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दिल्ली: स्वच्छ यमुना मुहिम के लिए नोएडा प्राधिकरण की पहल, सिंचाई नाले की होगी सफाई

यमुना को साफ करने के लिए नोएडा प्राधिकरण अब न केवल शहर बल्कि दिल्ली से आने वाले सीवेज को भी साफ करेगा।

Author नोएडा | April 10, 2017 4:34 AM
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यमुना को साफ करने के लिए नोएडा प्राधिकरण अब न केवल शहर बल्कि दिल्ली से आने वाले सीवेज को भी साफ करेगा। शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाले 17 किलोमीटर लंबे सिंचाई नाले को पुनर्जीवित करने और सुंदर बनाने की योजना के तहत प्राधिकरण को यह कवायद करनी पड़ रही है। करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से सिंचाई नाले के अलावा इससे जुड़ने वाले 13 अन्य छोटे नालों भी स्वच्छ और सुंदर बनाया जाएगा। प्राधिकरण ने आइआइटी रुड़की से आवासीय व औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरने वाले सिंचाई समेत 14 नालों के सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराई है। सौंदर्यीकरण के लिए सिंचाई नाले के किनारों पर सुगंधित पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि सिंचाई विभाग का नाला दिल्ली से नोएडा में सेक्टर-11 से प्रवेश करता है, जो करीब 17 किलोमीटर बाद सेक्टर-150/168 में यमुना नदी में मिलता है। इस नाले में दिल्ली के अशोक नगर व कल्याणपुरी समेत अन्य इलाकों का सीवर का पानी भी आता है। प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, 1976 में नोएडा के गठन से पहले सिंचाई विभाग के नाले का इस्तेमाल करीब 82 गांवों के खेतों की सिंचाई में किया जाता था। नोएडा के गठन के बाद नाले के पानी का सिंचाई में इस्तेमाल कम होता गया।

वहीं शहरीकरण के चलते नाले में सीवर का पानी बहाया जाने लगा। मौजूदा स्थिति में दिल्ली के सीवेज के अलावा नोएडा के भी 13 छोटे नालों का पानी सिंचाई नाले में पहुंच रहा है। बताया गया है कि दिल्ली के अलावा 13 अन्य नालों का पानी सिंचाई नाले के रास्ते यमुना नदी में मिलता है। अगर यमुना को स्वच्छ करना है, तो नाले में सीवर के पानी को बगैर शुद्ध करे यमुना में मिलने से रोकना होगा। इस योजना के लिए प्राधिकरण ने आइआइटी रुड़की से डीपीआर तैयार कराई है। डीपीआर में करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से सभी 14 नालों के पुनर्निमाण के अलावा उनके सौंदर्यीकरण का विवरण दिया गया है। सिंचाई नाले के कटान और अवैध निर्माण को रोकने के लिए नाले की पटरी पर घना वृक्षारोपण और सुंदरता बढ़ाने के लिए खुशबूदार पेड़-पौधे लगाना जरूरी बताया गया है। प्राधिकरण के वरिष्ठ परियोजना अभियंता समाकांत श्रीवास्तव ने बताया कि नोएडा में 5 सीवर शोधन संयंत्र हैं, जो यमुना में पहुंचने वाले सीवर के पानी को शुद्ध करते हैं। नोएडा से यमुना में अशुद्ध सीवर का पानी नहीं पहुंच रहा है। दिल्ली समेत अन्य 13 नालों से आने वाले अशुद्ध पानी को साफ करना सिंचाई विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सिंचाई नाले की सतह को ठोस नहीं किया जाएगा, बल्कि सतह पर रेत की मोटी परत बिछाई जाएगी, ताकि रेत से सीवर का पानी छनकर जमीन के अंदर पहुंचे, जबकि गंदगी ऊपर ही रह जाए। तय समय बाद सतह के ऊपर जमा होने वाली गंदी को साफ कर लिया जाएगा। ऐसे में यमुना में साफ पानी गिरेगा और वह प्रदूषित नहीं होगी।

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