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यूपी: राशन के लिए भटक रही बुजुर्ग महिला कोटे की दुकान पर गश खाकर गिरी, मौत के बाद मिला अनाज

उत्तर प्रदेश में एक बुजुर्ग महिला कई दिनों तक राशन के लिए कोटे की दुकान पर आती-जाती रही लेकिन अनाज नहीं मिला। उनकी मौत के बाद दुकानदार घर पर अनाज पहुंचा गया।

Author Updated: December 31, 2018 7:12 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है. (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

उत्तर प्रदेश के रायबरेली में राशन के लिए भटकती बुजुर्ग को जीते जी राशन नहीं मिला और मौत के बाद अनाज घर पहुंचा दिया गया। महिला का नाम सरजू देई बताया जा रहा है। वह करीब 20 दिनों से राशन दुकान का चक्कर काट रही थी। स्थानीय अखबार में छपी खबर के मुताबिक, एक 75 वर्षीय महिला कई दिनों से राशन के लिए दुकान का चक्कर लगा रही थी। हलांकि, पीओएस मशीन द्वारा पहचान नहीं होन की वजह से उन्हे बार-बार वापस लौटा दिया जा रहा था।

अन्य दिनों की तरह बीते गुरुवार (27 दिसंबर) को भी वृद्धा राशन के लिए कोटा दुकान पर पहुंची, लेकिन इस दिन वह गश खाकर वहीं पर गिर पड़ी। स्थानीय लोगों ने महिला को किसी तरह अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद महिला को वापस घर लाया गया जहां शनिवार (29 दिसंबर) को उसकी मौत हो गई। महिला की मौत की खबर सुनते ही कोटा दुकानदार ने घर पर राशन पहुंचा दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रायबरेली के डलमऊ क्षेत्र के पूरे भवानी मजरे कुरौली दमा की रहने वाली सरजू अपनी विधवा बहू माया और 13 साल के पोते के साथ रहती थी। वृद्धा के दो बेटे रामसेवक और रामकुमार ईंट भट्ठे पर काम करते हैं। तीसरा बेटा गांव में ही बंटाईदार के तौर पर खेती करते हैं। सरजू का अंत्योदय कार्ड बना हुआ था, लेकिन पीओएस मशीन से राशन कार्ड बंटने की वजह से उनकी उंगुलियों की पहचान नहीं हो पा रही थी। इस वजह से उन्हें राशन नहीं मिल रहा था।

दूसरी ओर गांव के कुछ लोगों का यह भी कहना था कि वृद्धा की मौत भूख की वजह से हुई है। हालांकि, एसडीएम जीतलाल सैनी ने इस बात से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की गई है। भूख से मौत नहीं हुई है। गांव के प्रधान रेनू शुक्ला का भी मानना है कि सरजू की आर्थिक स्थिति दयनीय थी। शुक्ला ने कहा, “जब भी सरजू देई मेरे घर आती थी, मैं उनकी आर्थिक मदद करती थी। दो दिन पहले भी मैंने उन्हें कुछ पैसे दिए थे।” तीन बेटे के होते हुए भी सरजू की हालत दयनीय थी। वे अक्सर ग्राम प्रधान व अन्य लोगों से मदद मांगती रहती थी।

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