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जीएसटी का असर : दिल्ली से सीधा मुकाबला करने को तैयार दोपहिया वाहनों के वितरक, दामों में 2.5% की कमी

पहले 1 लाख रुपए कीमत की पुरानी कार बेचने पर 14.5 फीसद वैट देय था। अब उसी कार को बेचने पर 28 फीसद जीएसटी देना होगा।

यामाहा FZ25 में 17 इंच के एलॉय व्हील हैं।

जीएसटी को लेकर देशभर में व्यापारियों की नाराजगी और विरोध प्रदर्शन के बीच कुछ वर्ग इसका पुरजोर समर्थन भी कर रहे हैं। इस वर्ग की अगुआई ऐसे व्यापारी और कारोबारी कर रहे हैं, जिन्हें अभी तक दिल्ली के मुकाबले ज्यादा कर देना पड़ता था।जीएसटी लागू होने के बाद कर न केवल दिल्ली के बराबर हो गया है बल्कि पहले के मुकाबले काफी कमी आ गई है। इस मुद्दे पर जीएसटी का समर्थन करने वालों में सबसे आगे उप्र के आॅटोमोबाइल डीलर हैं। जीएसटी लागू होने के बाद उप्र में दिल्ली के मुकाबले दोपहिया वाहनों की कीमत में तकरीबन 2.5 फीसद की कमी आई है। हालांकि कार वर्ग में दिल्ली-एनसीआर में पहले भी कर समेत कीमत एक समान तय थी।

लिहाजा एनसीआर के कार डीलरों पर अंतर नहीं आया है। लेकिन जीएसटी के बाद कारों की कीमत के लिहाज से दाम में काफी कमी आई है। महंगे वर्ग की कारों की कीमत में 10 फीसद से ज्यादा की कमी की उम्मीद है। वाहन बिक्री के जानकारों का मानना है कि जीएसटी लागू होने से पहले दुपहिया वाहनों में अभी तक हरियाणा, बिहार और दिल्ली में उत्तर प्रदेश के मुकाबले कम कर था। इस कारण इन प्रदेशों से सटे उप्र के जिलों का काफी खरीदार कर में अंतर के कारण अन्य राज्यों से वाहन खरीदना पसंद करते थे। नोएडा के ज्यादातर वाहन विक्रेताओं ने दिल्ली के दाम पर वाहन बिक्री के बड़े-बड़े बैनर टांगे हैं। माना जा रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद नोएडा में दोपहिया वाहनों की बिक्री में करीब 15-20 फीसद का उछाल आने की उम्मीद जताई जा रही है।

पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री के कारोबार में गिरावट की आशंका

जीएसटी लागू होने के बाद पुरानी मोटरसाइकिल, स्कूटी और कार आदि के बाजार में बड़ी गिरावट आने की संभावना है। चूंकि नए दोपहिया वाहनों की सीधे-सीधे 2.5 फीसद कीमत कम हुई है। उसके अनुपात में पुराने वाहन की कीमत में 5 फीसद या उससे ज्यादा दाम कम होने चाहिए। माना जा रहा है कि पुरानी कारों की खरीद- बिक्री का कारोबार करने वाली नामचीन कंपनियों के लिए जीएसटी के बाद कुछ दिक्कतें आएगी। उदाहरण के तौर पर पहले 1 लाख रुपए कीमत की पुरानी कार बेचने पर 14.5 फीसद वैट देय था। अब उसी कार को बेचने पर 28 फीसद जीएसटी देना होगा। ऐसे में 1 लाख रुपए की कार बेचने वाले को करीब 14 हजार रुपए कम मिलेंगे। इसी तरह पुरानी कार खरीदने पर भी पहले के मुकाबले करीब दोगुना कर देना पड़ेगा। पुराने दोपहिया वाहनों की खरीद-बिक्री के क्षेत्र में अभी बड़ी कंपनियां नहीं हैं। यह कारोबार ज्यादातर फुटकर में कबाड़ी या मिस्त्रियों के माध्यम से चल रहा है। जबकि पुरानी कार की खरीद-बिक्री में मारुति, महेंद्रा समेत आधा दर्जन से ज्यादा नामचीन कंपनियां हैं। जहां पर पुरानी कार की खरीद और बिक्री, दोनों का पूरा ब्योरा तय नियमों से किया जाता है। मारुति ट्रू वैल्यू में काम करने वाले एक अधिकारी ने बताया कि जीएसटी लागू होने से कर बढ़ा है, लेकिन पूरे देश में एक समान और हमेशा के लिए हुआ है। ऐसे में पुरानी कार बेचने वालों या खरीदने वालों की संख्या में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। एक महीने के भीतर स्थिति पहले की तरह सामान्य होने की उम्मीद जताई है।

अब सीधे लगेगा 28% जीएसटी, 15% तक बिक्री बढ़ने की उम्मीद

नोएडा आॅटोमोबाइल डीलर्स वेलफेयर असोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, जीएसटी लागू होने से पहले दुपहिया वाहनों में दिल्ली और उप्र में कर के अंतर के कारण तकरीबन 25 फीसद ग्राहक दिल्ली से खरीदना पसंद करते थे। पूर्व व्यवस्था में नोएडा में बिक्री करने पर 30.5 फीसद का कर देना पड़ता था। इसमें 14.5 फीसद वैट, 12 फीसद आयकर, 2 फीसद सीएसटी के अलावा 2 फीसद के कर पर टैक्स देना पड़ता था। यह 2 फीसद कर 12 फीसद आयकर और 2 फीसद सीएसटी पर लगने वाले कर की वजह से जुड़ता था। जबकि दिल्ली में 12.5 फीसद वैट, 12 फीसद आयकर, 2 फीसद सीएसटी और 2 फीसद कर पर कर के अधिभार के चलते कुल 28.5 फीसद कर देय था। जीएसटी लागू होने के बाद सभी जगहों पर 28 फीसद का सीधा कर लगने की वजह से नोएडा के ख्ररीदारों को 2.5 फीसद कम कीमत पर वाहन मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

दोपहिया के अलावा चारपहिया (कार, जीप) आदि लागू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में कीमतों में खास अंतर नहीं आया है। हालांकि, एनसीआर के बाहर उत्तर प्रदेश के कार डीलरों को राहत मिलना तय है। असोसिएशन के कोषाध्यक्ष अरविंद शोरेवाला ने बताया कि कार कंपनियां पहले भी कर का समायोजन कर दिल्ली-एनसीआर में एक जैसा दाम तय करती थी। अब भी 28 फीसद कर होने के बाद दिल्ली और एनसीआर में कार के दामों में अंतर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि नोएडा में करीब 42 हजार दोपहिया वाहन साल भर में बिकते हैं। जबकि करीब 10 हजार खरीदार कर में अंतर के कारण नोएडा के बजाए दिल्ली से वाहन खरीदते थे। कर एक समान होने के बाद नोएडा में दाम कम होने से बिक्री में 15 फीसद तक बढ़ोतरी आने की उम्मीद है।

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