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नोएडा: फ्लैट या रकम वापसी को लेकर सड़कों पर उतरे खरीदार, निकाला पैदल मार्च पुलिस से हुई झड़प

खरीदारों की संस्था नेफोमा ने पिछली सरकार के कार्यकाल में तीनों प्राधिकरणों में बिल्डर और अधिकारियों के बीच हुए गोरखधंधे की सीबीआइ जांच कराने की मांग की है।

Author नोएडा | Published on: August 21, 2017 3:32 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

बिल्डरों से बकाया वसूली को लेकर बैंकों और प्राधिकरण की सख्ती से आशियाने का सपना टूटते देख खरीदारों के सब्र का बांध टूट चुका है। जीवन भर की कमाई डूबने की आशंका से घबराए खरीदार सड़कों पर उतरकर मदद की उम्मीद में आवाज उठा रहे हैं। पुरुषों से महिलाएं और बच्चे आशियाने के टूटते सपने को बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
शासन-प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने की कड़ी में रविवार को सैकड़ों की संख्या में फ्लैट खरीदारों ने दादरी-सूरजपुर-छलेरा (डीएससी) मार्ग पर सेक्टर-15 मेट्रो स्टेशन से विरोध मार्च निकाला। बेहद व्यस्त मार्ग पर विरोध मार्च निकालने के दौरान ट्रैफिक जाम हो गया जिसके चलते प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों में कहासुनी व नोकझोंक भी हुई। आक्रोशित खरीदारों ने सरकार और प्राधिकरण पर केवल बिल्डरों का पक्ष सुनने का आरोप लगाया। खरीदारों की संस्था नेफोमा ने पिछली सरकार के कार्यकाल में तीनों प्राधिकरणों में बिल्डर और अधिकारियों के बीच हुए गोरखधंधे की सीबीआइ जांच कराने की मांग की है।

नोएडा एस्टेट फ्लैट आॅनर्स मैन एसोसिएशन (नेफोमा) के बैनर तले आम्रपाली और जेपी के अलावा सेक्टर-107, 137 समेत अन्य जगहों पर बिल्डरों की मनमानी से परेशान बड़ी संख्या में निवेशक सेक्टर-15 मेट्रो स्टेशन पर पहुंचे। शासन, प्रशासन और प्राधिकरण के खिलाफ नारेबाजी करते हुए खरीदारों ने पदयात्रा शुरू की। पदयात्रा के चलते व्यस्त मार्ग पर जाम लग गया। खरीदारों ने फ्लैट या जमा कराए रुपए नहीं मिले तक सड़क से नहीं हटने का एलान कर दिया। पदयात्रा करीब डेढ़ किलोमीटर दूर सेक्टर-16 मेट्रो स्टेशन तक निकाली जानी थी। निवेशकों के आक्रोश और संख्या को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। निवेशकों को हटाने के लिए पुलिस अफसरों ने बातचीत की। निवेशकों के फ्लैट या मकान नहीं मिलने तक सड़क नहीं छोड़ने के एलान के बाद जबरन हटाने पर पुलिस से झड़प हुई। प्रदर्शन में पुरुषों के मुकाबले बच्चों और महिलाओं की संख्या ज्यादा थी जिन्होंने अपने हाथों में तख्तियां उठा रखी थीं। खरीदार अपने फ्लैटों को दिलाने की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि बिल्डर, खरीदारों और प्राधिकरण के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठकों का कोई परिणाम नहीं निकला है। बिल्डर कंपनियां जेपी, आम्रपाली, अर्थ, शुभकामना, लॉजिक्स, एवीजे, सुपरटेक, इंटेलसिटी, देविका होम्स, एनपीएक्स, अर्थकॉन, यूनिटेक, एवीए, मोरफस आदि सभी के खरीदार परेशान हैं। बिल्डर कंपनियों की तरफ से कोई भी लिखित आश्वासन नहीं मिलने से सभी बैठक महज मौखिक साबित हुई हैं। फ्लैट या मकान का कब्जा नहीं मिलने तक बैंकों की किश्ते रुकवाने की मांग की है। इस रकम पर ब्याज भी नहीं लिए जाने की मांग है, क्योंकि अभी तक खरीदारों पर दोहरी मार पड़ी है। इसके अलावा केंद्र की तर्ज पर रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में बगैर संशोधन के उत्तर प्रदेश में लागू किया जाए। फ्लैट बनाने में इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री समेत भूकंपरोधी क्षमता की जांच विशेषज्ञ समिति से कराने को कहा है। सबसे अहम बिल्डरों के मददगार रहे पूर्व प्राधिकरण अफसरों की जांच सीबीआइ से कराने की भी मांग की है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेश को क्रेडाई ने बताया फर्जी

जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित होने और आम्रपाली के खस्ता हालात को लेकर न केवल बुकिंग करा चुके बल्कि आम आदमी भी निवेश करने से कतराने लगा है। इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर बिल्डरों की वित्तीय हालात को लेकर वायरल हो रहे संदेश पर बिल्डरों की संस्था क्रेडाई ने आपत्ति जताई है। क्रेडाई (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) के अध्यक्ष दीपक कपूर ने सेक्टर-6 स्थित नोएडा साइबर सेल में इस संदेश से संबंधित शिकायत की है। इसमें बताया है कि संदेश से बिल्डरों की साख पर खराब असर पड़ रहा है जिसके चलते निवेशकों की निगाहों में उनकी छवि धूमिल होती जा रही है। उन्होंने साइबर सेल के अधिकारियों से वायरल हो रहे संदेश को हटवाकर जारी करने वाले आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। बता दें कि जेपी इंफ्राटेक और आम्रपाली के बकाए को लेकर हुए हालिया घटनाक्रम के दौरान व्हाट्सऐप और एसएमएस के जरिए संदेश फैलने शुरू हो गए हैं जिसमें बताया गया है कि बैंकों से ऋण लेने वाले सभी बिल्डरों को दिवालिया घोषित किया जा रहा है। साथ ही परियोजनाओं पर निर्माण संबंधित लिए सभी लोन भी निरस्त किए जा रहे हैं।

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