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नोएडाः हवाई अड्डे के साथ जेवर को मिलेगी मेट्रो की सौगात

नोएडा से ग्रेटर नोएडा जाने वाली एक्वा लाइन मेट्रो का विस्तार जेवर तक किया जाएगा और दूसरा हवाई अड्डे व मेट्रो के कारण यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण का यह इलाका विकास के लिहाज से सबसे आगे हो जाएगा।

Author नोएडा, 11 सितंबर। | September 12, 2018 5:10 AM
जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने की मजबूत होती उम्मीद ने विकास के दो नए रास्ते खोल दिए हैं।

जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने की मजबूत होती उम्मीद ने विकास के दो नए रास्ते खोल दिए हैं। पहला, नोएडा से ग्रेटर नोएडा जाने वाली एक्वा लाइन मेट्रो का विस्तार जेवर तक किया जाएगा और दूसरा हवाई अड्डे व मेट्रो के कारण यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण का यह इलाका विकास के लिहाज से सबसे आगे हो जाएगा। बीते दिनों एक सभा में केंद्रीय मंत्री व गौतम बुद्ध नगर सांसद डॉ महेश शर्मा ने भी इसके निर्माण पर मुहर लगाई थी। दो-तीन साल में जेवर तक जाने वाली एअरपोर्ट मेट्रो का सफर करीब 35 किलोमीटर का होगा। यह नोएडा-ग्रेटर नोएडा जाने वाली एक्वा लाइन से यमुना एक्सप्रेस-वे के जीरो प्वाइंट पर जुड़ेगी, जिसके बाद जेवर जाने वाली एयरपोर्ट मेट्रो दिल्ली समेत एनसीआर के शहरों से सीधी जुड़ जाएगी।

दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा और नोएडा के लोग मेट्रो के जरिए जेवर हवाई अड्डे से जुड़ जाएंगे। जानकारों का मानना है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा और जेवर हवाई अड्डे को जोड़ने वाली इस मेट्रो का अब तक का सबसे बड़ा नेटवर्क होगा। नोएडा से ग्रेटर नोएडा जाने वाली लाइन 29.7 किलोमीटर की है। यमुना एक्सप्रेस-वे के जीरो प्वाइंट से जेवर हवाई अड्डे के बीच अभी कुल चार स्टेशन बनाने की योजना है। इससे जेवर हवाई अड्डे से नोएडा-ग्रेटर नोएडा की एक्वा लाइन, नोएडा में ब्लू लाइन को जोड़ेगी। ब्लू लाइन से मैजेंटा समेत दिल्ली-एनसीआर की अन्य मेट्रो लाइन जुड़ी हैं।

हालांकि जेवर हवाई अड्डे से इतर पहले यमुना प्राधिकरण इलाके में जो मेट्रो प्रस्तावित थी, वह 20 किलोमीटर लंबी थी। इस मेट्रो को जीरो प्वाइंट से सेक्टर-20 तक चलाया जाना था। मेट्रो की यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे 60 मीटर की हरित पट्टी से मेट्रो ट्रैक बिछाने की योजना थी क्योंकि सतह पर मेट्रो ट्रैक बनाने पर सबसे कम खर्च आता है। हालांकि अब हवाई अड्डे तक जाने वाली मेट्रो को एलिवेटेड ट्रैक पर बनाने की योजना है। यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि सतह पर कम लागत में मेट्रो लाइन तो बिछाई जा सकती है, लेकिन मेट्रो संचालन के लिए जरूरी कॉरिडोर बनाने के लिए एलिवेटेड ट्रैक बनाए जाने की उम्मीद है।

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