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नागराज 25 महीने से कर रहे साइकिल यात्रा

नागराज गौड़ा शहर, कस्बों के चौराहों पर लोगों के बीच आंतकवाद, भ्रष्टाचार मिटाने, आपसी भाईचारा बढ़ाने पर चर्चा करते हैं। 25 महीने से जारी साइकिल यात्रा के दौरान नोएडा पहुंचे नागराज गौड़ा ने अपने अनुभव साझा किए है।

Author January 2, 2019 5:37 AM
नागराज गौड़ा

कर्नाटक के हासन जिले के नागराज गौड़ा (50) पंद्रह साल से देशभर में साइकिल यात्रा कर रहे हैं। वे अपनी साइकिल यात्राओं का मकसद देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, विश्व शांति, जल बचाओ-हरियाली बढ़ाओ और सर्वधर्म सद्भाव को बताते हैं। केवल एक साइकिल, उसके आगे लगी तख्ती पर मकसद दर्शाने वाले संदेश और पीछे लगे बोर्ड को वे, प्रदर्शनी बताते हैं। उस पर नामी खिलाड़ियों, फिल्मी कलाकारों आदि की फोटो लगा रखी हैं। इसके अलावा साइकल के स्टैंड पर एक थैले में कुछ सामान ही नागराज की पूंजी है। उन्होंने हालिया साइकिल यात्रा 3 दिसंबर 2017 को मुंबई अंधेरी (पूर्व) से शुरू की थी। करीब 25 महीने लगातार साइकिल चलाते हुए मुंबई से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली होते हुए हाल ही नोएडा पहुंचे। जहां उन्होंने साइकिल यात्राओं को मकसद और दिनचर्या के बारे में बताया। यहां से मथुरा, आगरा, लखनऊ, प्रयागराज में कुंभ मेले में कुछ दिन रहेंगे। उसके बाद मध्य प्रदेश होते हुए महाराष्ट्र में अपनी इस यात्रा का समापन कर आगे की तैयारी करेंगे।

25 महीने से जारी मौजूदा यात्रा के दौरान नागराज ने राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी से मुलाकात की है। नागराज का अपनी यात्राओं के मकसद का प्रचार करने का भी तरीका अनूठा है। शहर, कस्बों के चौराहों, भीड़-भाड़ वाली जगहों, बस स्टैंड आदि के पास वे साइकिल स्टैंड पर लगाकर बैठ जाते हैं। कुछ ही देर में उन्हें इस तरह से चौराहे पर बैठा देख और साइकिल पर लिखी तख्तियों के संदेश देखकर भीड़ एकत्रित हो जाती है। तब नागराज अपनी प्रभावित करने वाली शैली में देश में आतंकवाद, भ्रष्टाचार को मिटाने और आपसी भाईचारा बढ़ाने की जरूरत पर लोगों से चर्चा करते हैं। भीड़ में से कुछ लोग उनसे बहस भी करते हैं लेकिन बाद में सभी उनके विचारों से सहमत हो जाते हैं। इसे देखकर बहुत शांति मिलती है। वे लोगों से कभी भी दान या भीख के रूप में दी जाने वाले रुपए नहीं लेते हैं। चाय, नाश्ता या भोजन मिलने पर कर लेते हैं। यात्राओं में रात होने पर मंदिर, गुरुद्वारा, आर्य समाज गुरुकुल या धर्मशालाओं में पनाह लेते हैं।

हासन जिले के एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले नागराज गौड़ा बताते हैं कि वे जिंदगी में कभी गंभीर नहीं रहा। परिजनों की परचून का कारोबार है। उनका वहां मन नहीं लगा। शुरुआत से साधु संतों का प्रवचन सुनने और उनके डेरे में रहना अच्छा लगता था। करीब 20 साल पहले बंगलुरू में लगे गांधीवादी विचारक सुब्बाराव के शिविर में वे शामिल हुए थे। वहीं से हिंदुस्तान घूमने का मन बना लिया। देशभक्ति का संदेश देने वाली फिल्मों की तरफ रुझान बढ़ने से नागराज मुबंई आ गए। जहां शूटिंग आर्टिस्ट (कलाकार) के रूप में कई फिल्मों और सीरियलों में काम किया। जिस दौरान साइकिल यात्रा नहीं करते हैं, तब वे फिल्मों में सहायक कलाकार के रूप में काम करते हैं।

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