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बीमारी बांट रही हिंडन होगी अब पुनर्जीवित

हिंडन की दुर्गति सहारनपुर से शुरू हो जाती है। यहां इसमें प्रदूषित पावधाई नदी, धमोला और स्टार पेपर मिल का गंदा पानी और निकाय का बिना साफ हुआ पानी एवं कूड़ा कचरा मिल जाता है।

Author सहारनपुर | Published on: September 6, 2017 4:27 AM
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और मेरठ मंडलों के सात जिलों से होकर गुजरने वाली हिंडन नदी को पुनर्जीवित करने के महत्त्वाकांक्षी अभियान की जोरदार शुरुआत हो गई है।

सुरेंद्र सिंघल

करीब 355 किलोमीटर लंबी और सहारनपुर में अपने उद्गम स्थल पुरका टांडा से निकलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और मेरठ मंडलों के सात जिलों से होकर गुजरने वाली हिंडन नदी को पुनर्जीवित करने के महत्त्वाकांक्षी अभियान की जोरदार शुरुआत हो गई है। अपने आरंभ के सफर में करीब 25 किलोमीटर तक हिंडन का जल पूरी तरह से स्वच्छ, शुद्ध और उपयोग लायक है। इसके बाद जैसे ही यह नदी कस्बों और शहरों में पहुंचती यह प्रदूषित हो जाती है। प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सकारात्मक और बदलावकारी सोच रखने वाले प्रशासनिक आला अफसरों ने हिंडन को पुनर्जीवित करने की  महत्त्वाकांक्षी कार्ययोजना शुरू कर दी है। वैसे, हिंडन की दुर्गति सहारनपुर से शुरू हो जाती है। यहां इसमें प्रदूषित पावधाई नदी, धमोला और स्टार पेपर मिल का गंदा पानी और निकाय का बिना साफ हुआ पानी एवं कूड़ा कचरा मिल जाता है। बरसात को छोड़कर हिंडन नदी में अपना खुद का पानी तो नहीं रह पाता। इसके प्रदूषण से गांवों का भू जल भी जहरीला और जानलेवा हो गया है। 10 साल में सैकड़ों ग्रामीणों की कैंसर, दूसरे प्राणघातक रोगों से मौत हो चुकी है। हजारों पशु मर चुके हैं और खेती बाड़ी भी प्रभावित हुई है।

क्या कदम उठाए जाएंगे
हिंडन को पुनर्जीवित करने की कार्ययोजना के बार में मेरठ के कमिश्नर डॉ प्रभात कुमार और सहारनपुर के कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि कई कदम उठाए जाएंगे। सहारनपुर के जिलाधिकारी प्रमोद कुमार पाण्डे ने कहा कि जो योजना तैयार की गई है, सहारनपुर जनपद पर तेजी के साथ कार्य शुरू कर दिया गया है।
1-औद्योगिक कचरे के शोधन के लिए ईटीपी और निकायों के प्रदूषित जल को साफ करने के लिए एसटीपी लगाए जाएंगे।
2-हिंडन के पूरे मार्ग के किनारों पर घना वृक्षारोपण होगा। 19 से 26 अगस्त के बीच तीन लाख पौधे हिंडन वन महोत्सव के तहत लगाए गए हैं।
3-खेती में प्रयुक्त होने वाले घातक पेस्टीसाइडस के कारण पानी प्रदूषित होता है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को आॅर्गेनिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

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