विकासशील मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बन पा रहा नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

नोएडा प्राधिकरण से 2016 में 100 अधिकारी, इंजीनियर समेत अन्य कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

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विकासशील मुख्यमंत्री के रूप में आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा में वोट मांगने की दलील नोएडा और ग्रेटर नोएडा के मतदाताओं के गले नहीं उतर सकती है। विकास के ब्रांड अंबेसडर बनाए गए इन शहरों की दुर्दशा का असर सरकार की साख पर पड़ेगा ही। सूबे के नामचीन इन दोनों शहरों के विकास की चाबी नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के हाथ में है। नई नियुक्ति नहीं होने और सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की वजह से प्राधिकरणों का कामकाज ठप सा पड़ा है।  एक तरफ जहां पिछले 4 सालों के दौरान दोनों प्राधिकरण कोई बड़ी आवासीय, कमर्शल, ग्रुप हाउसिंग की योजना निकालकर राजस्व बढ़ाने में नाकाम रहा है। वहीं दूसरी तरफ सरकार की विकासशील छवि को दिखाने के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो पर हजारों करोड़ रुपए की रकम खर्च होने से नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति कर्ज के कगार पर पहुंच गई है। खर्चे को कम करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पांच सितंबर को प्रति नियुक्ति पर आए 31 इंजीनियरों को उनके मूल विभाग इसलिए भेजने का फैसला किया है, ताकि हर महीने उनकी तनख्वाह पर खर्च होने वाले 30 लाख रुपए बचाए जा सके। एकाएक 31 अवर और सहायक अभियंताओं के जाने से काम पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर आला अधिकारी बोलने को तैयार नहीं हैं। नई नियुक्ति नहीं होने और सेवानिवृत्ति का सिलसिला जारी रहने का सबसे ज्यादा असर नोएडा के विकास पर पड़ रहा है। जबकि दोनों प्राधिकरणों के अधिकारियों को नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी) के कामकाज की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।

नोएडा प्राधिकरण से 2016 में 100 अधिकारी, इंजीनियर समेत अन्य कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सेक्टरों और गांवों के विकास की जिम्मेदारी उठाने वाले परियोजना अभियंता स्तर के 22 पद खाली हैं। विद्युत यांत्रिकी और सिविल इंजीनियरों के 104 पदों में से 45 खाली चल रहे हैं। मुख्य अभियंता स्तर के दो अधिकारी इसी साल सेवानिवृत्त हुए हैं। तीसरे एकमात्र मुख्य अभियंता होम सिंह यादव अब तीनों जगह के चार्ज को संभाल रहे हैं। इसी तरह  प्राधिकरण के 10 वर्क सर्कलों का काम केवल 5 परियोजना अभियंताओं की देखरेख में चल रहा है। वरिष्ठ परियोजना अभियंता स्तर के सभी 5 पद खाली हैं। जीएम, डीजीएम, एजीएम स्तर के पदों पर भी एक-एक अधिकारी को कई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कामकाज जारी रखने के लिए प्रभारी मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीके अग्रवाल ने ओएसडी संतोष कुमार को ग्रुप हाउसिंग और कमर्शल विभाग का प्रभारी बनाया है। यह दोनों विभाग 31 अगस्त तक जीएम विपिन गौड़ संभाल रहे थे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद संतोष कुमार से इंस्टिट्यूशनल विभाग का काम लेकर ये जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभी तक रिहायशी भूखंड, किसान कोटे के 5 फीसद प्लॉट और बिल्डिंग सेल का काम संभाल रहे ओएसडी आरएस यादव को इंस्टिट्यूशनल विभाग का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। एजीएम आशीष भाटी को सामान्य प्रशासन के अलावा कार्मिक विभाग का अतिरिक्त काम दिया गया है। एजीएम एनपी गौतम को हाउसिंग के अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर विभाग की जिम्मेदारी उठानी होगी।

उच्चाधिकारियों के स्तर पर अब केवल एक अपर मुख्य कार्यपालक अरुण वीर सिंह और उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी सौम्य श्रीवास्तव तैनात हैं। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीके अग्रवाल बतौर प्रभारी सीईओ कामकाज देख रहे हैं। प्राधिकरण सूत्रों के मुताबिक, शासन स्तर से नोएडा, ग्रेटर नोएडा को तरजीह नहीं दिए जाने की वजह से ऐसे हालात पैदा हुए हैं। एक अधिकारी को दो या तीन विभाग दिए जाने से गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। साथ ही सीबीआइ जांच और कानूनी पचड़े में फंसने के डर से ज्यादातर अधिकारी बचाव की मुद्रा में नया कुछ भी करने से सहमे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण के मौजूदा चेयरमैन संजय अग्रवाल के साथ पहली बैठक में भी अधिकारियों ने कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाया था। जब चेयरमैन ने नई नियुक्ति करने की बात कही, तब बताया गया कि भर्ती मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने तब प्रतिनियुक्ति पर अन्य विभागों से इंजीनियर या अधिकारी तैनात करने की बात कही है। अलबत्ता चेयरमैन की बात के विपरीत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने वित्तीय संकट को बताकर 31 इंजीनियरों को उनके मूल विभाग यूपी पीडब्लूडी भेजने का फैसला किया है।बिना कर्मचारी कैसे बढ़ेगी गाड़ी?

’ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 5 सितंबर को प्रति नियुक्ति पर आए 31 इंजीनियरों को उनके मूल विभाग इसलिए भेजने का फैसला लिया है, ताकि हर महीने उनकी तनख्वाह पर खर्च होने वाले 30 लाख रुपए बचाए जा सके। ’नोएडा प्राधिकरण से इस साल 100 अधिकारी, इंजीनियर समेत अन्य कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सेक्टरों और गांवों के विकास की जिम्मेदारी उठाने वाले परियोजना अभियंता स्तर के 22 पद खाली हैं। विद्युत यांत्रिकी और सिविल इंजीनियरों के 104 पदों में से 45 खाली चल रहे हैं।  ’अधिकारियों, इंजीनियरों के दर्जनों पद खाली, एक अधिकारी के जिम्मे कई विभाग ’सीबीआइ जांच और कानूनी पचड़े से सहम कर बचाव मुद्रा में समय काट रहे अधिकारी।

 

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