश देते हुए तीन जजों की बेंच ने कहा कि 17 मई का अंतरिम आदेश फैसला आने तक और उसके 8 सप्ताह तक लागू रहेगा ताकि जिला जज के आदेश को पीड़ित पक्ष चुनौती दे सके। कोर्ट ने कहा, “तब तक हम जिला मजिस्ट्रेट वाराणसी से वादियों से परामर्श करने और वजू के लिए उचित व्यवस्था करने का अनुरोध करते हैं।”

इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि कोर्ट का अंतरिम आदेश वैकल्पिक नहीं है और सिविल जज सीनियर जज वाराणसी द्वारा 16 मई को पारित आदेश को 17 मई को इस आदेश में शामिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट कमिश्रर की नियुक्ति के मामले पर कहा कि यह हाई कोर्ट में चल रहा है और इस पर सुनवाई हो रही है।

इस मामले की सुनवाई के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का 17 मई का जो अंतरिम आदेश था, जो एरिया सील किया गया है, जहां शिवलिंग पाया गया है वो बरकरार रहेगा। वजू के लिए व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मामले की सुनवाई अब जिला जज वाराणसी करेंगे, अब तक सिविल जज सीनियर डिवीजन वाराणसी इसकी सुनवाई कर रहे थे।

कोर्ट ने की थी अहम टिप्पणी

इसके पहले, ज्ञानवापी मस्जिद मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को जिला अदालत को ट्रांसफर करने का संकेत दिया था। हालांकि, कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था वह जिला जज को निर्देश नहीं दे सकते हैं कि कैसे सुनवाई हो। कोर्ट ने कहा था कि अंतरिम आदेश लागू रहना सभी पक्षकारों के हित में होगा। वहीं, मुस्लिम पक्ष निचली अदालत के आदेश को रद्द करने की मांग कर रहा था। मुस्लिम पक्ष का तर्क था कि वाराणसी कोर्ट का आदेश अवैध है। मुस्लिम पक्ष का कहना था कई सालों की यथास्थिति को बदला जा रहा है। वहीं, हिंदू पक्ष ने कहा कि पहले रिपोर्ट देखने को कहा जाए।

मुस्लिम पक्ष के वकील हुजेफा अहमदी ने कहा कि रिपोर्ट लीक हुई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट कोर्ट के पास जानी चाहिए थी, मीडिया में लीक नहीं होनी चाहिए थी। अहमदी ने कहा कि अदालत प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट देखे। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक जगह की स्थिति नहीं बदली जा सकती लेकिन हिंदू पक्ष की अर्जी यही मांग कर रही है। इस पर जज ने कहा कि मालिकाना हक नहीं, पूजा का अधिकार मांगा गया है।

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