नोएडा : सर्फाबाद में 10 लोगों की मौत, संकरी गलियों की ऊंची इमारतों ने किया बीमार

5000 मतदाताओं वाले गांव की आबादी एक लाख से ज्यादा दूर-दराज से आए लोग नारकीय हालात में रहने को मजबूर पानी, बिजली और सफाई से लेकर साफ हवा तक का संकट।

(Express PHOTO)

नोएडा के सर्फाबाद गांव में संभावित बुखार से हुई 10 लोगों की मौत से भले ही गांववाले डरे सहमे हैं, लेकिन यह स्थिति आने वाले उन दिनों की छोटी सी तस्वीर है, जिसे पैसों और ऐशो-आराम की चकाचौंध में आज लोग भूल बैठे हैं। सर्फाबाद गांव में महज 5000 मतदाता हैं, जबकि गांव में रहने वालों की कुल संख्या एक लाख से ज्यादा है। प्राधिकरण समेत प्रशासन के आंकड़ों में 5000 की आबादी के हिसाब से सीवर, पानी, बिजली आदि की व्यवस्था की गई है। यानी बाकी बची 95 हजार आबादी के लिए योजनाओं में कोई तय प्रावधान नहीं है। यह आबादी उन लोगों की है, जो दूर-दराज या अन्य प्रदेशों से औद्योगिक महानगर में रोजगार की तलाश में आए हैं। बेहद महंगे हो चुके नोएडा में सस्ते किराए के आशियाने के रूप में गांव ही एकमात्र विकल्प बचे हैं, जिसके कारण गांव के मूल निवासियों ने एक या दोमंजिला मकानों को 4 से 6 मंजिल तक ऊंचा बना दिया है। कुछ लोगों के रहने की जग्गह पर सैकड़ों लोगों के रहने के कारण सड़क, बिजली, सीवर और पानी से लेकर साफ हवा तक का संकट पैदा हो गया है। गंदगी, साफ-सफाई की कमी, मच्छर-मक्खी समेत कीटाणुओं के प्रकोप के कारण गांव की हालत बद से बदतर हो गई है। जानकारों के मुताबिक, संभावित बुखार से मरने वालों की लगातार बढ़ती संख्या की मुख्य वजह यही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, न केवल सर्फाबाद बल्कि नोएडा के घने बसे अन्य गांवों में भी बुखार के प्रकोप की कमोबेश यही स्थिति है।

सर्फाबाद गांव नोएडा के सेक्टर-72 और 73 में स्थित है। गांव के बाहर और सड़कों के आसपास की जमीन पर अवैध रूप से सैकड़ों की संख्या में फ्लैट बना दिए गए हैं, जबकि गांव के अंदर जिस गली में बमुश्किल एक कार निकल सकती है, वहां 6 मंजिला ऊंचे मकान बने हुए हैं। ज्यादातर इन्हीं मकानों में मकान मालिक और किराएदार दोनों रह रहे हैं। गांव रहने वाले जगत सिंह ने बताया कि पिछले 15 दिनों में बुखार से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। बुखार की चपेट में आने से 69 साल के एक बुजुर्ग और 21 साल के एक लड़के की भी मौत हुई है। उसने बताया कि कई मौतें बुखार आने के महज 3-4 घंटे में ही हो गर्इं। इस रहस्यमय बीमारी में तेज बुखार आने के बाद हड्डियों और जोड़ों में भयंकर दर्द होने के साथ पैर जाम हो जाता है। सांस उखड़ने पर जितनी देर में अस्पताल ले जाकर मास्क लगाने का प्रबंध होता है, तब तक व्यक्ति की मौत हो जाती है। सर्फाबाद गांव के पूर्व प्रधान उदय राम ने बुखार के कारण हुई मौत के लिए प्राधिकरण के जन स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि विभाग में पहले कर्मचारियों की कमी थी और सफाई के लिए बड़ी मशीनें भी नहीं थीं। अब मौतें होने के बाद सारी व्यवस्था की जा रही है। अगर पहले से ही साफ-सफाई, फॉगिंग और गांव में स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करा दी गई होती, तो बीमारी से होने वाली मौतों को रोका जा सकता था।

नोएडा प्रधान संगठन की अध्यक्ष और निठारी गांव की पूर्व प्रधान विमलेश शर्मा ने बताया कि 2015 में प्राधिकरण स्तर से गांवों का विकास और रखरखाव कराए जाने के कारण ग्राम प्रधान चुनावों पर रोक लगाई गई थी। 10 महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी प्राधिकरण की ओर से गांवों में कोई विकास या जन स्वास्थ्य कार्य नहीं कराया गया। निठारी, होशियारपुर, चौड़ा, सदरपुर, छिजारसी जैसे गांवों में बुखार ने महामारी का रूप अख्तियार कर रखा है। बुखार के कारण हुई मौतों का मामला मीडिया में उजागर होने के बाद विधायक विमला बाथम, सांसद डॉ. महेश शर्मा, नोेएडा सीट से सपा प्रत्याशी अशोक चौहान ने भी गांव का दौरा किया। सीएमओ और आइएमए की ओर से गांव में स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग संभावित बुखार से केवल दो मौतें होने की बात कह रहा है। हालांकि इसकी भी अभी पुष्टि होनी बाकी है। अन्य मौतों की वजह टीबी, हार्ट अटैक और कैंसर को बताया जा रहा है। सीएमओ डॉ. विजय दीपक वर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में अभी तक किसी डेंगू के रोगी की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि रोजाना वहां करीब 2000 बुखार के रोगी पहुंच रहे हैं।

 

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