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पीएम मोदी के सभा-स्‍थल पर पथराव में कॉन्‍स्‍टेबल की मौत, बेटा बोला- पुलिस से क्‍या उम्‍मीद रखें, मुआवजा लेकर क्‍या करेंगे?

सिपाही की मौत के बाद गाजीपुर के सीओ सिटी एमपी पाठक ने बताया कि 32 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 60 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक जाम खुलवाने में थाना करीमुद्दीन पुर के सिपाही सुरेश वत्स भी लगे हुए थे। इस दौरान एक पत्थर उनके सिर में जा लगा और वो बुरी तरह घायल हो गए। गंभीर हालत में उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, हालांकि उन्हें बचाया नहीं जा सका। (ANI PHOTO)

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से लौट रहे वाहनों पर शनिवार (29 दिसंबर, 2018) को एक स्थानीय पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पथराव कर दिया। पथराव में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई। घटना की निंदा करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के कार्यालय ने मृतक सिपाही के परिजनों को पचास लाख रुपए की आर्थिक सहायता और परिवार में एक सदस्य को नौकरी और असाधारण पेंशन दिए जाने के निर्देश दिए। पत्थरबाजी में सिपाही की मौत के बाद न्यूज एजेंसी एएनआई ने उनके बेटे से बात की है। मृतक सिपाही के बेटे वीपी सिंह ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, ‘पुलिस अपनी सुरक्षा भी नहीं कर पा रही है। हम उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं? अब हम मुआवजे का क्या करेंगे? इससे पहले बुलंदशहर और प्रतापगढ़ में इसी तरह की घटनाएं हुईं।’

जानना चाहिए कि सिपाही की मौत के बाद गाजीपुर के सीओ सिटी एमपी पाठक ने बताया कि 32 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 60 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इसके अलावा गाजीपुर के सीनियर पुलिस अधिकारी यशवीर सिंह ने कहा कि पीएम मोदी के कार्यक्रम के विरोध में राष्ट्रीय निषाद पार्टी के कार्यकर्ता जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे थे, इन्हें पुलिस प्रशासन ने रोका था। कार्यक्रम के पीएम चले गए तब पार्टी कार्यकर्ताओं ने शहर में कई जगह जाम लगा दिया, रैली से लौट रहे वाहनों पर पथराव किया गया।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक जाम खुलवाने में थाना करीमुद्दीन पुर के सिपाही सुरेश वत्स भी लगे हुए थे। इस दौरान एक पत्थर उनके सिर में जा लगा और वो बुरी तरह घायल हो गए। गंभीर हालत में उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, हालांकि उन्हें बचाया नहीं जा सका।

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