ताज़ा खबर
 

यूपी चुनाव हारने के बाद मायावती ने समझी महागठबंधन की जरूरत, बोलीं- किसी से भी हाथ मिलाने को हूं तैयार

माया ने कहा, पार्टी आंदोलन के हित में ‘जहर को जहर से मारने’ के आधार पर चलकर ईवीएम की गड़बड़ी को रोकना बहुत जरूरी है।

Author April 14, 2017 4:10 PM
बसपा अध्यक्ष मायावती और पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा। (फोटो-PTI)

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने भाजपा पर अपने खिलाफ ‘साजिश’ रचने का आरोप मढ़ते हुए आज (14 अप्रैल को) स्पष्ट संकेत दिये कि भाजपा विरोधी दलों से हाथ मिलाने में उन्हें परहेज नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने अपने छोटे भाई आनंद कुमार को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाने का भी ऐलान किया। मायावती ने अंबेडकर जयंती पर आयोजित पार्टी के कार्यक्रम में भाजपा पर 2014 के लोकसभा और 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘षड्यंत्र के तहत मुझे निशाना बनाया जा रहा है ताकि मैं भाजपा द्वारा ईवीएम में की गयी गड़बड़ी के खिलाफ बोलना बंद कर दूं, ये इनकी बहुत बड़ी भूल है। मैं कदम पीछे खींचने वाली नहीं हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी पार्टी भाजपा द्वारा ईवीएम की गड़बड़ी के खिलाफ लगातार संघर्ष करेगी और इसके लिए भाजपा विरोधी दलों से भी हाथ मिलाना पड़ा तो अब उनके साथ भी हाथ मिलाने में परहेज नहीं है। पार्टी आंदोलन के हित में ‘जहर को जहर से मारने’ के आधार पर चलकर ईवीएम की गड़बड़ी को रोकना बहुत जरूरी है।’’ छोटे भाई आनंद कुमार को बसपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित करते हुए मायावती ने कहा, ‘‘मैंने इस शर्त के साथ आनंद कुमार को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का फैसला ले लिया है कि वह पार्टी में हमेशा नि:स्वार्थ भावना से कार्य करता रहेगा और कभी भी सांसद, विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री आदि नहीं बनेगा। इसी शर्त के आधार पर आज मैं उसे पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित कर रही हूं।’’

मायावती ने लिखे हुए भाषण पढ़ने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि 1996 में उनके गले का बड़ा ऑपरेशन हुआ था और पूरी तरह खराब हो चुका एक ‘ग्लैण्ड’ डॉक्टरों ने निकाल दिया था। मौखिक भाषण देने में ऊंचा बोलना पड़ता है लेकिन डॉक्टरों ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी है। बसपा सुप्रीमो ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में चीनी मिलों की बिक्री में कथित घोटाले के आरोपों पर कहा कि चीनी मिलों से संबद्ध गन्ना मंत्रालय उनके पास नहीं बल्कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास था। चीनी मिलों को बेचने का फैसला अकेले सिद्दीकी का नहीं, बल्कि कैबिनेट का था। मायावती ने कहा कि स्मारकों के निर्माण से जुड़े फैसले भी कैबिनेट में लिये गये थे।

मायावती ने भाजपा पर आरोप लगाया, ‘‘पिछले कई वर्षों से मेरे साथ-साथ मेरे भाई-बहनों और नजदीकी रिश्ते-नातों को काफी ज्यादा भुगतना पड़ रहा है। छोटे भाई आनंद कुमार को भाजपा एंड कंपनी के लोग केंद्रीय सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर 2014 से ही आये दिन आयकर, प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई के जरिए काफी परेशान करते रहते हैं। उसकी छवि को भी मीडिया में धूमिल करते रहते हैं।’’ बसपा सुप्रीमो ने भाई को उपाध्यक्ष बनाने की वजह बताते हुए कहा कि वह अधिकांश समय लखनऊ में रहती हैं। आये दिन कागजों पर उन्हें दस्तखत करने होते हैं, जिसके लिए हर चौथे पांचवे दिन दिल्ली से किसी को आना पड़ता है। ‘‘हमारे पार्टी संविधान में उपाध्यक्ष को भी ये अधिकार है ताकि वो दिल्ली में ही साइन कर दे और पार्टी का ज्यादा खर्च ना हो।’’

उन्होंने कहा कि छोटा भाई अपने कारोबार को पूर्व की तरह चलाता रहेगा ताकि वह आर्थिक मामले में किसी पर निर्भर ना रहे। मायावती ने परिवार के अन्य किसी ‘मिशनरी’ सदस्य को राजनीति में लाने की छूट भी आनंद कुमार को दी। मायावती ने कहा कि जनता को भाजपा की ‘ईमानादारी की नाटकबाजी’ से सावधानी बरतनी होगी। भाजपा के नेता आये दिन खुद को खासकर मीडिया में ऐसे दर्शाते हैं कि जैसे वो देश में अकेले ही ईमानदार और दूध के धुले हैं और उनकी नजरों में बाकी सभी विरोधी पार्टियों के नेता बेईमान तथा भ्रष्ट हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इस संदर्भ में मैंने अनेक बार भाजपा के सर्वोच्च नेताओं को कहा है कि यदि वास्तव में ईमानदार हैं तो नोटबंदी से पहले के दस महीनों और अब तक का अपनी पार्टी और खुद की संपत्ति का मीडिया में खुलासा करने से क्यों घबराते हैं।’’

मायावती ने भाजपा को चुनौती दी कि वह देश के 100 ऐसे बड़े राजनीतिक नेताओं की सूची तैयार करे जो लगभग पिछले 30-35 वर्ष से राजनीति में सक्रिय हैं और वे सांसद, विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री आदि भी रहे हैं। वे ये बतायें कि जब वे राजनीति में आये थे तो उनके पास, उनके नजदीकी, यार दोस्तों और रिश्ते नातों के पास कितनी संपत्ति थी और वर्तमान में कितनी है। फिर भाजपा उनका ये पूरा विवरण मीडिया में उजागर करे। मायावती ने कहा, ‘‘कई बार कहने के बावजूद ये करने की हिम्मत भाजपा नेता नहीं जुटा पा रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यदि ऐसी सूची बनी तो सबसे ज्यादा नाम भाजपा वालों के ही शामिल होने वाले हैं।’’

वीडियो: मायावती का पलटवार: बीजेपी अब बसपा की छवि खराब कपना चाहती है

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App