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कम आबादी वाली जगह पर कचरा स्थल न बनाने पर उठे सवाल

कचरा निस्तारण स्थल को लेकर हंगामे और विरोध के चलते किसानों की गिरफ्तारी के बीच लोगों का यह सवाल है कि इसे सेक्टर- 151ए में क्यों नहीं बनाया जा रहा है? जानकारों के मुताबित प्राधिकरण के पास सेक्टर- 123 के आसपास घनी आबादी के कारण निवासी कचरा निस्तारण स्थल का विरोध कर रहे हैं।

Author नोएडा, 6 जून। | Published on: June 7, 2018 5:19 AM
सेक्टर- 123 में कचरा निस्तारण संयंत्र के लिए चिह्नित 25 एकड़ जमीन पर भूमिगत चेंबर बनाने का काम चल रहा है।

कचरा निस्तारण स्थल को लेकर हंगामे और विरोध के चलते किसानों की गिरफ्तारी के बीच लोगों का यह सवाल है कि इसे सेक्टर- 151ए में क्यों नहीं बनाया जा रहा है? जानकारों के मुताबित प्राधिकरण के पास सेक्टर- 123 के आसपास घनी आबादी के कारण निवासी कचरा निस्तारण स्थल का विरोध कर रहे हैं। इसे सेक्टर- 151ए में बनाया जा सकता है। मास्टर प्लान 2031 में भी इस जगह का प्रावधान है। बताया गया है कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से भी इस जगह पर कचरा निस्तारण स्थल बनाने की मंजूरी दी है। अधिकारियों के मुताबिक एनजीटी के आदेश पर सेक्टर- 123 को इस काम के लिए चिह्नित कर काम किया जा रहा है। यहीं वेस्ट टू एनर्जी (कचरे से बिजली) बनाने का संयंत्र लगाया जाएगा।

सेक्टर- 123 में कचरा निस्तारण संयंत्र के लिए चिह्नित 25 एकड़ जमीन पर भूमिगत चेंबर बनाने का काम चल रहा है। विरोध करने वाले जेसीबी मशीन से खोदे गए गड्ढों को दोबारा भर रहे हैं। जिससे विवाद बढ़ रहा है। प्राधिकरण, प्रशासन के अधिकारी एनजीटी के आदेश का हवाला देकर ग्रामीणों से कानून हाथ में नहीं लेने की सलाह दे रहे हैं। विरोध करने वाले 61 लोग अभी तक जेल भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों का आरोप है कि प्राधिकरण ने खुद विवाद को बढ़ाया है। सेक्टर- 151ए को कचरा निस्तारण स्थल के लिए चिह्नित किया जा सकता था, लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया है? इसका जवाब बरकरार है। 42 साल के बाद भी प्राधिकरण अधिकारियों ने बुनियादी जरूरत कचरा निस्तारण के लिए योजना तैयार नहीं की। इस वजह से पहले भंगेल में 50 हेक्टेयर जमीन में बगैर तकनीक अपनाए कचरे को मिट्टी में दबाया गया। बगैर तकनीक के यू ही कचरा फेंकने का विरोध कर लोगों ने एनजीटी में याचिका दायर की है।

जेल में बंद किसानों को छोड़ने के लिए सौंपा ज्ञापन

सेक्टर- 123 में प्रस्तावित कचरा घर के विरोध में गिरफ्तार किसानों की रिहाई को लेकर बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (अंबावत) के कार्यकर्ताओं ने सिटी मैजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। यूनियन के कार्यकर्ता चौधरी बाली सिंह के नेतृत्व में सिटी मैजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि नोएडा के किसान सेक्टर- 123 में बन रहे कचरा घर का विरोध कर रहे हैं। पुलिस ने बल पूर्वक विरोध कर रहे किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। ज्ञापन सौंपने वालों में जग्गी पहलवान, सोरन प्रधान समेत बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद थे।

सेक्टर- 54 में कचरा डालने पर रोक, मिलेगा पार्क का स्वरूप

एनजीटी ने सेक्टर- 54 में कचरा डालने पर रोक लगा दी है। यह जानकारी बुधवार को कूड़ा निस्तारण संघंर्ष समिति ने सेक्टर- 15 स्थित नोएडा पब्लिक लाइब्रेरी परिसर में हुई पत्रकार वार्ता में दी। समिति ने प्राधिकरण से तुरंत वहां इक्टठा हुए कचरे को उठाने को कहा है। ताकि कचरे में पानी भरने से महामारी जैसी बीमारियां ना पैदा हो।समिति के प्रवक्ता महेश सक्सेना ने बताया कि शहर में कचरे का निस्तारण नहीं होना प्राधिकरण की गलत नीति की देन है। पिछले 42 साल में प्राधिकरण कोई ऐसी योजना नहीं बना सका, जहां कचरे का आधुनिक विधि से निस्तारण किया जा सके।

कचरे से बनेगी बिजली, नहीं उठेगी दुर्गंध

सेक्टर- 123 में वेस्ट टू एनर्जी संयंत्र लगाने का काम जारी है। बिजली पैदा करने के लिए कचरे को सुखाकर आरडीएफ में तब्दील किया जाएगा। इसी आरडीएफ से बिजली बनेगी। कचरे का बाकी हिस्सा पॉलीथीन या अन्य अनुपयोगी सामान होता है। जिसे आरडीएफ में तब्दील नहीं किया जा सकता है। इसी कचरे का निस्तारण संयंत्र में किया जाएगा। जिसके चलते यहां अवशेष कुछ नहीं बचेगा। सेक्टर- 123 के आसपास के वातावरण को दुर्गंध रहित बनाने के लिए संयंत्र परिसर चारों तरफ से ढका होगा। कंपोस्ट या बिजली बनने के दौरान दुर्गंध पैदा नहीं होगी।

अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित होगा कचरा निस्तारण संयंत्र

निवासियों के विरोध के बीच सेक्टर- 123 में बनाए जा रहे कचरा घर को शून्य उत्प्रवाह (जीरो डिस्चार्ज) तकनीक पर बनाने की तैयारी है। जिसके लिए आधुनिक तकनीक पर आधारित कई कंपोस्टिंग मशीनें लगेंगी। यहां लगने वाले निस्तारण संयंत्र को गोवा में इस्तेमाल हो रही तकनीक पर लगाया जाएगा। जिसके जरिए कचरे के निस्तारण के बाद कुछ नहीं बचेगा। महंगी होने के बावजूद पर्यावणीय क्षति को कम करने और लोगों की नाराजगी को दूर करने के लिए प्राधिकरण इस तकनीक पर काम कर रहा है। ाहर से रोजाना 650 टन कचरा निकलता है।

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