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सहारनपुर में कई कयासों के बीच आज पड़ेंगे वोट

नगर निगम सहारनपुर के पहली बार हो रहे चुनाव के लिए बुधवार को मतदान होगा। मुख्य मुकाबला भाजपा के संजीव वालिया, बसपा के फजलुर्रहमान कुरैशी, काग्रेंस के शशि वालिया और सपा के चौधरी साजिद के बीच है।

Author सहारनपुर | Published on: November 29, 2017 1:34 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

नगर निगम सहारनपुर के पहली बार हो रहे चुनाव के लिए बुधवार को मतदान होगा। मुख्य मुकाबला भाजपा के संजीव वालिया, बसपा के फजलुर्रहमान कुरैशी, काग्रेंस के शशि वालिया और सपा के चौधरी साजिद के बीच है। कुल मतदाता 5 लाख 34 हजार हैं और नगर में 70 वार्ड हैं। इस चुनाव की अहम बात यह रही कि पूरे चुनाव प्रचार अभियान के दौरान विपक्षी दल न तो भाजपा को घेर पाए और न ही उसके मजबूत माने जाने वाले मतदाता व्यापारी वर्ग की नोटबंदी और जीएसटी पर बनी नाराजगी को भुनाने की कोशिश कर सके। विपक्षी दलों में आक्रामकता का भी अभाव रहा। भाजपा में वार्डों के उम्मीदवारों के चयन को लेकर उपजी नाराजगी का भी लाभ विपक्षी दल लेते नहीं दिखे। नगर के प्रमुख वकील और राजनैतिक टिप्पणीकार हेमंत मित्तल कहते हैं कि भाजपा से नाराज लोगों ने विपक्षी दलों का रुख नहीं किया। उन्हें पार्टी के जिम्मेदार लोगों ने मना लिया या वे घर बैठ गए। कुछ ही ने वार्डों में बतौर निर्दलीय ताल ठोकी। जबकि सपा, बसपा और काग्रेंस के बड़ी संख्या में नाराज लोग भाजपा में शामिल हुए।

सियासी जानकार सुरेंद्र सचदेवा कहते हैं कि चुनाव प्रचार में भाजपा अपने विरोधियों पर लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह आक्रामक रही जिसका उसे लाभ मिल सकता है। महाराज सिंह डिग्री कालेज पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर योगेश गुप्ता बसपा की रणनीति के बारे में कहते हैं कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बुरी तरह पिटने के बाद नगर निकाय चुनाव में वह भाजपा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरने की कोशिश में लगी है। सपा का नगरों में अपना कोई स्थायी वोट बैंक नहीं है जबकि दलितों का जुड़ाव बसपा के साथ बना हुआ है। उसी को ध्यान में रखते हुए संभवतया मायावती ने नगर निगम सहारनपुर और देवबंद नगरपालिका के अध्यक्ष पद के चुनाव में मुसलिम उम्मीदवारों का उतारा है, इससे वह भाजपा के दांत खट्टे करती दिख रही है और अगर मतदान प्रतिशत गिरता है तो बसपा बाजी भी मार सकती है।

सहारनपुर के वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार संजीव गुप्ता कहते हैं कि भाजपा के स्टार प्रचारकों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , उप मुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य और सहारनपुर के प्रभारी मंत्री कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और भाजपा चुनाव प्रभारी विजय पाल सिंह तोमर की कोशिशें मतदान प्रतिशत बढ़ाने की रही। उन्होंने अपनी सभाओं में मतदाताओं से यही अपील की कि वे लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तर्ज पर भारी मतदान कर नगरीय निकायों में भी बदलाव लाए और भाजपा को बैठाए। तभी उन्हें विकास का पूरा लाभ मिल पाएगा।

सपा के नगर विधायक संजय गर्ग नगरीय चुनाव में मुख्यमंत्री के प्रचार अभियान में उतरने को सही नहीं ठहराते हैं। उन्होनें कहा कि भाजपा ने स्थानीय स्तर के चुनावों में भी अपने प्रभाव का अनुचित इस्तेमाल और सत्ता का दुरुपयोग किया। काग्रेंस के वरिष्ठ नेता महेंद्र तनेजा का कहना है कि कांग्रेस पार्टी अपने परपंरागत वोट बैंक की वापसी के लिए इन चुनावों में अपनी पूरी ताकत के साथ उतरी। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारूल उलूम वक्फ के जाने-माने आलिम मौलाना अब्दुल्ला जावेद कहते हैं कि भाजपा की सफलता के पीछे उनके विरोधी दलों की गलत रणनीति का होना है।  उनका कहना है कि मुसलमानों को किसी एक पार्टी के पक्ष में लामबंद होने के बजाय मुद्दों पर मतदान करना चाहिए, तभी भाजपा को हराया जा सकता है। धु्रवीकरण की सियासत में भाजपा को मात देना करीब-करीब असंभव है।

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