ताज़ा खबर
 

नोएडा: आधा दर्जन से ज्यादा बिल्डर श्रम विभाग के निशाने पर

आम्रपाली बिल्डर कंपनी के निदेशक और सीईओ की गिरफ्तारी के 24 घंटों के भीतर 4.29 करोड़ रुपए के बकाए की वसूली नोएडा-ग्रेटर नोएडा के लिए नजीर बनी है।
Author नोएड | July 27, 2017 03:48 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

आम्रपाली बिल्डर कंपनी के निदेशक और सीईओ की गिरफ्तारी के 24 घंटों के भीतर 4.29 करोड़ रुपए के बकाए की वसूली नोएडा-ग्रेटर नोएडा के लिए नजीर बनी है। इससे पहले बिल्डरों से बकाया वसूली को लेकर उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था। उधर, आम्रपाली की तर्ज पर बकाया वसूली को लेकर आधा दर्जन से ज्यादा बिल्डर कंपनियों पर श्रम विभाग के अफसरों ने कड़ाई शुरू कर दी है। इन बिल्डरों के खिलाफ भी काफी पहले आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी की जा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक उप्र में पिछली सरकारों के कार्यकाल में श्रम विभाग तो दूर, प्राधिकरण और रजिस्ट्री जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग भी सख्ती नहीं कर पाते थे। सत्ता के समर्थन के चलते बिल्डर ज्यादातर विभागों की देनदारी नहीं चुकाते थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों का ही बिल्डरों पर 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बकाया है।

नोएडा के श्रम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक श्रम उपकर के रूप में बिल्डर कंपनियों को प्रत्येक साल निर्माण की कुल लागत का एक फीसद जमा कराना होता है। निर्माण कार्य शुरू कराने से पहले बिल्डर श्रम विभाग में पंजीकरण कराता है। जिसमें कार्य शुरू होने और खत्म होने की नजदीकी तारीख का उल्लेख करना होता है। इसी आधार पर प्रत्येक साल पूरा होने पर निर्माण पर खर्च हुए मद का एक फीसद विभाग में जमा कराना होता है। निर्माण की लागत में बिजली, तार, पानी- सीवर की लाइन, दरवाजा, खिड़की, मार्बल, रोड़ी, सरिया, टाइल्स और सीमेंट आदि पर होने वाले खर्च को जोड़ा जाता है। बताया गया है कि समय पर उपकर नहीं जमा कराने पर बकाए पर अधिकतम 100 फीसद तक जुर्माना लगाने का अधिकार है। हालांकि केंद्र ने 1996 में श्रम उपकर व्यवस्था को लागू कर दिया था। जबकि उप्र में फरवरी 2009 से लागू हुई है। निर्माण लागत ब्योरा का पीडब्लूडी मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। चूंकि नोएडा- ग्रेटर नोएडा में बड़ी संख्या में बिल्डर परियोजनाएं हैं। इस वजह से पिछले वित्तीय वर्ष में 166 करोड़ रुपए उपकर के रूप में जमा हुए थे। मौजूदा वित्तीय वर्ष के शुरुआती दो महीनों में 26 करोड़ रुपए इस मद में जमा हुए हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.