online monitoring of plants planted during monsoon - Jansatta
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यूपी: निगरानी प्रणाली से पौधों पर ऑनलाइन निगाहें

उत्तर प्रदेश में बारिश के मौसम के दौरान रोपे जाने वाले करोड़ों पौधों का लेखा-जोखा अब ऑनलाइन रखा जाएगा। इसके लिए पौधरोपण निगरानी प्रणाली (पीएमएस) का इस्तेमाल किया जा रहा है।

Author नोएडा। | August 1, 2018 4:46 AM
वन विभाग अधिकारियों के मुताबिक बारिश के मौसम (1 जुलाई से 30 सितंबर तक) में पूरे प्रदेश में 9.16 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है।

उत्तर प्रदेश में बारिश के मौसम के दौरान रोपे जाने वाले करोड़ों पौधों का लेखा-जोखा अब ऑनलाइन रखा जाएगा। इसके लिए पौधरोपण निगरानी प्रणाली (पीएमएस) का इस्तेमाल किया जा रहा है। जीपीएस युक्त पीएमएस के माध्यम से रोपे जाने वाले पौधों के आकंड़ों को बढ़ाना या घटाना संभव नहीं होगा। साथ ही तय मानक से अधिक पौधों के मृत होने पर संबंधित विभाग की जवाबदेही तय होगी और विभाग के अधिकारी से होने वाले व्यय की वसूली भी यह प्रणाली सुनिश्चित करेगी। उत्तर प्रदेश वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस पीएमएस का उपग्रह से जुड़ा होने की वजह से पौधों के आंकड़े को बढ़ाकर दिखाने की प्रवृति पर रोक लग सकेगी। मसलन 2018 में यदि किसी इलाके में 2000 हजार पौधे लगाए गए हैं। पीएमएस में यह आंकड़ा दर्ज होने के बाद यदि 2019 में उस स्थान पर 2 हजार पौधे फिर लगाकर दिखाना संभव नहीं होगा। पीएमएस में यह ब्योरा दोबारा उसी जगह पर दर्ज नहीं हो पाएगा।

वन विभाग अधिकारियों के मुताबिक बारिश के मौसम (1 जुलाई से 30 सितंबर तक) में पूरे प्रदेश में 9.16 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। गौतमबुद्ध नगर में 6.28 लाख पौधे लगाए जाएंगे। 15 अगस्त को केवल एक दिन के विशेष अभियान में प्रदेश में 5.32 करोड़ और गौतमबुद्ध नगर में 4.22 लाख पौधे लगेंगे। वन विभाग के अलावा करीब 24 अन्य विभाग वृहद पौधरोपण अभियान में शामिल रहेंगे। वन विभाग के अलावा लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, उद्यान, नोएडा-ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण आदि ने पौधे लगाए जाने वाली जगह और संख्या का आंकड़ा पीएमएस में दर्ज कर लिया है। जबकि अन्य विभागों की तरफ से पौधे लगाए जाने वाली जगह और संख्या को प्रणाली में अपलोड किया जा रहा है।

गौतमबुद्ध नगर वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एक हेक्टेयर सामान्य जमीन में 1100 पौधे लगाए जा सकते हैं। यदि जमीन ऊसर है, तब एक हेक्टेयर में 2 हजार पौधे और नहर व सड़क के किनारे भी 1100 पौधे लगाने का आंकड़ा है। हालांकि 2002-03 में छोटे पौधों की जगह 8-12 फीट ऊंचे पौधे रोपने का नियम भी लागू हुआ था। एक हेक्टेयर भूमि में 625 बड़े पौधे लगाने का मानक है। ऊसर जमीन में पौधरोपण से पहले जिप्सम, जैविक खाद और रेत मिलाकर जून महीने में गड्ढे तैयार करने होते हैं। जबकि सामान्य जमीन में गड्ढे तैयार कर पौधे लगाए जाते हैं। पौधे लगाने के बाद 3 साल तक उनकी निगरानी करने के बाद 85 फीसद जीवित रहने चाहिए। 15 फीसद से ज्यादा पौधों के मृत होने पर संबंधित विभाग के खिलाफ जांच कर स्पष्टीकरण तलब करने का नियम है। 2008 में तय मानक से ज्यादा पौधों के मृत होने पर पंचायत राज, बेसिक शिक्षा विभाग, विकास विभाग आदि के खिलाफ कार्रवाई हुई थी।

जीपीएस युक्त पीएमएस प्रणाली में पहली बार अन्य विभाग जुड़े हैं। उनकी तरफ से लगाए जाने पौधे और जगह का ऑनलाइन ब्योरा उपलब्ध होगा। हालांकि वन विभाग की तरफ से लगाए जाने वाले पौधों और जगह का ब्योरा पहले से पीएमएस प्रणाली से जुड़ा है। इस वजह से पौधों की संख्या को बढ़ाना या उनकी देख-रेख नहीं करने पर पूरी तरह से रोक लगेगी और जवाबदेही तय होगी। – प्रमोद कुमार, वनाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर

पौधरोपण अभियान को केवल एक दिन का उत्सव मानने वालों पर यह प्रणाली शिकंजा कसेगी। पौधों की संख्या को लेकर फर्जी आंकड़े इससे पूरी तरह से बंद हो जाएंगे। पौधे लगाकर देखभाल नहीं करने या मानक से अधिक पौधों के मृत होने पर संबंधित विभागों के अधिकारियों से व्यय वसूली की जाएगी। मोबाइल ऐप के जरिए भी इलाके में रोपे गए पौधों की संख्या पर निगरानी रखी जा सकेगी। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में पहले से इस प्रणाली का इस्तेमाल हो रहा है। -बी. प्रभाकर, मुख्य वन संरक्षक, (मूल्यांकन एवं अनुश्रृवण) लखनऊ

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