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गोमांस के नाम पर मारा जानेवाला वो अखलाक

अखलाक के भाई और फिलहाल दादरी कस्बे में रह रहे जान मोहम्मद ने बताया कि 28 सितंबर, 2015 के बाद से ही सभी ने गांव छोड़ दिया है।

Author नोएडा | July 3, 2017 01:44 am
मोहम्मद अखलाक़ की कुछ लोगों ने सितंबर 2015 में पीट पीट कर हत्या कर दी थी।

28 सितंबर, 2015 की रात को गोकशी के आरोप में दादरी के बिसहाड़ा गांव में रहने वाले मोहम्मद अखलाक (50) की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। उग्र भीड़ की पिटाई से अखलाक का बेटा दानिश (22) भी गंभीर रूप से घायल हो गया था। आज जब देश भर में भीड़ द्वारा हत्या के मामले बढ़ रहे हैं तो अखलाक की कहानी भी लोगों की जुबां पर आ रही है। अभी कहां है अखलाक का परिवार और क्या है उस केस की स्थिति?  अलबत्ता शुरुआती जांच में नमूने के लिए भेजे गए मीट के बकरे के होने और करीब 9 महीने बाद गाय या गाय के वंश के होने के दावे के बीच अंतत: अभी तक पीड़ित परिवार ही पीड़ा झेल रहा है। हालांकि, मामले में आरोपी बने कई युवक अभी भी जेल में हैं। इसमें एक 24 वर्षीय युवक की मौत भी हो चुकी है। इसके बीच अहम सवाल कि-मांस गाय का था या बकरे का….हत्या कर फैसला करने का अधिकार आरोपियों को किसने दिया।

पूरे परिवार ने गांव छोड़ा
अखलाक के भाई और फिलहाल दादरी कस्बे में रह रहे जान मोहम्मद ने बताया कि 28 सितंबर, 2015 के बाद से ही सभी ने गांव छोड़ दिया है। 17 अक्तूबर, 2015 को अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के दौरे पर आखिरी बार अपनी जन्मभूमि बिसाहड़ा गांव गए थे। गांव में उनके मकान लावारिस की हालत में पड़े हैं। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ दानिश अपने भाई सरताज के साथ दिल्ली के सुब्रतो पार्क इलाके में रह रहा है। सरताज भारतीय वायुसेना के एयरक्राफ्ट यार्ड में नौकरी करता है। उनकी अम्मी इकरामन और बहन शाइस्ता भी दिल्ली में रह रहे हैं। मां असगरी बेगम (82) दादरी में उनके पास रहती हैं। जान मोहम्मद बताते हैं कि उनकी मां का बिसाहड़ा जाने को मन तड़पता है, लेकिन 28 सितंबर 2015 की रात का खौफनाक मंजर दिगाम में आते ही घबरा जाती हैं। सरकारी नौकरी की वजह से सरताज को मीडिया से बात करने की मनाही है। जबकि दिल्ली में रहने वाले अन्य परिजन भी इस मुद्दे पर बात करने को तैयार नहीं हैं।

जान मोहम्मद ने बताया कि 28 सितंबर की रात उनकी मां असगरी बेगम, भाई अखलाक, पत्नी इकरामन, बेटी शाहिस्ता और बेटा दानिश घर पर मौजूद थे। करीब 40-50 लोग रात में भीड़ की शक्ल में वहां पहुंचे और एकाएक अखलाक के साथ मारपीट शुरू कर दी। शोर सुनकर असगरी बेगम, दानिश और इकरामन बचाने आए। भीड़ ने उन्हें भी नहीं बख्शा। जैसे-तैसे असगरी बेगम ने अपने आप को बाथरूम में बंद कर जान बचाई। जबकि भीड़ ने इकरामन और शाइस्ता के साथ भी बदतमीजी करने की कोशिश की। दोनों ने खुद को रसोई में बंद कर बचाया। भीड़ ने अखलाक के अलावा दानिश की भी जमकर पिटाई की। पीटते हुए घर से करीब 150 मीटर दूर पर अखलाक को मरा हुआ छोड़कर हमलावर भागे। दानिश भी पिटाई से बेहोश हो गया था, उसे भी मरा समझकर हमलावर चले गए थे। घटना के काफी देर बाद पहुंची अखलाक और दानिश को अस्पताल लाई।

तब तक अखलाक की मौत हो चुकी थी। जबकि दानिश मरणासन्न हालत में था। दानिश लंबे समय तक सेक्टर- 27 के निजी अस्पताल में भर्ती रहा था। कई आॅपरेशनों के बाद उसकी जान बच पाई थी। उनका आरोप है कि घटना रात करीब 10.30 बजे की थी। जबकि 1 बजे पुलिस घर से करीब 150 मीटर दूर पड़े मांस के टुकड़ों को इकट्ठा कर दादरी के पशु चिकित्सालय ले गई थी। दादरी पशु चिकित्सालय ने जांच के बाद इसे मटन (बकरे का मांस) बताया था। 30 दिसंबर 2015 में भेजे गए नमूने के बकरे का होने की पुष्टि मथुरा फोरेंसिक प्रयोगशाला ने की थी, जिसकी जानकारी उन्हें तत्कालीन जिलाधिकारी एनपी सिंह ने दी थी। अलबत्ता उनके मांगने पर भी इस रिपोर्ट की छाया प्रति उपलब्ध नहीं कराई थी। घटना के करीब 9 महीने बाद एक रिपोर्ट में नमूने के गाय या गांव के वंश का मांस होने का बताया गया था।

 

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