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शुल्क तय, घरों से कचरा उठाने की योजना में अभी है देरी

घर-घर से कचरा उठाने की योजना को प्राधिकरण लागू नहीं कर सका है। योजना के तहत 1 जुलाई से घर-घर से कचरा (डोर टू डोर वेस्ट) इकट्ठा करने का काम एक निजी कंपनी को करना था। कंपनी का चयन नहीं हो पाने की वजह से यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है।

Author नोएडा, 1 जुलाई। | July 2, 2018 6:28 AM
सेक्टर-123 में प्राधिकरण बना रहा है आधुनिक तकनीक का कूड़ा घर

घर-घर से कचरा उठाने की योजना को प्राधिकरण लागू नहीं कर सका है। योजना के तहत 1 जुलाई से घर-घर से कचरा (डोर टू डोर वेस्ट) इकट्ठा करने का काम एक निजी कंपनी को करना था। कंपनी का चयन नहीं हो पाने की वजह से यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि प्राधिकरण अफसरों ने अगले 10-15 दिन में कंपनी का चयन करने का दावा किया है। उसके बाद तय शुल्क लेकर कंपनी घर-घर से कचरा उठाने का काम शुरू करेगी। हालांकि, शहर की आरडब्लूए के फेडरेशन फोनरवा ने कचरा शुल्क लगाने की योजना को खारिज कर दिया है। फोनरवा निवासियों से शुल्क लेकर निजी कंपनी को कचरा उठाने का अधिकार देने का विरोध कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ शहर के विभिन्न इलाकों में लगे कूड़े के ढेर को हटाने के लिए प्राधिकरण ने ट्रकों की संख्या दोगुना कर मुबारकपुर में पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है।

ठोस कचरा प्रबंध संयंत्र (सेनेटरी लैंड फिल साइट) लगाने से पहले प्राधिकरण ने घर- घर से कचरा उठाने को श्रेणी वार तैयार किया था। जिसके तहत आबंटियों समेत संस्थानों को न्यूनतम 25 रुपए और अधिकतम 10 हजार रुपए महीने घर से उठाए जाने वाले कचरा शुल्क के रूप में देने होंगे। साथ ही आबंटियों को मिश्रित नहीं कचरे को अलग-अलग छांटकर रखना होगा। कचरे को अलग-अलग रखने के लिए डब्बों का खर्च आबंटी को उठाना होगा। हालांकि फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर असोसिएशन (फोनरवा) ने योजना के तहत लगाए जाने वाले कचरा शुल्क का विरोध किया है। फोनरवा अध्यक्ष एनपी सिंह ने बताया कि प्राधिकरण जबरदस्ती आबंटियों पर कचरा शुल्क के नाम पर बोझ डाल रही है। इसके लिए कूड़ेदान का बंदोबस्त यदि प्राधिकरण करे, तब इस योजना को लागू किया जा सकता है। प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक, सेक्टर-145 के पास मुबारकपुर को अस्थायी रूप से कचरा घर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले एक हफ्ते से शहर के विभिन्न प्राथमिक कचरा केंद्रों पर इकट्ठा कूड़े को ट्रकों से मुबारकपुर पहुंचाया जा रहा है।

खोड़ा बढ़ा रहा नोएडा का दर्द

कचरे को लेकर मचे घमासान से जूझ रहे नोएडा का दर्द खोड़ा बढ़ा रहा है। गाजियाबाद जिले के तहत आने वाली खोड़ा कालोनी नोएडा से सटी है। खोड़ा के ज्यादातर कचरे के डब्बे (कूड़ेदान) उन सड़कों पर रखे हैं, जो सड़कें नोएडा की है। ज्यादातर टूटे लोहे के डब्बों के आसपास कचरे का ढेर सड़कों पर बिखरा पड़ा है। जिस वजह से निवासियों के अलावा सड़क से निकलने वाले मुसाफिरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसी तरह खोड़ा कॉलोनी के सीवर का पानी सीधा सेक्टर-62 के नाले में डाला जा रहा है। शोधित नहीं होने से यह पानी शहर के प्रदूषण को बढ़ा रहा है। नोएडा और खोड़ा की सीमा मिली हुई है। नोएडा की सड़कों पर रखे खोड़ा के ज्यादातर प्राथमिक कूड़ेदानों में सैकड़ों टन कूड़ा डाला जा रहा है, जिसे नहीं उठाया जा रहा है।

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