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Ram Mandir के नाम पर फर्जी साइट बना लोगों को लगा रहा था चूना! भंड़ाफोड़ पर ट्रस्ट ने की FIR

पुलिस ने मामले संज्ञान लेते हुए आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 463, 468 और 465 के तहत केस दर्ज कर लिया है।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए तैयार शिलाएं (फाइल फोटो)

श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर के नाम पर फर्जी साइट बना कर लोगों से चंदा लेने के आरोप में दिल्ली के एक शख्स के खिलाफ पुलिस केस किया है। 12 अप्रैल को श्री राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के मुताबिक शख्स ट्रस्ट के नाम पर लोगों से चंदा ले रहा है। आरोपी ने मंदिर के नाम पर जो वेबसाइट बनाई उसका नाम rammandirayodhya.in है। बताया जाता है कि आरोपी का नाम अविनाश (35) है जो राष्ट्रीय राजधानी का निवासी है। हालांकि उसने कहा कि वह हैरान हैं कि उसके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। उसने कहा, ‘मैंने राम मंदिर निर्माण के लिए दान की कोई मांग नहीं की है।’

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हालांकि पुलिस ने मामले संज्ञान लेते हुए उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 463, 468 और 465 के तहत केस दर्ज कर लिया है। ये जानकारी एसएचओ कृष्ण राणा ने दी है। पुलिस ने आरोपी अनिवाश के व्यक्तिगत विवरण जैसे डोमेन नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, पता और फोन नंबर और ईमेल आईडी की जानकारी भी जुटा ली है। वहीं पूछने पर कि उसने वेबसाइट क्यों शुरू की? अविनाश ने बताया कि मेरी समझ में नहीं आ रहा कि यह इतनी बड़ी समस्या क्यों बन गई। मैंने साल 2015 में वेबसाइट के लिए इस नाम का डोमेन लिया था। हाल ही में मैंने वेबसाइट को दान करने के लिए इसमें एक पेज जोड़ा है। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि कृपया वेबसाइट विकास के लिए दान दें। उसने कहा कि तथ्यों के साथ किसी वेबसाइट को खड़ा करने के लिए धन की जरुरत होती है।

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अविनाश ने कहा, ‘मेरी वेबसाइट पर लिखा है। दान अयोध्या के राम मंदिर के लिए नहीं है। हम आपके द्वारा दिए दान का इस्तेमाल वेबसाइट से जुड़ी जरुरतों को पूरा करने के लिए करते हैं। इतनी सारी स्पष्टता के बाद भी मैं समझ नहीं पा रहा कि मेरे खिलाफ शिकायत क्यों की गई है।’

अपने खिलाफ दर्ज हुई शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए अविनाश ने बताया कि 13 अप्रैल को जब टेक्स्ट मैसेज के जरिए मुझे इसकी जानकारी मिली तो मुझे लगा कि शायद गलती से ऐसा हो गया। फिर मुझे एक नंबर मिला और मैंने अयोध्या पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर को फोन किया। उन्होंने मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की।

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