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अखिलेश के खिलाफ शिवपाल का मास्टर स्ट्रोक: मुलायम को घोषित किया सेकुलर मोर्चा का कैंडिडेट

सपा में किसी भी तरह की आपसी सुलह से इंकार करते हुए शिवपाल ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम​ सिंह यादव को मोर्चे की तरफ से मैनपुरी सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। उनका कहना है कि अगर मुलायम तैयार हों तो वह उन्हें नई पार्टी का अध्यक्ष भी बना देंगे।

शिवपाल सिंह के साथ मुलायम सिंह यादव। फाइल फोटो

देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार समाजवादी कुनबे में एक बार फिर से टकराव की आहट आनी शुरू हो गई है। अपना अलग मोर्चा बनाने का ऐलान कर चुके समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के संयोजक शिवपाल यादव ने शनिवार (15 सितंबर) को नया ऐलान कर दिया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम​ सिंह यादव को मोर्चे की तरफ से मैनपुरी सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। सपा में किसी भी तरह की आपसी सुलह से इंकार करते हुए शिवपाल ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। उनका कहना है कि अगर मुलायम सिंह तैयार हों तो वह उन्हें मोर्चे और नई पार्टी का अध्यक्ष भी बना देंगे।

शिवपाल यादव ने शनिवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि अब बढ़े हुए कदम पीछे नहीं हटाए जा सकते हैं। जो भी काम करूंगा, डंके की चोट पर करूंगा। शिवपाल यहीं नहीं रुके। उन्होंने साफ कहा कि जल्दी ही नई पार्टी के नाम और झंडे के लिए चुनाव आयोग में आवेदन करूंगा। शिवपाल ने कहा कि मैं चाहता हूं कि सपा-बसपा के संभावित गठबंधन में उनके मोर्चे को भी शामिल किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो हम सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे। मैं खुद चार या पांच सीटों से चुनाव लड़ सकता हूं।

खुद की भाजपा से बढ़ती करीबियों पर भी शिवपाल ने सफाई दी। शिवपाल ने साफ कहा कि जो लोग ये कह रहे हैं कि मैं भाजपा के करीब जा रहा हूं तो क्यों लोग खुद मुझे गठबंधन में शामिल होने के लिए नहीं बुला रहे हैं। मेरी हर मुहिम नेता जी (मुलायम सिंह) के आशीर्वाद से ही चल रही है। मेरी उनसे लगातार बात हो रही है। आने वाले लोकसभा चुनावों में हम 20 से 30 सीटें जीतने जा रहे हैं। खुद को असली समाजवादी बताते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि लोकसभा के उपचुनावों में मेरे सहयोग के कारण ही सपा के उम्मीदवार जीत सके हैं। अब हम पूरे प्रदेश का दौरा करेंगे और जनता से आशीर्वाद मांगेंगे।

शिवपाल ​यादव ने यह भी कहा कि भाजपा की विचारधारा आरएसएस की विचारधारा है। समाजवादी विचारधारा से उसका मेल संभव नहीं है। मेरा मकसद समाजवादी विचारधारा के नेताओं की उपेक्षा का शिकार हुए जमीनी कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ना है। भाजपा से नजदीकी के आरोप बेमानी हैं। हम योगी आदित्यनाथ से मिलते जरूर हैं। लेकिन मेरी मुलाकात सिर्फ जनप्रतिनिधि होने के नाते ही होती है।

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