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अब नहीं तो कब? योगी आदित्‍यनाथ के सीएम बनने पर क्‍या सोचते हैं अयोध्‍यावासी, पढ़ें

अयोध्या का माहौल राम मंदिर बन जाने को लेकर उम्मीदों से भरा है।

सरकार में आए योगी अभी और बातों में मशगूल है। अयोध्या के राम लला मंदिर पर मौन हैं।

योगी आदित्‍य नाथ के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद अयोध्‍या में लोगों की उम्‍मीदें बढ़ गई हैं। उन्‍हें लगता है क‍ि अब राम जन्‍मभूमि मंदिर बन ही जाएगा। इसके ल‍िए अभी से ज्‍यादा अनुकूल समय आ नहीं सकता। केंद्र में मोदी, यूपी में योगी। वैसे योगी ने साफ संकेत दे द‍िया है क‍ि अयोध्‍या मसले का हल आपसी सहमति या कोर्ट के न‍िर्णय से ही होगा। जिस रोज योगी का नाम मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए तय हुआ, इत्तफाक से मैं अयोध्या और लखनऊ के दौरे पर था। भाजपा का कमल पूर्ण बहुमत के साथ खिलते ही अयोधया के बाशिंदों ख़ासकर हिंदू विचार धारा के लोगों की तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। दरअसल इन्हें अब रामलला का मंदिर बनता दिखने लगा है। बस ख़ुशी इसी बात को लेकर है।

आँखों के चैरिटेबल अस्पताल अयोध्या आई हॉस्पिटल की चहारदीवारी से सटी एक चाय की गुमटी है और बगल में गुमटीनुमा सैलून है। वहां दाढ़ी बनबाने के दौरान सैलून मालिक रामशरण शर्मा से बातचीत हुई। वे पूरी ठसक के साथ कहते है अब तो राम मंदिर बन जाएगा। इसीलिए तो कमल को वोट दिया है। उनसे पूछा गया कि अयोध्या से कौन जीता। उन्हें इतना ही पता है भाजपा जीती है। बड़ी मुश्किल से वे सिर्फ यह बता पाए कि कोई गुप्तजी जीते हैं। असल में वेदप्रकाश गुप्ता भाजपा विधायक है और लालू सिंह फैजाबाद से सांसद है।

वहां की राम पौढ़ी की सफाई का काम तो चल रहा है। यह पहले से ही हो रहा है। लगा नमामि गंगे का धन खर्च हो रहा है। सरयू नदी का पानी इस ‘स्वर्ग का रास्‍ता’ कहे जाने वाले राम पौढ़ी होकर ही गुजर कर वापस सरयू में मिल जाता है। जेसीबी मशीन से जमा कीचड़ निकालने का काम जोर-शोर से जारी है।

सरयू तट पर स्थित गुप्‍तार घाट। (फोटो: गिरधारी लाल जोशी )

हमने महंतों से बात करने के बजाय आम लोगों की नब्ज टटोलने की कोशिश की। ताकि जान सके कि भाजपा की सरकार से ये क्या उम्मीद रखते हैं। जहां से भगवान राम अपने पूरे परिवार के साथ बैकुंठ रवाना हुए, उस जगह गुप्तार घाट पर जाने पर सुनील पांडे से मुलाकात हुई। उन्होंने एक किस्सा सुनाया। इशारा कर बताते है यहीं पुष्पक विमान आया था। प्रजा समेत श्रीराम बैठ गए। जैसे-जैसे संख्या बढ़ती वैसे-वैसे विमान में बैठने की जगह भी बढ़ जाती। मगर हनुमान बैठने लगे तो विमान छोटा हो गया। तब हनुमान को अयोध्या का राजपाट सौप श्रीराम ने कहा कलयुग में आप ही रक्षा करिए। तब से हनुमान अजर अमर है। और सबसे ऊंची हनुमान गढ़ी पर विराजमान है। अयोध्या के तमाम मंदिरों के पट खुलने और बंद होने का समय है। मग़र हनुमान गढ़ी 24 घंटे खुला है। और वे आज भी सब की रखवाली करते है। यह इनका अटूट विश्वास है।

सुनील पांडे एक श्लोक सुनाते हैं, ” कल्पकोट काशी बसै मथुरा बसै हजार, एक निमित्त सरयू बसै तुले न तुलसी दास।” कहते है सब तीर्थों का मस्तक है अयोध्या और अयोध्या का मस्तक है गुप्तार घाट। वही एक जर्जर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में एक मंदिर है। उसके उद्धार की बात कोई नहीं करता। पर राम मंदिर अब बन जाने की पूरी उम्मीद सुनील पांडे सरीखे पाले है। कहते है केंद्र में मोदी और यूपी में योगी अब क्या चाहिए। अब नहीं तो कभी नहीं।

पारिजात के इस पेड़ के बारे में मान्‍यता है कि भगवान राम ने अपने हाथों से यह पेड़ लगाया था। (Photo: Jansatta) पारिजात के इस पेड़ के बारे में मान्‍यता है कि भगवान राम ने अपने हाथों से यह पेड़ लगाया था। (Photo: Jansatta)

अयोध्या का माहौल राम मंदिर बन जाने को लेकर उम्मीदों से भरा है। चाहे आप अयोध्या आई अस्पताल के कर्ताधर्ता पवन साह से बात कर ले या ड्राइवर मनोज से। या बाराबंकी के गाँव वदोसराय जहां पारिजात का पेड़ का दर्शन करने या नेमिषारण्य धाम जाकर तीर्थचक्र में स्नान करने के दौरान साकेत लाल से बातचीत करने पर सभी की एक ही उम्मीद राम मंदिर बनेगा। अयोध्या के कथावाचक राम नयन महाराज भी इसी उम्मीद से लबरेज है। ये वहां के दिगम्बर जैन मंदिर के बगलवाली गली में रहते है।

अयोध्‍या स्थित हनुमान गढ़ी। (फोटो: गिरधारी लाल जोशी)

दिलचस्प बात कि सरकार में आए योगी अभी और बातों में मशगूल है। अयोध्या के राम लला मंदिर पर मौन है। वैसे अभी योगी को वक्त है।

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