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फ्लैट सबलीज के फेर में फंसा प्राधिकरण

एग्रीमेंट टू सब लीज में सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी? परियोजना में बुकिंग कराते समय बिल्डर की तरफ से दिखाई गई सभी तरह की सुविधाएं, मसलन पार्क, पार्किंग, लिफ्ट, बाजार, क्लब, सीढ़ियों की चौड़ाई आदि समेत इमारत का प्लान मंजूर नक्शे के आधार पर हुआ है या नहीं? इसका कोई मसौदा ही शामिल नहीं है। केवल बरसों तक इंतजार के एहसान बतौर मिले फ्लैट का कब्जा लेने वाले खरीदर और बिल्डर के बीच रजिस्ट्री हो जाएगा। बाद में यदि बिल्डर प्राधिकरण से सीसी लेता है तब 50 रुपए के स्टांप पर आखिरी त्रिपक्षीय समझौता पंजीकृत कर दिया जाएगा। जबकि प्राधिकरण का नियोजन विभाग अधिभोग प्रमाण पत्र जारी करने से पहले परियोजना का निरीक्षण और सुविधाओं की जांच करता है। ऐसे में एग्रीमेंट टू सब लीज के आधार पर कब्जा लेने और प्राधिकरण के सीसी जारी करने के दौरान कोई हादसा हो जाए, तो जिम्मेदार कौन होगा?

Author नोएडा | Updated: December 21, 2018 3:15 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

बगैर रजिस्ट्री कराए आबंटियों को फ्लैट का कब्जा देने की काट और रजिस्ट्री विभाग के सालाना लक्ष्य को पूरा करने को तैयार हुए एग्रीमेंट टू सबलीज के फेर में प्राधिकरण और खरीदार, दोनों फंस गए हैं। एग्रीमेंट टू सबलीज के आधार पर बिल्डर और खरीदार दो पक्षों के बीच रजिस्ट्री हो जाएगी। उसके बाद प्राधिकरण की तरफ से अधिभोग प्रमाण पत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) जारी करने पर महज 50 रुपए के स्टांप पर सबलीज हो जाएगी लेकिन खरीदार को फ्लैट का कब्जा और एग्रीमेंट टू सबलीज के आधार पर रजिस्ट्री होने के बाद बिल्डर ने अधिभोग प्रमाण पत्र के लिए प्राधिकरण का बकाया नहीं चुकाया तब क्या होगा? बिल्डर ने तय नक्शे के आधार पर इमारत और सुविधाएं दी है या नहीं? एग्रीमेंट होने और अधिभोग प्रमाण पत्र जारी होने के बीच यदि हादसा होगा तो जिम्मेदारी किसकी होगी? फिलहाल इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हालांकि शुरुआती फ्री होल्ड की तर्ज पर शुरू हुए बिल्डर और खरीदार के बीच के करार में प्राधिकरण का किरदार पूरी तरह से गायब हो जाएगा। बिल्डरों पर नोएडा प्राधिकरण के करीब 11 हजार करोड़ रुपए हुए हैं। इसी तरह ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का करीब सात हजार करोड़और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण का बिल्डरों पर 3500 करोड़ रुपए बकाया है।

नोएडा की प्रॉपर्टी 99 साल के लिए लीज पर मिलती है। आबंटियों को मालिकाना हक नहीं मिलता है। संपत्ति को फ्री होल्ड करने की मांग पर प्राधिकरण ने 195वीं बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूर कर शासन भेजा है। जहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा। इस दौरान प्राधिकरण का बकाया भुगतान नहीं चुकाने वाले बिल्डरों को अधिभोग प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है। काफी संख्या में बिल्डरों ने तैयार परियोजनाओं में खरीदारों को कब्जा तो दे दिया लेकिन सीसी नहीं मिलने से रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। बताया गया है कि शहर में करीब 50 हजार ऐसे फ्लैटों में आबंटी रह रहे हैं जिनकी रजिस्ट्री नहीं कराई गई है।
रजिस्ट्री नहीं होने से निबंधन विभाग का सालाना लक्ष्य को पूरा नहीं हो पा रहा है। लक्ष्य को पूरा करने और कब्जेदार आबंटियों को मालिकाना भरोसा दिलाने के लिए एग्रीमेंट टू सबलीज मील का पत्थर साबित हो सकता है लेकिन प्राधिकरण के हजारों करोड़ रुपए की देनदारी पर पेच फंस गया है। जिलाधिकारी बीएन सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार का करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। ऐसे में कब्जा मिल चुके फ्लैट की रजिस्ट्री पहले हो जाएगी। बाद में प्राधिकरण अधिभोग प्रमाण पत्र देता रहेगा।जानकारों का मानना है कि प्रशासन के इस फैसले ने प्राधिकरण का वर्चस्व काफी हद तक कम कर दिया है। एग्रीमेंट टू सबलीज में तीसरा पक्ष यानी प्राधिकरण शामिल नहीं है। इसमें बिल्डर और खरीदार के बीच रजिस्ट्री होगी।

प्राधिकरण की तरफ से अधिभोग प्रमाण पत्र जारी होने पर महज 50 रुपए के स्टांप पर सबलीज हो जाएगी। इससे रजिस्ट्री विभाग को राजस्व और फ्लैट आबंटियों को मालिकाना हक मिल जाएगा। इस व्यवस्था में केवल एक सवाल, एग्रीमेंट टू सब लीज के बाद यदि बिल्डर अधिभोग प्रमाण पत्र नहीं लेता है तब प्राधिकरण के राजस्व की भरपाई कैसे होगी?

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