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सपा-बसपा की दोस्ती हो कंक्रीट, इसलिए अखिलेश यूपी में 90 जगहों पर एक साथ मनवाएंगे इस महापुरूष की जयंती, फिल्म भी दिखाएंगे

25 साल बाद सपा-बसपा में हुई दोस्ती से बीजेपी भी बेचैन है। हाल ही में गोरखपुर और फूलपुर संसदीय चुनावों में इस गठबंधन की वजह से बीजेपी को दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था।

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव।

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव बहुजन समाज पार्टी के साथ की गई दोस्ती को अटूट बनाना चाहते हैं। इसलिए बाबासाहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 127वीं जयंती पर 14 अप्रैल को पूरे उत्तर प्रदेश में 90 जगहों पर एकसाथ श्रद्धांजलि कार्यक्रम मनाने का फैसला किया है। सपा की सभी जिला इकाई और नगर अध्यक्षों को इस संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश भेजे जा चुके हैं। उस दिन बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर फूल-माला चढ़ाने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करने का कार्यक्रम है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लखनऊ के हैरतगंज में अंबेडकर प्रतिमा पर फूल-माला चढ़ाने के बाद पार्टी मुख्यालय में सभा को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव को भी निमंत्रण भेजा गया है। इस मौके पर डॉ. अंबेडकर के जीवन, दर्शन और सिद्धांतों से जुड़ी फिल्म का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसके अलावा उनके जीवन को रेखांकित करते हुए गीत भी सुनवाए जाएंगे।

सपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम के मुताबिक पार्टी के लोग राज्यभर में 90 जगहों पर, जिनमें जिला मुख्यालय और नगर मुख्यालय भी शामिल है, अंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाएंगे। इस अवसर पर सपा सभी लोगों को संविधान निर्माण में अंबेडकर की भूमिका और उनके द्वारा किए गए कार्यों के बारे में भी बताएंगे। एक सवाल के जवाब में नरेश उत्तम ने कहा कि यह कार्यक्रम इसलिए नहीं हो रहा है कि सपा-बसपा में दोस्ती हुई है। उन्होंने कहा, “सपा हमेशा से अंबेडकर, राममनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण और अन्य महापुरुषों का सम्मान करती रही है। मुलायम सिंह यादव की सरकार में भी ग्राम विकास योजनाओं का नाम डॉ. अंबेडकर के नाम पर रखा गया था।”

बता दें कि 25 साल बाद सपा-बसपा में हुई दोस्ती से बीजेपी भी बेचैन है। हाल ही में गोरखपुर और फूलपुर संसदीय चुनावों में इस गठबंधन की वजह से बीजेपी को दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इनमें से एक गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ रहा है जबकि फूलपुर से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की जीत पिछली बार हुई थी। उप चुनाव में इस दोस्ती की वजह से दलित वोट सपा के पक्ष में पड़े। इसी वजह से बीजेपी की हार हुई। इसलिए सपा-बसपा के नेता चाहते हैं कि उनकी दोस्ती 2019 के लोकसभा चुनाव तक कायम रहे, ताकि बीजेपी को उत्तर प्रदेश में मिलकर हरा सकें।

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