ताज़ा खबर
 

बिल्डर विवाद: आसान नहीं है खरीदारों की राह, दिवालिया होना बिल्डरों की सोची-समझी साजिश

फ्लैट- भूखंड की एवज में बिल्डर के खाते में करीब 18 हजार करोड़ रुपए जमा कराए हैं। इस रकम को परियोजना निर्माण में लगाने के बजाए जेपी ने अन्य कंपनियों में लगाया।

Author नोएडा | Published on: August 16, 2017 4:59 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

जेपी बिल्डर की परियोजनाओं में फंसे निवेशकों के लिए आगे की राह आसान नहीं है। भले ही शासन और प्रशासन के स्तर पर खरीदारों को राहत देने के दावे किए जा रहे हों लेकिन जानकारों का मानना है कि मौजूदा हालात में खरीदारों के नुकसान की संभावना ज्यादा है। नीलामी के बाद भी लीज होल्ड जमीन होने के कारण प्राधिकरण का ही मालिकाना हक बना रहेगा। दूसरी तरफ, खरीदारों का आरोप है कि खुद को दिवालिया घोषित पीछे बिल्डर कंपनी के मालिकों की सोची-समझी साजिश है।  सूत्रों के मुताबिक, आइडीबीआइ बैंक ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में याचिका दायर की थी। जिस पर जेपी बिल्डर कंपनी ने विरोध दर्ज कराया था। इसके कुछ दिनों बाद अगस्त की शुरुआत में बिल्डर कंपनी ने अपनी याचिका वापस लेते हुए दिवालिया घोषित करने को कहा। इसके बाद ही एनसीएलटी ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 के तहत कॉरपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (सीआइआरपी) शुरू की। जिसके तहत अंतरिम संकल्प पेशेवर (आइआरपी) को अधिकतम 270 दिनों का समय दिया गया है।

खरीदारों का आरोप है कि फ्लैट- भूखंड की एवज में बिल्डर के खाते में करीब 18 हजार करोड़ रुपए जमा कराए हैं। इस रकम को परियोजना निर्माण में लगाने के बजाए जेपी ने अन्य कंपनियों में लगाया। जिसके चलते जेपी इंफ्राटेक को लगातार घाटा हो रहा है। जबकि दूसरी कंपनियां अब भी फायदे में हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ हजारों निवेशकों के केस न्यायालयों में चल रहे हैं। ऐसे में 270 दिनों तक बिल्डर कंपनी पर लगे सभी केस का दायरा बढ़ नहीं सकता है और सामान्य प्रक्रिया के तहत नए केस भी दायर नहीं हो सकते हैं। इसी वजह से खरीदार इसे साजिश मान रहे हैं। यहीं नहीं, निवेशकों का आरोप है कि फैसले के बाद से जेपी इंफ्राटेक की तरफ से मालिकों के स्तर पर मजबूत बयान भी नहीं आया है।

इसके अलावा 270 दिनों की समय सीमा में जेपी इंफ्राटेक के रिवाइवल का प्रस्ताव मंजूर नहीं होने पर बैंक कंपनी की परिसंपत्तियों नीलाम कर अपना कर्ज वसूल करेगी। वह सिर्फ जेपी इंफ्राटेक की परिसंपत्तियों की ही नीलामी की जा सकती है, लेकिन जमीन की नहीं। इसकी वजह यह है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण ने जेपी इंफ्राटेक को जमीन लीज पर दी हुई है। इसके अलावा नीलामी के बाद जो भी कंपनी इस संपत्ति को खरीदेगा, उसे निवेशकों से केवल 5-10 फीसद रकम ही मिलेगी। क्योंकि बाकी रकम पहले ही निवेशक जेपी इंफ्राटेक के खाते में जमा कर चुके हैं। इस स्थिति में भी निवेशकों को फ्लैट का कब्जा कब मिलेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है।खास बात यह है कि बिल्डर कंपनी के पदाधिकारी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि 2019 से पहले किसी भी हालत में निवेशकों की रकम नहीं लौटाई जा सकती है। नोएडा के पांच सेक्टर में जेपी की परियोजनाएं चल रही हैं। यहां 7 हजार से ज्यादा फ्लैट बनाए जा रहे हैं। रेरा में पंजीकरण के दौरान भी जेपी ने परियोजनाओं को निर्माणाधीन दर्शाया है। इस जमीन को नोएडा ने यमुना विकास प्राधिकरण को लीज पर दी हुई है और यमुना विकास प्राधिकरण ने इसे जेपी को लीज पर दी है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 जिंदगी भर की जमापूंजी डूबने की आशंका से सहमे मकान खरीदार, भाजपा से भी टूटी लोगों की उम्मीदें
2 नोएडा: भाई को राखी बांध बहन ने की खुदकुशी
3 पुलिस ने लूटपाट के गिरोह का किया पर्दाफाश, खुद को कारखाने और होटल मालिक बताकर करते थे वारदात
ये पढ़ा क्या?
X