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स्वच्छ भारत मिशन: सफाई में सैफई का कोई सानी नहीं

मुलायम सिंह यादव के गृहनगर सैफई में इस मेडिकल यूनिवर्सिटी में वैसे तो मरीजों की सेवा की हर ओर चर्चा होती है लेकिन स्वच्छता के मामले मे भी इसका कोई सानी नहीं है।

Author इटावा | June 14, 2017 4:40 AM
तस्वीर के साथ मोदी ने लिखा है ‘‘महात्मा गांधी को सफाई बहुत पसंद थी। स्वच्छ भारत एवं पूज्य बापू के सपने को पूरा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराते हैं। स्वच्छ भारत हमारी विकास यात्रा को बढ़ावा देगा और इससे गरीबों को लाभ होगा।’’(फोटो-ट्विटर)

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन की सबसे सच्ची और बेहतर तस्वीर अगर कोई पेश करता हुआ दिखाई देता है तो वह है उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी। मुलायम सिंह यादव के गृहनगर सैफई में इस मेडिकल यूनिवर्सिटी में वैसे तो मरीजों की सेवा की हर ओर चर्चा होती है लेकिन स्वच्छता के मामले मे भी इसका कोई सानी नहीं है। कई विशेषज्ञ जानकार तो यहां तक दावा करते हैं कि देश की राजधानी दिल्ली मे स्थापित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में भी इतनी सफाई नहीं रहती है जितनी की सफाई सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में रहती है। यहां के वाइस चांसलर ब्रिगेडियर डॉ टी प्रभाकर मेडिकल परिसर में हर सफाईकर्मी से यही कहते हैं कि अगर सफाई नहीं रहेगी तो मरीजों को परेशानी होगी। हालांकिउनकी पहली और बडी वरीयता मरीज ही है फिर भी सफाई का सरोकार सेहत से है तो उसका ध्यान भी रखते हैं। साल 2005 मे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गांव सैफई मे स्थापित इस मेडिकल यूनिवर्सिटी के बारे मे कहा जाता है कि देश के किसी भी हिस्से में स्थापित अन्य मेडिकल कॉलेजों की तुलना मे यह पहला और एकमात्र संस्थान है, जो किसी ग्रामीण इलाके में खुला हुआ है।

समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव 1996 में जब रक्षा मंत्री थे तब उन्होंने सपना देखा था कि उनके गांव में देश-दुनिया का ऐसा अस्पताल बने जिसकी कोई दूसरी मिसाल न हो। यह सपना 2005 में तब पूरा हुआ जब केंद्र सरकार ने यूपी रूरल इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज रिसर्च को अपनी मंजूरी दे दी। मुलायम के सपने को पूरा करने में जिस शख्स ने सबसे अहम भूमिका निभाई वे हैं- डा. ब्रिगेडियर टी. प्रभाकर, जो कि सैफई अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के निदेशक होते हुए आज वाइस चांसलर के ओहदे पर हंै क्योंकि मेडिकल कॉलेज आज यूनिवर्सिटी बन चुका है। मुलायम जब रक्षा मंत्री थे तब डॉ. प्रभाकर उनके संपर्क में आए थे। दरअसल, सेना ने सैफई में आंखों की जांच के लिए एक कैंप लगाया था। उसके कर्ता-धर्ता डॉ. ब्रिगेडियर प्रभाकर थे। कैंप खत्म होने के बाद मुलायम ने डॉ. प्रभाकर से कहा था कि मैं चाहता हूं कि सैफई में एक बड़ा अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बने। तब डॉ. प्रभाकर ने उनसे कहा था कि सैफई में अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाने का आपका सपना जरूर पूरा होगा। यहां मूलभूत सुविधाएं न होने से कोई डॉक्टर या अन्य स्टाफ आना नहीं चाहता था। रिक्रूटमेंट होने के बाद कई डॉक्टर जब सैफई पहुंचे तो वह बगैर ज्वाइन किए चले गए । ऐसे में डॉ. प्रभाकर के पास मेडिकल कॉलेज को चलाना बहुत बड़ी चुनौती थी, लेकिन न तो वे निराश हुए और न हार मानी।

 

 

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