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आध्यात्मिक महत्त्व की पांवधोई नदी को मिला पुनर्जीवन

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि डेढ़ सदी पहले तक हमारी पानी की समझ अत्यंत विस्तृत थी। हिमालय और समुद्र के बीच नैसर्गिक आकर्षण है।

Author June 12, 2019 2:01 AM
पांवधोई नदी में चला सफाई अभियान

सुरेंद्र सिंघल

सहारनपुर नगर के बीच से बहने वाली प्राचीन एवं आध्यात्मिक महत्त्व की 9.3 किलोमीटर लंबी पांवधोई नदी को पुनर्जीवन मिल गया है। अभी प्रथम चरण पूरा हुआ है। नदी के उद्गम स्थल शकलापुरी से बाबा लालदास बाड़ा घाट तक जल निर्मल और प्रवाहवान हो गया है। नदी के दो तिहाई हिस्से की साफ-सफाई और जल प्रवाह बहाल करने का चुनौतीपूर्ण काम अभी भी बाकी है।  पांवधोई नदी के पुनर्जीवन के तीन चरणों की योजना का पहला और मुख्य चरण पूरा होने पर 31 मई को जल महोत्सव का आयोजन हुआ। हरिद्वार के जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर एवं भारत माता मंदिर के प्रभारी आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज और ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन आश्रम के स्वामी चिदानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज एवं अंतरराष्ट्रीय योग गुरू पद्मश्री भारत भूषण समेत अनेक संत आयोजन में शामिल हुए।

स्वामी अवधेशानंद गिरि का कहना है कि मानवीय भूलों के कारण हमारे अधिकांश तीर्थ स्थल, नगर, नदियां, जलाशय, कुएं, बावड़ी केवल गंदगी, उससे उत्पन्न दुर्गंध और मिथ्याचार के प्रतीक हैं। यमुना नदी स्पर्श के लायक भी नहीं बची है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि डेढ़ सदी पहले तक हमारी पानी की समझ अत्यंत विस्तृत थी। हिमालय और समुद्र के बीच नैसर्गिक आकर्षण है। वह जाति,धर्म और प्रांत ही नहीं देश की सीमा तक नहीं मानने वाला है, क्योंकि इसे प्रकृति ने बनाया है मानव ने नहीं। योगाचार्य पद्मश्री भारत भूषण ने कहा कि वे विश्व के ऐसे शहरों में गए हैं जहां नदियां उनके बीच से बहती हैं, जो वहां के लोगों के सौंदर्यबोध और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को प्रदर्शित करती हैं। हमारे यहां नदियां धार्मिक और पवित्र मानी जाती हैं, लेकिन फिर भी हम उन्हें स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने में लगातार नाकाम साबित हो रहे हैं। महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि नदियां सृष्टि की विराट नाड़ी की तरह हैं। यदि हमने नदियों को नहीं बचाया तो हम भी नहीं बचेंगे।

इस मौके पर जिलाधिकारी सहारनपुर आलोक पांडे और मेयर संजीव वालिया ने पांवधोई नदी परियोजना को लेकर अपनी बातें रखीं। बाबा लालदास बाड़ा घाट पर आयोजित समारोह में अतिथियों ने पांवधोई नदी की पूजा अर्चना की। इस मौके पर 175 मीटर लंबी नदी का चैनेलाइजेशन, बोल्डर पेचिंग, पैदल मार्ग में इंटरलाकिंग टाई लगाने का लोकार्पण किया गया। पांवधोई को पिछले 50 वर्षों में स्वच्छ करने के अनेक प्रयास किए गए। लेकिन कचरे एवं गंदगी की समस्या जस-की-तस बनी रही। मार्च 2018 में चंद्र प्रकाश त्रिपाठी के सहारनपुर का मंडलायुक्त बनने के बाद फिर से इस अभियान की शुरुआत हुई। यह अभियान तेजी के साथ आगे बढ़ा और अब पहला चरण पूरा हो गया।

पांवधोई नदी का उद्गम स्थल प्राकृतिक है। यह सहारनपुर देहात कोतवाली के तहत धोबीघाट से साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर गांव संकलापुरी में है। उद्गम स्थल पर पानी की निकासी कम होने और इस नदी के शहर में प्रवेश करने पर नाले-नालियों का गंदा पानी डलने से पांवधोई नदी एक तरह से मर गई थी।
अधिशासी अभियंता सिंचाई विकास त्यागी के अनुसार पांवधोई नदी पर नए चेकडैम का निर्माण पूरा होने जा रहा है। चेकडैम में ही नदी की डीसिल्टिंग के लिए रेगुलेटर बनाया जा रहा है। दोनों किनारों को आपस में जोड़ने के लिए पैदल पुल का निर्माण किया जा रहा है। प्रथम चरण में सकलापुरी से लेकर लालदास बाड़ा तक की कार्य योजना तैयार की गई। इसके लिए सरकड़ी रजवाहा से नदी के ऊपर एक्वाडक्ट बनाया गया है। इससे पानी को पांवधोई नदी में गिराया जाएगा। लालदास बाड़े पर पांच फीट ऊंचा चेकडैम बनाया गया है। चेकडैम से नदी का पानी झरना की तरह गिरेगा।

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