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वाहन प्रशिक्षण स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी

वाहन चलाने के प्रशिक्षण की प्रक्रिया को महज दिखावा या ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की पहल से इतर वास्तविक उपयोगी और पारदर्शी बनाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण केंद्रों के पाठ्यक्रम में बदलाव किए जाने की तैयारी है।

स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारी

सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने के लिए मोटर ट्रेनिंग स्कूल (वाहन प्रशिक्षण विद्यालय) के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। वाहन प्रशिक्षण स्कूल को संसाधन युक्त बनाया जाएगा। साथ ही प्रशिक्षण लेने वालों को प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया में भी जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। हादसों की रफ्तार घटाने और सड़क हादसों में कमी लाने की केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की अभी तक हुई कवायद कारगर साबित नहीं हुई है। इसकी बड़ी वजह देश के तमाम हिस्सों में बनाए जा रहे एक्सप्रेस वे पर 150-200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाने वालों द्वारा नियमों की अनदेखी को माना जा रहा है। उन्हें न तो एकाएक ब्रेक लगाने की सावधानी के बारे में जानकारी होती है और न ही लेन परिवर्तित (साइड लेते) करते समय डिपर के इस्तेमाल की परवाह होती है। वाहन चालकों की ऐसी छोटी चूक भयानक हादसों की वजह बनते हैं।

वाहन चलाने के प्रशिक्षण की प्रक्रिया को महज दिखावा या ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की पहल से इतर वास्तविक उपयोगी और पारदर्शी बनाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण केंद्रों के पाठ्यक्रम में बदलाव किए जाने की तैयारी है। मौजूदा नियमों में वाहन प्रशिक्षण स्कूल शुरू करने के लिए एआरटीओ कार्यालय से पंजीकरण कराने का नियम है। प्रशिक्षण देने वाले तकनीकी सदस्य, वाहन और प्रशिक्षण स्थल (लर्निंग लोकेशन) की जानकारी देनी होती है। परिवहन विभाग के अधिकारियों को प्रशिक्षण स्थल का भौतिक सत्यापन करने और यह पुष्टि करनी होती है कि वाहन सिखाने योग्य स्थल पर्याप्त है या नहीं? इतना सब होने के बाद कागजी कार्रवाई पूरी कर प्रशिक्षण के उपरांत लाइसेंस जारी किया जाता है।

वाहन चलाने का प्रशिक्षण देने वाले चालक का कम से कम पांच साल का अनुभव होना अनिवार्य है। प्रशिक्षण के अलावा सड़क पर स्पीड ब्रेकर, जेब्रा लाइन, मुड़ते समय इंडिकेटर, डिपर, धुंध में सावधानी आदि नियमों का मौखिक और लिखित ज्ञान भी दिया जाता है। जानकारों के मुताबिक, इन तमाम शर्तों को पूरा नहीं करने वाले बड़ी संख्या में मोटर वाहन प्रशिक्षण स्कूल बगैर पंजीकरण कराए फर्जी तरीके से चल रहे हैं।

नोएडा के एआरटीओ एके पांडे के मुताबिक, सड़क एवं परिवहन मंत्रालय से विस्तृत दिशा निर्देश मिलते ही क्रियान्वयन शुरू करा दिया जाएगा। नए नियमों के तहत वाहन प्रशिक्षण विद्यालय के संचालन के लिए मैकेनिक का डिप्लोमा होना जरूरी है। जिस वाहन से प्रशिक्षण दिया जाएगा, उसका टैक्सी परमिट होना जरूरी है। वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र, स्टेयरिंग के दोनों तरफ ब्रेक होने जरूरी हैं।

मोटर इंजीनियरिंग कर चुके प्रशिक्षक के पास परिवहन विभाग का पंजीकरण और पांच साल व्यावसायिक वाहन चलाने के अनुभव समेत अपना एक वाहन होना चाहिए। प्रशिक्षण के लिए आवश्यक नमूने, संकेत, यातायात चिह्न, वाहन के सभी पुर्जों के ब्यौरे वाले चार्ट होने चाहिए। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शहरों में कार प्रतिष्ठा से जुड़ी मानी जाती है। लिहाजा कारों की संख्या के साथ चलाने का प्रशिक्षण देने वालों की मांग बढ़ रही है। इस वजह से 10-12 दिनों में वाहन चलाने का प्रशिक्षण देने वाले फर्जी वाहन प्रशिक्षण स्कूलों की बाढ़ आ गई है।

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