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कचरे पर कलह: कचरा घर मामले में पीछे हटे प्राधिकरण पर सवाल

नोएडा में 40 साल बाद भी कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं हुई है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेश का हवाला देकर प्राधिकरण सेक्टर-123 में जहां कचरा घर बनाने जा रहा था। वहां कूड़ा डालने के सिर्फ चार दिन बाद ही प्राधिकरण ने हाथ पीछे खींचकर कचरा घर बनाने की कमान जिला प्रशासन के मत्थे मढ़ दी।

Author नोएडा, 25 जून। | June 26, 2018 07:13 am
सेक्टर-123 में प्राधिकरण बना रहा है आधुनिक तकनीक का कूड़ा घर

नोएडा में 40 साल बाद भी कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं हुई है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेश का हवाला देकर प्राधिकरण सेक्टर-123 में जहां कचरा घर बनाने जा रहा था। वहां कूड़ा डालने के सिर्फ चार दिन बाद ही प्राधिकरण ने हाथ पीछे खींचकर कचरा घर बनाने की कमान जिला प्रशासन के मत्थे मढ़ दी। सेक्टर-123 में कचरा घर बनाने की योजना पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद एकाएक पीछे हटने से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है। सेक्टर-123 में कचरा घर पीछे हटने की वजह जन-विरोध, प्रदर्शन या मुख्यमंत्री का संज्ञान अथवा एनजीटी में गलत दस्तावेज प्रस्तुत करना, वास्तविकता में क्या कारण रहा है, इसे अभी तक कोई बता नहीं पा रहा है।

प्राधिकरण के 2012 मास्टर प्लान में सेक्टर-123 और सेक्टर-151ए को ठोस कचरा प्रबंध सयंत्र (वेस्ट टू एनर्जी प्लांट) के रूप में विकसित करने की योजना थी। इसे 2006 में मास्टर प्लान बनाते समय तय किया था। इसी योजना को मास्टर प्लान 2031 में भी शामिल कर बोर्ड बैठक में मंजूर कर लिया था। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से भी इस योजना को मंजूरी मिल गई थी। अलबत्ता 2018 तक प्राधिकरण ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। सेक्टर-123 में कचरा घर के विरोध में 25 दिन चले प्रदर्शन के बाद कचरा घर बनाने की कमान जिला प्रशासन को सौंप कर कम आबादी वाले ग्रेटर नोएडा या यमुना प्राधिकरण इलाके में जमीन की तलाश कर रहे हैं। वहीं, कचरा घर मामले पर अचानक पीछे हटने से प्राधिकरण के अफसर और कर्मचारियों में निराशा है।

दूसरी तरफ, कचरा घर के विरोध में आंदोलन करने वाले इसे अपनी जीत मान रहे हैं। आंदोलन में शामिल सपा नेता सूबे यादव ने कहा कि प्राधिकरण ने एनजीटी में झूठे दस्तावेजों का सहारा लिया है। 168वीं बोर्ड बैठक में अस्तौली में कचरा घर बनाने पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सहमति दी थी। इसके बाद अस्तौली के लिए राज्य स्तरीय पर्यावरणीय मंजूरी ली गई थी। इतना होने पर प्राधिकरण ने स्थान बदलने के खुद फैसला ले लिया। इसे बोर्ड के एजंडे में शामिल किया लेकिन जगह के बारे में नहीं बताया। यहां तक कि सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के जवाब में भी प्राधिकरण ने सेक्टर-123 की योजना खारिज करने की बात कही थी। जिसे बाद में बदल कर दस्तावेजों के आधार पर एनजीटी से अनुमति ली।

खोदना खुर्द में भी विरोध, डीएम से मिलेंगे प्रदर्शनकारी

ग्रेटर नोएडा के खोदना खुर्द में अस्थायी कूड़ा घर बनाने के योजना पर भी पानी फिरने की आशंका बन रही है। इसके विरोध में ग्रामीण लामबंद होकर आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। वहीं, सेक्टर-123 के प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को जिलाधिकारी से मुलाकात करेगा। जिसमें जिलाधिकारी पूरी योजना प्रतिनिधि मंडल के समक्ष रखेंगे। गांवों के लिए पैकेज के साथ समिति के गठन की भी जानकारी दी जाएगी। माना जा रहा है कि प्राधिकरण व जिला प्रशासन से लिखित जवाब मिलने पर प्रदर्शन तत्काल बंद कर दिया जाएगा।

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