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उत्तर प्रदेशः सस्ती जेनरिक दवाओं की नहीं बढ़ पा रही बिक्री

नामी कंपनियों की दवाओं (ब्रांडेड) के मुकाबले सस्ती दर पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने वाली जन औषधि योजना लोगों से जुड़ने में सफल नहीं हो रही है।

Author नोएडा। | October 3, 2018 5:01 AM
नोएडा में सदरपुर और सेक्टर- 29 गंगा शॉपिंग कांप्लेक्स में जन औषधि केंद्र खुले हुए हैं।

नामी कंपनियों की दवाओं (ब्रांडेड) के मुकाबले सस्ती दर पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने वाली जन औषधि योजना लोगों से जुड़ने में सफल नहीं हो रही है। सरकारी अनुदान (सबसिडी) के बावजूद जन औषधि संचालकों के लिए इन्हें चलाना मुश्किल हो रहा है। इससे बड़े और महंगे शहरों में ऐसे औषधालय खोलने वालों की संख्या बढ़ नहीं पाई है। इसके विपरीत पुराने जन औषधि केंद्रों के बंद होने का सिलसिला शुरू हो चुका है। केंद्र संचालकों का तर्क है कि डॉक्टर जेनरिक दवाएं लिख नहीं रहे हैं। इससे मरीज इन्हें खरीद नहीं रहे हैं। वहीं, जेनरिक दवाओं की सूची में शुमार 250 में से केवल 100 के आसपास उपलब्ध हैं। इस कारण जन औषधि केंद्रों की बिक्री प्रभावित हो रही है। इससे खर्च निकाल पाना बेहद मुश्किल हो रहा है। नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, जैसे बड़े और महंगे शहरों में दुकानों का ज्यादा किराया भी जन औषधालयों की नाकामी का बड़ा कारण साबित हो रहा है।

नोएडा में सदरपुर और सेक्टर- 29 गंगा शॉपिंग कांप्लेक्स में जन औषधि केंद्र खुले हुए हैं। गत सप्ताह सेक्टर- 30 स्थित बाल चिकित्सालय में जन औषधि केंद्र का उद्घाटन गौतम बुद्ध नगर के सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने किया। 2015-16 से शुरू हुई इस योजना के तहत गाजियाबाद में खोले गए कुल 27 जन औषधालयों में से तीन बंद हो चुके हैं। नए केंद्र खोलने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं। नोएडा के एक जन औषधालय के संचालक के मुताबिक सरकार अनुदान दे रही है। फर्नीचर और कंप्यूटर के अलावा दवाओं की बिक्री पर कमीशन का प्रावधान है। दो साल तक करीब 10 हजार रुपए महीने का अनुदान दिया जा रहा है लेकिन दवाओं और बिक्री में कमी, निजी समेत सरकारी डॉक्टरों का जैनरिक दवाएं लिखने से परहेज और महंगा किराया इस योजना को नाकाम साबित कर रहा है।

संचालकों के मुताबिक भले ही ब्रांडेड के मुकाबले जेनरिक दवाओं की कीमत में 50-90 फीसद तक का अंतर है। इसके बावजूद काफी कम दवाओं की उपलब्धता इस महत्त्वाकांक्षी योजना को सफल होने नहीं दे रहा है। योजना को प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश में नियमों में बदलाव कर सरकारी अस्पताल परिसरों में भी जन औषधि केंद्रों को जगह दी गई है।

जन औषधि केंद्र में ब्रांडेड दवा, ड्रग एक्ट के तहत नहीं है रोक

जन औषधालय खोलने वालों के साथ होने वाले समझौते में वे अन्य नामी कंपनियों की महंगी दवाएं समेत अन्य उत्पाद नहीं बेच सकते हैं। यदि वे ऐसा करते हैं, तो परियोजना के तहत हुए समझौते के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर की जा सकती है। हालांकि ड्रग एक्ट में ऐसी कोई रोक नहीं है। गाजियाबाद में गत दिनों एसडीएम ने जन औषधि केंद्रों में नामी कंपनियों की दवाएं बेचने की शिकायत पर छापा डाला था। जहां ब्रांडेड दवाएं मिलने पर उन्हें सील कर दिया गया था। इस मामले पर औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्ट) कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक ड्रग एक्ट के मुताबिक जन औषधि केंद्र में ब्रांडेड दवाएं बेचने पर उसे सील करने का प्रावधान नहीं है। ड्रग एक्ट के मुताबिक यह कोई अपराध नहीं है। हालांकि परियोजना के तहत हुए समझौते का यह उल्लंघन जरूर है।

सामान्य दवा विक्रेता या जेनरिक दवा बेचने वाले जन औषधि केंद्र, दोनों के लिए ड्रग लाइसेंस अनिवार्य है। ड्रग लाइसेंस के नियम जन औषधालय खोलने वालों पर अन्य कंपनियों की दवाएं बेचने पर रोक नहीं लगाते हैं। अलबत्ता जन औषधालय में ब्रांडेड दवाएं बेचना समझौते का उल्लंघन जरूर है। इस पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है। —राजेश श्रीवास्तव, प्रभारी उप्र औषधि विभाग, मेरठ मंडल

दवाओं और प्रचार प्रसार की कमी जेनरिक दवाएं बेचने के लिए खोले गए जन औषधि केंद्रों के सफल नहीं होने की मुख्य वजह रही है। हालांकि जीएसटी लागू होने के बाद लखनऊ से दवाएं खरीदने की बाध्यता खत्म हो गई है। इससे दिल्ली से भी उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के जन औषधालय संचालक जेनरिक दवाएं खरीदने का रास्ता खुल गया है। इससे दवाओं की उपलब्धता में सुधार आने की उम्मीद है। -अनूप खन्ना, जिलाध्यक्ष गौतम बुद्ध नगर केमिस्ट एसोसिएशन एवं जन औषधालय संचालक

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