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‘अयोध्‍या में राम मंदिर बने, लखनऊ में मस्जिद’ शिया सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड का प्रस्‍ताव

रिजवी बोले- "यही एक उपाय है जिसके चलते देश में शांति और भाईचारा बना रहेगा"।

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी। (फाइल फोटो)

अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जहां राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद में मध्यस्थता कराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने एक प्रस्ताव रखा है कि राम मंदिर अयोध्या में बना दिया जाए लेकिन साथ ही लखनऊ में मस्जिद का निर्माण कराया जाए। एएनआई के अनुसार बोर्ड के चेयरमैन सयैद वसीम रिजवी ने कहा कि “अलग-अलग पार्टी से विचार-विमर्श करके हमने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव में अयोध्या में राम मंदिर और लखनऊ में मस्जिद बनवाने की बात कही गई है क्योंकि यही एक उपाय है जिसके चलते देश में शांति और भाईचारा बना रहेगा”। 31 अक्टूबर को रिजवी ने श्री श्री रविशंकर से बेंगलुरु में मुलाकात कर अयोध्या विवाद को सही ढंग से सुलझाने को लेकर बातचीत की थी।

श्री श्री से बात करने के बाद रिजवी ने कहा था कि “पूरा राष्ट्र आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक का सम्मान करता है, इसलिए शिया समुदाय का मानना है कि सालों से चले आ रहे इस विवाद को मैत्रीपूर्ण तरीके से सुलझा लिया जाए”। इसके साथ ही रिजवी ने कहा था कि “इस मामले में शिया समुदाय को बोलने का पूरा हक है क्योंकि 1944 से शिया बाबरी मस्जिद में नमाज के लिए जा रहे हैं। शिया प्रशासन द्वारा चलाए जा रही इस मस्जिद को सुन्नी समुदाय ने अपने नाम पर रजिस्टर करा लिया था लेकिन बाद में इस अवैध करार दे दिया गया था”।

वहीं शिया पर्सनल लॉ बोर्ड बाबरी मस्जिद को उसकी जगह से हटाने के पक्ष में नहीं है। रविवार को बोर्ड के संस्थापक मौलाना सैय्यद अली हुसैन रिजवी कुम्मी ने आईपीएन को भेजे अपने बयान में कहा, “शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ढोंग कर रहे हैं। रिजवी पूरी शिया कौम को बदनाम कर रहे हैं। वे खुदको कानूनी गिरफ्त से बचाने के लिए आरएसएस की भाषा बोल रहे हैं”। रिजवी पर निशाना साधते हुए मौलाना ने कहा कि “यह वसीम रिजवी का ढोंग ही है कि वे अयोध्या जाकर मंदिरों में फूल चढ़ा रहे हैं। तमाम साधु-संतों से मिलकर बातचीत का रास्ता निकालने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। वसीम शिया कौम के ठेकेदार नहीं हैं”। उन्होंने कहा “अयोध्या में राम मंदिर बने, इस पर किसी भी मुसलमान को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बाबरी मस्जिद की जगह पर कब्जा करके उस पर मंदिर बनाया जाए, यह कोई भी मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेगा”।

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