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बनारस की पीएम नरेंद्र मोदी से गुहार: गंगा को बचाइए, जब से सफाई अभियान चला तबसे हुई और मैली

वाराणसी में गंगा अपने घाटों से दूर जा चुकी है। नदी के बीच सिर्फ रेत हैं। यहां तक कि गंगा में रिकॉर्ड लेवेल पर जल स्तर में कमी आई है। हालात ऐसे बन पड़े हैं कि जिला प्रशासन को चिट्ठी लिखकर गंगा में पानी छोड़ने की गुहार लगानी पड़ी है।

काशी के लोग भी गंगा के इस हाल पर खफा हैं। उनमें इस बात को लेकर रोष है कि स्थानीय सांसद होने के बावजूद पीएम नरेंद्र मोदी गंगा उद्धार की दिशा में विशेष रुचि नहीं ले रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी संसदीय सीट से सांसद हैं। 2014 में उन्होंने दो जगहों से लोकसभा चुनाव जीता लेकिन वाराणसी संसदीय सीट नहीं छोड़ी। उन्होंने चुनावी सभाओं में अक्सर कहा कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने गंगा के लिए अलग मंत्रालय का भी गठन किया ताकि दम तोड़ती गंगा को पुनर्जीवित किया जा सके लेकिन चार साल बाद भी गंगा न केवल कराह रही है बल्कि काशी में तो गंगा पहले से भी ज्यादा प्रदूषित हुई है। गंगा को साफ करने के लिए चलाए जा रहे नमामि गंगे परियोजना फिसड्डी साबित हुई है। गंगा और घाटों के बीच की दूरी कहीं 40-50 मीटर तो कहीं किलोमीटर तक बढ़ गई है और गंगा सदानीरा से बहते नाले के रूप में बदल चुकी है। काशी को क्योटो बनाने का सपना अब दम तोड़ रहा है।

वाराणसी में गंगा अपने घाटों से दूर जा चुकी है। नदी के बीच सिर्फ रेत हैं। यहां तक कि गंगा में रिकॉर्ड लेवेल पर जल स्तर में कमी आई है। हालात ऐसे बन पड़े हैं कि जिला प्रशासन को चिट्ठी लिखकर गंगा में पानी छोड़ने की गुहार लगानी पड़ी है। द क्विंट को वाराणसी के डीएम योगेश्वर राम मिश्रा ने कहा कि यहां अधिकांश पर्यटक गंगा स्नान, पूजा-अर्चना, गंगा आरती या गंगा में बोटिंग करने आते हैं लेकिन जलस्तर में कमी की वजह से पर्यटकों को निराशा हाथ लगी है। उन्होंने बताया कि शासन को हरिद्वार या कानपुर बैराज से पानी छोड़ने के लिए अनुरोध किया गया है। बता दें कि पिछले साल इसी सीजन में कानपुर बैराज से 1450 क्यूसेक जल छोड़ा जा रहा था जो इस साल घटकर 1150 क्यूसेक रह गया है।

काशी के लोग भी गंगा के इस हाल पर खफा हैं। उनमें इस बात को लेकर रोष है कि स्थानीय सांसद होने के बावजूद पीएम नरेंद्र मोदी गंगा उद्धार की दिशा में विशेष रुचि नहीं ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि आज गंगा में जो भी बचा-खुचा पानी है वह नालों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकला हुआ गंदा जल है। बता दें कि इसी साल मार्च में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युल मैक्रोन वाराणसी आए थे। उनके साथ प्रधानमंत्री मोदी ने भी गंगा में नौका विहार किया था। बनारस की संस्कृति से रू-बरू कराने के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने गंगा दर्शन, गंगा आरती के अलावा रामलीला मंचन का भी आनंद उठाया था। तब सरकरा ने गंगा में विशेष रूप से पानी छोड़ा था। गंगा को सदानीरा कहा जाता है बावजूद इसके गंगा आज घाटों से रूठ चुकी है। काशी में करीब 20 गंगा घाट हैं जो लंबे समय से पर्यटकों के केंद्र रहे हैं मगर अधिकांश घाट इस समय सूने पड़े हैं। वहां रेत की टीले पसरे पड़े हैं। गंगा में जहां नाव तैरनी चाहिए वहां मोटरसाइकिल दौड़ाए जा रहे हैं।

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