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रामगोपाल यादव की बर्थडे पार्टी में नहीं पहुंचे मुलायम सिंह यादव, बेटे अखिलेश यादव ने कहा- नेताजी हैं नाराज

अखिलेश ने कहा कि आगरा एक्सप्रेस हाईवे सपा सरकार ने रिकार्ड समय 22 माह में पूरा कर दिया, क्या कोई सरकार ऐसा हाईवे इतने कम समय में बना सकती है।
सपा प्रवक्ता सुनील सिंह के मुताबिक मुलायम सिंह ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। अखिलेश की मुलायम से मुलाकात कई महीनों बाद हुई है। (एक्सप्रेस फोटो- विशाल श्रीवास्तव)

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज माना कि पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव उनसे नाराज हैं। इसलिये वह आज पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव के 71 वें जन्म दिन के अवसर पर यहां नहीं आये। अखिलेश ने आज इटावा में कहा कि नेता जी (मुलायम सिंह यादव) चाचा रामगोपाल से नाराज नहीं हैं बल्कि वह मुझसे नाराज हैं, इसलिये वह आज यहां जन्म दिन के कार्यक्रम में नहीं आये।

रामगोपाल यादव के जन्म दिन पर आज आयोजित कार्यक्रम में मुलायम और सपा के विधायक शिवपाल यादव दोनों नहीं आये थे। रामगोपाल की प्रशंसा करते हुये सपा अध्यक्ष ने कहा कि चाचा ने सपा को आगे ले जाने के लिये काफी काम किया। उन्होंने पार्टी और उसके चुनाव चिन्ह दोनों को बचाया। चाचा रामगोपाल के नेतृत्व में सपा सरकार ने विकास की बड़ी योजनाओं को पूरा किया।

अखिलेश ने कहा कि आगरा एक्सप्रेस हाईवे सपा सरकार ने रिकार्ड समय 22 माह में पूरा कर दिया, क्या कोई सरकार ऐसा हाईवे इतने कम समय में बना सकती है। रामगोपाल के 71वें जन्म दिन पर सैफई महोत्सव पंडाल में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ सपा नेता नरेश अग्रवाल, अहमद हसन, बलराम यादव के साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया भी मौजूद थे। इस अवसर पर नरेश अग्रवाल ने कहा कि सपा एक जुलाई से लागू किये जाने वाले माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का विरोध करेगी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव से पहले से ही समाजवादी कुनबे में कलह चल रही है। इस साल जनवरी के पहले हफ्ते में अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव ने पार्टी का ने राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया था जिसमें मुलायम सिंह को पार्टी का अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था और उन्हें संरक्षक बना दिया गया था, जबकि अखिलेश यादव को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाया गया था। इसी अधिवेशन में प्रदेश अध्यक्ष के पद से शिवपाल सिंह यादव को हटा दिया गया था। इसके साथ सी राज्यसभा सांसद अमर सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। पार्टी के दोनों धड़ों की लड़ाई चुनाव आयोग भी पहुंची थी लेकिन वहां जीत अखिलेश यादव धड़े की हुई थी।

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