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मुन्‍ना बजरंगी को मारने वाले सुनील राठी ने 6 महीने में लिया था पिता के कातिलों से बदला

सुनील राठी ने जरायम की दुनिया में पहली बार दिसंबर 1999 में कदम बढ़ाया था। जब अपराधियों ने बागपत जिले की टिकरी नगर पंचायत के तत्कालीन अध्यक्ष उसके पिता की हत्या कर दी गई थी। सुनील राठी की उम्र उस वक्त सिर्फ 21 साल की थी।

साल 2000 के अगस्त महीने में, सुनील और उसके साथियों पर शोरूम लूटने के बाद तीन लोगों की हत्या का आरोप लगा था।

सुनील राठी, वही शख्स है जिसने यूपी के खूंखार शूटर प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी को सोमवार को बागपत जेल में गोलियों से भून दिया था। सुनील राठी ने जरायम की दुनिया में पहली बार दिसंबर 1999 में कदम बढ़ाया था। जब अपराधियों ने बागपत जिले की टिकरी नगर पंचायत के तत्कालीन अध्यक्ष उसके पिता की हत्या कर दी गई थी। सुनील राठी की उम्र उस वक्त सिर्फ 21 साल की थी।

बागपत के बड़ौत कस्बे के टिकरी गांव का रहने वाले सुनील के पिता नरेश राठी की उनके दो सहयोगियों के साथ तीन लोगों ने हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में कथित तौर पर दिल्ली पुलिस का ​निलंबित अधिकारी रणवीर राठी भी शामिल था। सुनील के पिता की हत्या के बाद उसकी मां राजबाला चौधरी ने साल 2000 में पंचायत का चुनाव लड़ा। चुनाव में राजबाला का विरोधी प्रत्याशी महक सिंह था। महक सिंह, नरेश राठी की हत्या के आरोपी सोमपाल राठी का छोटा भाई था।

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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया,”21 जून 2000 को सुनील ने महक सिंह और उसके भाई मोहकम सिंह की हत्या कर दी। उसे हत्या का दोषी पाया गया और उम्रकैद की सजा दी गई। साल 2000 के अगस्त महीने में, सुनील और उसके साथियों पर शोरूम लूटने के बाद तीन लोगों की हत्या का आरोप लगा। सुनील को उसी साल हरिद्वार के कनखल इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास से दो हैंड ग्रेनेड भी बरामद किए गए थे।”

पुलिस अधिकारी के मुताबिक,”इसके बाद सुनील का जेल के भीतर आने-जाने का सिलसिला लगा रहा। सुनील पर आरोप लगे कि उसने जेल के भीतर से ही रंगदारी वसूली का गिरोह संचालित किया। सुनील के निशाने पर ज्यादातर डॉक्टर और कारोबारी रहे। वह रुड़की जेल में बंद था, इसके बाद उसे दिल्ली पुलिस ने रिमांड पर ले लिया। वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था और इसके बाद उसे बागपत जेल में भेज दिया गया। जहां से उसे देहरादून जेल भेजा गया है।” पुलिस का मानना है कि जेल में बंद रहते हुए सुनील ने कथित तौर पर रुड़की के डॉक्टर से रंगदारी मांगी थी। सुनील पिछले साल रुड़की जेल में बंद हुआ था। लेकिन इसके बाद उसने दावा किया कि उसकी जान को खतरा है, इसके बाद उसे बागपत जेल में शिफ्ट कर दिया गया था।

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