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बंगला बचाने एकसाथ सुप्रीम कोर्ट दौड़े मुलायम-अखिलेश, बोले- और वक्त चाहिए हुजूर!

बंगला बचाने के लिए इससे पहले मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल चुके हैं और उन्हें बंगला बचाने का फार्मूला सुझा चुके हैं लेकिन सीएम दफ्तर से वह फार्मूला लीक हो गया था।

योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलते मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव ने अपना सरकारी बंगला बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों पिता-पुत्र ने अपनी अर्जी में बंगला खाली करने के लिए और अधिक वक्त देने की मांग की है। इनकी तरफ से एडवोकेट गरिमा बजाज ने सोमवार ( 28 मई) को कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में 7 मई के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें कोर्ट ने राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला छोड़ने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य की संपदा विभाग ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को इस महीने के अंत तक बंगला खाली करने का नोटिस दिया है। मुलायम सिंह पिछले 27 सालों से 5 विक्रमादित्य मार्ग में रहते आ रहे हैं। इसलिए इस बंगले से उनका भावनात्मक लगाव है। इसके बगल में 4 विक्रमादित्य मार्ग स्थित बंगला अखिलेश यादव के नाम आवंटित है।

बंगला बचाने के लिए इससे पहले मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल चुके हैं और उन्हें बंगला बचाने का फार्मूला सुझा चुके हैं लेकिन सीएम दफ्तर से वह फार्मूला लीक हो गया था। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी पत्र लिखकर राज्य सरकार से और अधिक वक्त देने की मांग की थी। उधर, पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपने सरकारी बंगले 13 ए मॉल एवेन्यू को बचाने की पुरजोर कोशिश की है। उन्होंने बंगले पर श्रीकांशी राम विमाश्राम स्थल का बोर्ड लगवा दिया है। बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने भी सीएम योगी से इस बाबत मुलाकात की थी और कहा था कि यह बंगला कांशीराम विश्राम स्थल के नाम पर आवंटित है, इसलिए इसे किसी दूसरे को आवंटित न किया जाय।

बता दें कि शीर्ष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले आवंटित करने के लिये संबंधित कानून में किए गए संशोधन को निरस्त कर दिया था। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले खाली करने हैं। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपने आवेदन में सरकारी बंगले खाली करने के लिये उचित समय देने का अनुरोध किया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सरकारी आवास अपने पास नहीं रख सकते। न्यायालय ने कहा था कि पद से हटने के बाद मुख्यमंत्री भी आम जनता के समान ही होता है। कोर्ट ने लोक प्रहरी नाम के एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री सरकारी बंगले जैसी सार्वजनिक संपत्ति पर काबिज नहीं रह सकते हैं क्योंकि यह देश की जनता की संपत्ति है।

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