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सपा-बसपा की दोस्ती पर अखिलेश का खुलासा- पहले फोन पर हुआ दुआ-सलाम, फिर दिल्ली में लंच पर बात

अखिलेश यादव ने राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार पर भी तंज कसा और कहा कि राज्य के लोगों ने पीएम मोदी के नाम पर वोट दिया था, योगी के नाम पर नहीं। इसलिए पीएम को चाहिए था कि राज्य को एक अच्छा और सशक्त सीएम देते।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोरखपुर और फूलपुर संसदीय उप चुनावों में सपा और बसपा के बीच हुई दोस्ती को साल 2019 के आम चुनावों तक जारी रखने की बात कही है और कहा है कि दोनों पार्टियां गठबंधन के तहत ही लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। आजतक से खास बातचीत में अखिलेश ने बताया कि बुआ से पहले फोन पर बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। सपा अध्यक्ष ने कहा कि दुआ-सलाम से बात आगे बढ़ी तो दिल्ली में लंच के टेबल पर बैठकर 25 साल पुरानी दोस्ती को फिर से आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई। आजतक से उन्होंने कहा, “पहले बात बैक चैनल के जरिए शुरू हुई फिर मैंने मायावती जी को फोन किया। इसके बाद कांग्रेस के निमंत्रण पर दिल्ली में साथ बैठे और लंच किया। वहां बहुत सारी बातें हुईं।”

अखिलेश ने यह भी कहा कि इससे पहले दोनों ही पार्टियों के नेता, कैडर और वोटर इस गठबंधन के पक्ष में थे। बसपा और सपा के बीच 25 साल से जारी कड़वाहट पर अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी की स्थापना नेता जी मुलायम सिंह यादव ने की थी लेकिन अब पार्टी नए कलेवर में है। उन्होंने कहा कि गठबंधन की मजबूती के लिए हमें पिछला इतिहास भूलना होगा। बता दें कि लखनऊ में 2 जून 1995 को हुए गेस्ट हाउस कांड के बाद से दोनों ही पार्टियों के बीच रिश्ते कड़वे रहे। ये दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे के धुर-विरोधी थीं लेकिन 2014 के लोकसभा और 2017 के विधान सभा चुनाव में मिली हार के बाद दोनों ही दलों ने कड़वी यादों को भुलाना ही बेहतर समझा।

अखिलेश यादव ने राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार पर भी तंज कसा और कहा कि राज्य के लोगों ने पीएम मोदी के नाम पर वोट दिया था, योगी के नाम पर नहीं। इसलिए पीएम को चाहिए था कि राज्य को एक अच्छा और सशक्त सीएम देते। उन्होंने योगी राज को विफल करार देते हुए कहा कि राज्य में लोग न्याय की आस में भटक रहे हैं। अखिलेश ने कहा कि योगी अच्छे पुजारी हो सकते हैं लेकिन वो अच्छे सीएम नहीं हैं।

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