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उत्तर प्रदेश: विशेषज्ञों की समिति नहीं, विद्यार्थी करेंगे सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का चुनाव

उत्तर प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का चयन प्राध्यापकों या विशेषज्ञों की समिति नहीं बल्कि उनसे पढ़ने वाले विद्यार्थी सोशल मीडिया के जरिए करेंगे।

उत्तर प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का चयन प्राध्यापकों या विशेषज्ञों की समिति नहीं बल्कि उनसे पढ़ने वाले विद्यार्थी सोशल मीडिया के जरिए करेंगे। चयन प्रकिया के इस अनूठे बदलाव को यूपी के उच्च शिक्षा विभाग ने लागू किया है। योजना के पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 9 जिलों के 68 सरकारी डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र- छात्राएं सोशल मीडिया के माध्यम फेसबुक एवं ट्विटर जरिए सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का चयन करेंगे। इन कॉलेजों में करीब 1.50 लाख विद्यार्थी सोशल मीडिया के तहत मतदान कर श्रेष्ठ अध्यापक को चुनेंगे। मतदान के जरिए चयनित होने वाले शिक्षकों के बारे में उनके कॉलेज से प्रस्तुतिकरण मांगा जाएगा, जिसमें संबंधित शिक्षक को बताना होगा कि उसने क्या अलग या नया किया है। जिससे विद्यार्थियों की समझ स्पष्ट हुई है या पढ़ाई की तरफ रुझान बढ़ा है।

वास्तव में शिक्षा के क्षेत्र में क्या योगदान दिया है, जिससे विद्यार्थी लाभांवित हुए हैं। प्रत्येक कॉलेज से चयनित होने वाले शिक्षक को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से सर्टिफिकेट आॅफ एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया जाएगा। हर साल प्रत्येक कॉलेज से एक-एक शिक्षक को यह पुरस्कार दिया जाएगा। हालांकि शुरुआत में इस योजना को केवल सरकारी डिग्री कॉलेजों में लागू किया गया है। आगामी वर्षों में इस योजना में पश्चिमी यूपी के स्व वित्त पोषित करीब 1000 कॉलेजों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है, जिस पर अभी निर्णय लिया जाना है।

उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक हर साल पांच सितंबर शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। सम्मानित होने वाले शिक्षकों का चयन एक समिति करती है, जबकि वास्तव में सबसे अच्छे शिक्षक को चुनने का पहला अधिकार उनसे पढ़ने वाले विद्यार्थियों का है। छात्र-छात्राओं की निगाह में उनके शिक्षक के प्रति कितना सम्मान है। या वे उनके पढ़ाने या तर्कशक्ति से प्रभावित हैं। इसलिए उच्च शिक्षा विभाग ने सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़ और बुलंदशहर, कुल नौ जिलों के सरकारी डिग्री कॉलेजों के लिए यह योजना शुरू की है।

शिक्षक दिवस से आठ महीने के दौरान 17 अप्रैल 2019 तक इन जिलों के 68 सरकारी डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब डेढ़ लाख विद्यार्थी सोशल मीडिया के जरिए मतदान कर अपने कॉलेज के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का चयन करेंगे। मतदान के लिए सोशल मीडिया के माध्यम फेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल होगा। इसमें बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड, एमए, एमएससी आदि पाठ्यक्रम के विद्यार्थी मतदान में हिस्सा ले सकेंगे। सर्वश्रेष्ठ शिक्षक की तर्ज पर सर्वश्रेष्ठ प्रधानाचार्य को चुनने की भी योजना उच्च शिक्षा विभाग ने तैयार की है। इसे आगामी वर्षों में लागू करने की तैयारी है। जानकारों का मानना है कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना है, ताकि लीक से हटकर शिक्षा या प्रबंधन के क्षेत्र में नवाचार हो सके।

शिक्षक दिवस सम्मान समारोह को महज औपचारिकता के बजाय वास्तविक लाभार्थी, विद्याथियों के जरिए चुना जाना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। परंपरागत तरीके और लीक से हटकर छात्र-छात्राओं की बेहतरी के लिए अनूठे प्रयोग करने के लिए शिक्षकों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल पैदा होगा। –डॉ आरके गुप्ता, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, मेरठ एवं सहारनपुर मंडल