जिंदगी भर की जमापूंजी डूबने की आशंका से सहमे मकान खरीदार, भाजपा से भी टूटी लोगों की उम्मीदें

इस मर्तबा उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आने से खरीदारों की शुरुआती उम्मीदों पर हालिया दिनों में हुए घटनाक्रम ने पूरी तरह से पानी फेर दिया है। बताया जा रहा है कि अब खरीदार फ्लैट से ज्यादा रकम मिलने की वापसी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

बैंक लोन को चुकाने में नाकामयाब बिल्डरों की जमीनों की नीलामी में भले ही जमीन पर पहला अधिकार बताते हुए औद्योगिक विकास प्राधिकरण नीलामी की अनुमति नहीं देने का दावा कर रहा है, अलबत्ता इस मंझधार में पिसने वाले फ्लैट खरीदारों की नींद उड़ गई है। बरसों पहले बुक कराए फ्लैटों का कब्जा मिलेगा या नहीं? इस सवाल को हालिया माहौल में करने से खुद खरीदार डरने लगे हैं। अगर फ्लैट तैयार नहीं हुए, तब फ्लैट की कीमत की एवज में दी जिंदगी भर की जमापूंजी कैसे वापस लौटेगी?  आलम यह है कि उत्तर प्रदेश की पिछली बसपा और सपा सरकारों पर बिल्डर समर्थक होने के आरोप खरीदारों ने लगाए थे। इस मर्तबा उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आने से खरीदारों की शुरुआती उम्मीदों पर हालिया दिनों में हुए घटनाक्रम ने पूरी तरह से पानी फेर दिया है। बताया जा रहा है कि अब खरीदार फ्लैट से ज्यादा रकम मिलने की वापसी को प्राथमिकता दे रहे हैं। उधर, जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड की तरफ से नियुक्त अंतरिम संकल्प पेशेवर (आइआरपी) अनुज जैन ने जेपी की परियोजनाओं के फ्लैट खरीदारों से 24 अगस्त तक ब्योरे मांगे हैं। ताकि जेपी मामले में कारपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (सीआइआरपी) में उनके हितों की रक्षा की जा सके।

जेपी बिल्डर की परियोजनाओं में करीब 30 हजार से ज्यादा फ्लैट बनाए जा रहे हैं। मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में जेपी बिल्डर कंपनी ने मार्च 2018 तक 6000 फ्लैट खरीदारों को कब्जा दिए जाने का दावा किया था। इसके अलावा 2018-19 में 8000 और शेष को 2020 तक कब्जा देने की कार्य योजना प्राधिकरण अधिकारियों को दी थी। इस बीच 9 अगस्त 2017 को बकाए को लेकर राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) इलाहाबाद ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ कारपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (सीआइआरपी) को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 के तहत कार्यवाही शुरू किए जाने से करीब 30 हजार फ्लैट खरीदारों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। कंपनी के दिवालिया होने की आशंका से घबराए खरीदारों ने फ्लैट मिलने की उम्मीद पर पानी फिरता देख सेक्टर- 128 स्थित जेपी बिल्डर के आॅफिस पर प्रदर्शन किया। हालांकि नोएडा सीईओ अमित मोहन प्रसाद ने खरीदारों के हितों की पूरी रक्षा किए जाने का दावा किया है। लेकिन जानकारों का मानना है कि तुरंत कड़ा कदम नहीं उठाने पर खरीदारों के हजारों करोड़ रुपए डूब जाने की आशंका है। चूंकि ज्यादार खरीदारों को फ्लैटों का कब्जा इसलिए नहीं मिला है क्योंकि प्राधिकरण ने अभी अधिभोग प्रमाणपत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) नहीं दिया है। अधिभोग प्रमाणपत्र निर्माण कार्य पूरा होने और तय प्रावधानों को पूरा करने के बाद प्राधिकरण जारी करता है।

इसके बाद बिल्डर कंपनी अपने खरीदारों को कब्जा देकर रजिस्ट्री कराती है। रजिस्ट्री त्रिपक्षीय समझौते के आधार पर होती है। जिसमें खरीदार-बिल्डर के अलावा प्राधिकरण भी एक पक्ष बनता है। इसके बाद ही सरकारी स्तर पर खरीदार को मान्यता मिलती है। सूत्रों के मुताबिक, बिल्डर कंपनी को प्राधिकरण जमीन आबंटित करता है। उस भूखंड पर बिल्डर परियोजना बनाकर खरीदारों की बुकिंग करता है। खरीदार के नाम रजिस्ट्री होने तक प्राधिकरण का खरीदार से कोई सीधा सरोकार नहीं होता है।

 

Next Stories
1 नोएडा: भाई को राखी बांध बहन ने की खुदकुशी
2 पुलिस ने लूटपाट के गिरोह का किया पर्दाफाश, खुद को कारखाने और होटल मालिक बताकर करते थे वारदात
3 नोएडा: आधा दर्जन से ज्यादा बिल्डर श्रम विभाग के निशाने पर
यह पढ़ा क्या?
X