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नोटबंदी ने अटकाई ‘अपने घर’ की चाबी

लिहाजा 3-6 महीने के भीतर फ्लैट की चाबी मिलने की उम्मीद लगाए खरीदारों को तकरीबन डेढ़ से दो साल और इंतजार करना पड़ सकता है।

Author नोएडा | December 15, 2016 3:22 AM
नया रियल एस्‍टेट बिल एक साथ पूरा लागू नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे कानून को एक साथ लागू करने से कई तकनीकी दिक्कतें होंगी।

500 और 1 हजार रुपए के नोट बंद होने का असर लोगों की आम जिंदगी के अलावा आशियाने के सपने पर भी पड़ने लगा है। खास तौर पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) में जहां 2016 के अंत तक कई बिल्डर कंपनियां पजेशन देने का दावा कर रही थीं, वहां पिछले डेढ़ महीने से ज्यादा समय से काम पूरी तरह से बंद पड़ा है। लिहाजा 3-6 महीने के भीतर फ्लैट की चाबी मिलने की उम्मीद लगाए खरीदारों को तकरीबन डेढ़ से दो साल और इंतजार करना पड़ सकता है।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक से सटे इस इलाके में कई लाख फ्लैट बनाए जा रहे हैं। नोएडा की अपेक्षाकृत सस्ती जमीन और यातायात की सुविधा के कारण ज्यादातर मध्यम आय वर्ग वालों ने इसी इलाके में कम कीमत पर फ्लैटों को सालों पहले बुक कराया था। अलबत्ता नोटबंदी के कारण रिहायशी समेत कमर्शल और संस्थागत परियोजनाओं का निर्माण पूरी तरह से ठप पड़ गया है।रियल एस्टेट जानकारों के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल की मंदी के दौरान भी ग्रेटर नोएडा वेस्ट में फ्लैटों की बुकिंग और निर्माण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में चल रहा था। कई दर्जन बिल्डरों के कई मंजिलों से लेकर अलग टाउनशिप जैसी परियोजनाओं में लोगों ने निवेश किया था। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत आसपास के इलाकों में किराए पर रहने वालों ने 5-6 साल पहले सस्ते दामों के लालच में यहां फ्लैट बुक कराए थे। अलबत्ता नोटबंदी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नए नोटों की कमी के कारण मजदूरों का रोजगार छिन गया है या फिर काम नहीं मिलने के कारण वे पलायन कर चुके हैं। जिस वजह से करीब डेढ़ महीने से काम पूरी तरह से रुका हुआ है। इस वजह से 6 महीने बाद मिलने वाले फ्लैट में अब करीब 1 से डेढ़  साल की देरी होने की उम्मीद है। जबकि जल्द पजेशन का दावा कर बिल्डर कंपनियां बकाया रकम पहले ही वसूल चुकी हैं।

नाम न छापने की शर्त पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक बिल्डर परियोजना में फ्लैट बुक कराने वाले खरीदार को डेढ़ साल का इंतजार करने को कहा है। जबकि खरीदार करीब 6 महीने पहले ही 90 फीसद रकम का भुगतान कर चुका है। इस मामले पर नोएडा एस्टेट फ्लैट आॅनर्स मैन असोसिएशन (नेफोमा) के अध्यक्ष अन्नू खान ने बिल्डर कंपनियों पर खरीदारों को परेशान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पहले कोर्ट, फिर किसान, एनजीटी और अब नोटबंदी की वजह बिल्डर कंपनियों को ग्राहकों को परेशान करने का मौका मिल गया है। सभी खरीदारों से 90 फीसद रकम लेने के बाद कैसे बिल्डर के पास रुपए खत्म हो गए हैं। नोटों के नाम पर जानबूझकर निर्माण सामग्री देने वालों और मजदूरों को भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिस वजह से निर्माण कार्य ठप पड़ा है। इसके खिलाफ 18 दिसंबर को असोसिएशन के बैनर तले खरीदारों ने प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

 

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