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यूपी इलेक्शन के रिजल्ट के साथ ही राकेश टिकैत हार गए थे बाजी, जानें BKU के RRR की इनसाइड स्टोरी

गठवाला खाप के चौधरी राजेन्द्र सिंह मालिक की योगी सरकार से नजदीकी जगजाहिर है। गृहमंत्री अमित शाह की जाट खापो के साथ बैठक में भी राजेन्द्र मालिक शामिल हुए थे।

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राकेश टिकैत (फोटो- twitter/@RakeshTikaitBKU)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने पर मजबूर करने वाले भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का संगठन अब बिखर चुका है। राकेश टिकैत को भारतीय किसान यूनियन से निकाल दिया गया है और संगठन के अध्यक्ष नरेश टिकैत को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। राकेश टिकैत वाले गुट से कई नेता अलग हो गए हैं और उन्होंने भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) नाम का संगठन बना लिया है। जानें बीकेयू के RRR की इनसाइड स्टोरी-

R नंबर 1- राकेश टिकैत: राकेश टिकैत किसान आन्दोलन का प्रमुख चेहरा रहे थे और लगातार कृषि बिल के खिलाफ केंद्र सरकार को घेर रहे थे। राकेश टिकैत पर राजनीति करने का आरोप लगाया गया है और मुद्दों से भटकने का आरोप लगाया गया है। वहीं राकेश टिकैत ने बीकेयू में टूट पर कहा कि बीकेयू में टूट सरकार के इशारे पर हुई है और राजेश चौहान के बंगले का कुछ चक्कर है जिसके कारण वो दबाव में आ गए हैं। राकेश टिकैत ने 2 दिनों तक नाराज लोगों को मनाया लेकिन वे नहीं माने।

R नंबर 2- राजेश सिंह चौहान: राजेश चौहान बीकेयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे और इन्होने ही बीकेयू (अराजनैतिक) का गठन किया है। राजेश चौहान ने राकेश टिकैत पर आरोप लगाते हुए कहा, “राकेश टिकैत आन्दोलन के बाद राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव में एक विशेष पार्टी के समर्थन में और एक विशेष पार्टी के खिलाफ घूम कर प्रचार किया और ये महात्मा टिकैत के सिद्धांतों के खिलाफ है। 33 साल तक हमने संगठन की सेवा की लेकिन कार्यकारिणी में केवल परिवार के लोगों का नाम डाला गया। इसमें हम कागजों पर कहीं हैं ही नहीं।”

R नंबर 3- राजेन्द्र सिंह मालिक: गठवाला खाप के चौधरी राजेन्द्र सिंह मालिक की अध्यक्षता के अंतर्गत भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) का गठन किया गया। राजेन्द्र सिंह मालिक बीकेयू अराजनैतिक के संरक्षक बनाये गए हैं। राजेन्द्र मालिक की योगी सरकार से नजदीकी जगजाहिर है। जब राकेश टिकैत ने मुजफ्फरनगर में रैली किया था, उस दौरान भी राजेन्द्र मालिक सरकार के पक्ष में खड़े थे और तत्कालीन विधायक उमेश मालिक का समर्थन किया था। जब गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव के पहले जाट खापो के साथ बैठक की थी, उस बैठक में भी राजेन्द्र मालिक शामिल हुए थे।

चुनाव बाद ही लिखी जा चुकी थी टूट की कहानी: भारतीय किसान यूनियन में टूट की कहानी यूपी चुनाव के नतीजों के बाद ही लिखी जा चुकी थी। किसान यूनियन के प्रवक्ता धर्मेन्द्र मालिक और गठवाला खाप के चौधरी राजेन्द्र मालिक की योगी सरकार से नजदीकी और टिकैत बंधुओं की बीजेपी सरकार से खिलाफत ही संगठन में दो फाड़ का आधार बन चुकी थी। माना जा रहा था कि अगर नतीजे बीजेपी के पक्ष में गए तो बीकेयू में टूट हो सकती है और यही हुआ।

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