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विशेषः नोएडा के कचरे से दिल्ली में बनेगी बिजली

नोएडा से रोजाना निकलने वाले 600 टन कचरे को रखने के लिए जगह नहीं है। कचरे के परिशोधन से इसमें रोजाना करीब 350 टन रिफ्यूज्ड डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) भी मिल रहा है।

Author नोएडा | April 11, 2018 6:10 AM
प्रतीकात्मक चित्र

नोएडा से रोजाना निकलने वाले 600 टन कचरे को रखने के लिए जगह नहीं है। कचरे के परिशोधन से इसमें रोजाना करीब 350 टन रिफ्यूज्ड डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) भी मिल रहा है। इसका इस्तेमाल बिजली बनाने में किया जाना है। चूंकि नोएडा में आधुनिक तकनीक आधारित कूड़ाघर बनना तय नहीं है। लिहाजा नोएडा प्राधिकरण 40 हजार टन आरडीएफ को दिल्ली के गाजीपुर कूड़ाघर में भेजने की तैयारी है। गाजीपुर लैंड फिल परिसर में कूड़े से बिजली बनाने का संयंत्र लगा है। इससे 12 मेगावाट बिजली बनाई जा सकती है। फिलहाल 5 मेगावाट बिजली बन रही है। बिजली उत्पादन के लिए जरूरी आरडीएफ को नोएडा उपलब्ध कराने को तैयार है। पर्यावरणविदें के मुताबिक आरडीएफ देना और बिजली उत्पादन होना, दोनों फायदे के सौदे हैं। गुणवत्ता जांचने के लिए नोएडा से दो ट्रक आरडीएफ गाजीपुर भेजे गए थे। हालांकि आरडीएफ की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है लेकिन अधिकारियों को अनौपचारिक रूप से गुणवत्ता मानक अनुरूप पाई गई है।

41 साल बाद भी नोएडा में घरेलू कूड़ा डालने के लिए तकनीक आधारित जगह नहीं बनाई जा सकी है। लोगों ने जब अपने घरों के पास कूड़ा डालने का विरोध किया, तो प्राधिकरण ने सेक्टर-137 में तकनीक आधारित कूड़ाघर बनाने का दावा कर कूड़ा डालना शुरू कर दिया था। लोगों के विरोध पर 8-9 महीने पहले एनजीटी ने प्राधिकरण को जगह चिन्हित कर आधुनिक कूड़ाघर बनाने का आदेश दिया था। लिहाजा अफसरों ने सेक्टर- 123 में 25 एकड़ जमीन पर अत्याधुनिक कूड़ाघर बनाना तय कर दिया। इस इलाके के लोग तीन महीने से यहां कूड़ाघर बनाने का विरोध कर रहे हैं। सेक्टर-137 से पहले प्राधिकरण ने सेक्टर-54, 68 की जमीन को कूड़ा डालने के लिए इस्तेमाल किया है। सेक्टर-123 में काम शुरू नहीं होने और निवासियों के विरोध के कारण शहर से रोजाना निकलने वाले करीब 600 टन कचरे को फिलहाल सेक्टर-54 स्थित सीवेज शोधन संयंत्र में लाया जा रहा है। जहां पर विंड्रो आर मिट्टी छंटाई मशीन के जरिए कचरे को सुखाने के साथ मिट्टी अलग की जा रही है।

प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक कचरे के सूखने के बाद उससे बदबू या गंदगी नहीं फैलती है। साथ ही उसमें दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण के जन स्वास्थ्य विभाग के परियोजना अभियंता एमसी मित्तल ने बताया कि आरडीएफ को दिल्ली के गाजीपुर स्थित वेस्ट टू एनर्जी संयंत्र को देने की योजना है। गुणवत्ता जांच के लिए दो ट्रक आरडीएफ गाजीपुर संयंत्र भेजे गए थे। अनौपचारिक आधार पर आरडीएफ जांच में मानक के अनुरूप निकले हैं। अगले कुछ दिनों में आधिकारिक जांच रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। उसके बाद नोएडा से भेजे जाने वाले आरडीएफ का इस्तेमाल गाजीपुर में बिजली बनाने में होगा।आरडीएफ मिलने से गाजीपुर संयंत्र का बिजली उत्पादन बढ़ेगा। वहीं, नोएडा में खाली होने वाली जगह का इस्तेमाल हो सकेगा। आरडीएफ का इस्तेमाल बिजली बनाने में होगा। वहीं कचरे से कोयला भी बनाया जा सकेगा। तैयार होने वाले कोयले को एनटीपीसी ने इस्तेमाल करने की रुचि दिखाई है।

1. दिल्ली के गाजीपुर में लगा है वेस्ट टू एनर्जी संयंत्र
2. 12 मेगावाट क्षमता वाला संयंत्र से मिल रही है केवल 5 मेगावाट बिजली, नोएडा के आरडीएफ से बढ़ेगी क्षमता
3. नोएडा के गड्डे भर चुके हैं आरडीएफ से

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